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संत समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Aug 2018 11:54 PM IST
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आमी नदी में बढ़ते प्रदूषण से संत समाज नाराज
- फोटो : अमर उजाला
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मगहर। आमी नदी में बढ़ते प्रदूषण से नाराज संत समाज ने शासन प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। साथ ही 10 दिन की मोहलत देते हुए जल समाधि लेने तक की चेतावनी दी है।
गुरुवार को संत समाज की बैठक में संत डॉ. हरिशरण शास्त्री ने कहा कि सद्गुरु कबीर की निर्वाण स्थली मगहर के कबीर चौरा परिसर के पूर्वी तट से बहने वाली आमी नदी जिसे कबीर अमिया कहकर पुकारते थे, वह पुन: प्रदूषित हो रही है। इसको लेकर संत समाज आक्रोशित है।
कहा कि शासन प्रशासन की उदासीनता इसके लिए जिम्मेदार है। डॉ. हरिशरण शास्त्री ने कहा कि कभी क्षेत्र के लिए जीवन दायिनी कही जाने वाली आमी नदी का जल काला हो गया है। उससे दुर्गंध भी आ रही है।
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इसका प्रभाव है कि पशु-पक्षी जान लेवा बीमारियों का शिकार होते जा रहे हैं। आमी के जल को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए स्थानीय लोगों के अलावा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं, साधु-संतों, जन प्रतिनिधियों ने आंदोलन किया, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।
कबीर चौरा परिसर का विकास अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो रहा है। जबकि सद्गुरु कबीर से जुड़ी आमी नदी पर ध्यान नहीं है। प्रधानमंत्री के मगहर में कार्यक्रम के दौरान आमी नदी कुछ हद तक अपने अस्तित्व को लौटती नजर आ रही थी।
लग रहा था कि सरकारी अमला आमी नदी के प्रदूषण को लेकर गंभीर है, लेकिन अब पुन: आमी नदी का जल प्रदूषित होकर काला हो रहा है।
बैठक में संत केशवदास शास्त्री, संत अरविंद दास शास्त्री, अवधेश दास,राजेंद्र दास,राघव दास,मून दास, बुद्धन दास, शांति दास, पुजारी आदि लोग मौजूद रहे।
नगर पंचायत प्रशासन ने कराई सफाई
मगहर। नगर पंचायत प्रशासन ने वृहस्पतिवार को कबीर चौरा परिसर के पूरब तट से सटकर बह रही आमी नदी से जलकुंभी को निकालकर साफ सफाई कराई। नगर पंचायत चेयरमैन संगीता वर्मा के निर्देश पर सफाई अभियान चलाया गया। कार्यालय सहायक संजय दूबे ने बताया कि अभियान आगे भी चलेगा।
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गुरुवार को संत समाज की बैठक में संत डॉ. हरिशरण शास्त्री ने कहा कि सद्गुरु कबीर की निर्वाण स्थली मगहर के कबीर चौरा परिसर के पूर्वी तट से बहने वाली आमी नदी जिसे कबीर अमिया कहकर पुकारते थे, वह पुन: प्रदूषित हो रही है। इसको लेकर संत समाज आक्रोशित है।
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कहा कि शासन प्रशासन की उदासीनता इसके लिए जिम्मेदार है। डॉ. हरिशरण शास्त्री ने कहा कि कभी क्षेत्र के लिए जीवन दायिनी कही जाने वाली आमी नदी का जल काला हो गया है। उससे दुर्गंध भी आ रही है।
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इसका प्रभाव है कि पशु-पक्षी जान लेवा बीमारियों का शिकार होते जा रहे हैं। आमी के जल को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए स्थानीय लोगों के अलावा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं, साधु-संतों, जन प्रतिनिधियों ने आंदोलन किया, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।
कबीर चौरा परिसर का विकास अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो रहा है। जबकि सद्गुरु कबीर से जुड़ी आमी नदी पर ध्यान नहीं है। प्रधानमंत्री के मगहर में कार्यक्रम के दौरान आमी नदी कुछ हद तक अपने अस्तित्व को लौटती नजर आ रही थी।
लग रहा था कि सरकारी अमला आमी नदी के प्रदूषण को लेकर गंभीर है, लेकिन अब पुन: आमी नदी का जल प्रदूषित होकर काला हो रहा है।
बैठक में संत केशवदास शास्त्री, संत अरविंद दास शास्त्री, अवधेश दास,राजेंद्र दास,राघव दास,मून दास, बुद्धन दास, शांति दास, पुजारी आदि लोग मौजूद रहे।
नगर पंचायत प्रशासन ने कराई सफाई
मगहर। नगर पंचायत प्रशासन ने वृहस्पतिवार को कबीर चौरा परिसर के पूरब तट से सटकर बह रही आमी नदी से जलकुंभी को निकालकर साफ सफाई कराई। नगर पंचायत चेयरमैन संगीता वर्मा के निर्देश पर सफाई अभियान चलाया गया। कार्यालय सहायक संजय दूबे ने बताया कि अभियान आगे भी चलेगा।