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चालीस फीसदी हैंडपंपों का पानी हुआ जहरीला

Fri, 27 Jul 2018 11:33 PM IST
शोभित कुमार पांडेय संतकबीरनग
शोभित कुमार पांडेय संतकबीरनग Updated Fri, 27 Jul 2018 11:33 PM IST
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चालीस फीसदी हैंडपंपों का पानी हुआ जहरीला
जूनियर हाईस्कूल में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप उगल रहा दूषित जल। - फोटो : अमर उजाला
संतकबीरनगर। पूर्वांचल में जेई/एईएस पिछले कई सालों से मासूमों पर कहर बरपा रहा है। वर्ष 2016-17 में जेई और एईएस से 12 मौते भी हुई थीं। इसे देखते हुए शासन ने संतकबीरनगर जनपद को जेई प्रभावित घोषित किया है। जेई, एईएस से बचाव को लेकर पूरा प्रशासनिक अमला जागरूकता की दिशा में जुटा है। इसके बाद भी यहां पेयजल की व्यवस्था ठीक नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि जिले के करीब चालीस फीसदी हैंडपंपों का पानी जहरीला है। पानी में आर्सेनिक, फ्लारोइड व नाइट्रेट की मात्रा मानक से अधिक पाई गई है। ऐसे में इन हैंडपंपों के पानी पीने से बीमारियों के फैलने की आशंका प्रबल है।
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जनपद में 794 ग्राम पंचायतें और 1660 गांव हैं। ग्रामीण क्षेत्र में 26922 और शहरी क्षेत्र में 675 इंडिया मार्का हैंड पंप स्थापित किए गए हैं।
जिले में 1604 परिषदीय स्कूल हैं। जिसमें 400 हैंडपंप खराब पड़े हैं या फिर दूषित पानी दे रहे हैं। हैंडपंप की औसत गहराई 120 फीट निर्धारित है, लेकिन अधिकतर हैंडपंप सेकेंड स्टेज पर हैं। इन्हें सौ फुट तक ही बोर किया गया है। जबकि लोगों के घरों में छोटे हैंडपंप भी लगे हैं, जिसका पानी लोग पी रहे हैं। हैंडपंपों के मरम्मत और रिबोर कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंप दी गई है। जिम्मेदार लोगों का मानना है कि छोटे हैंडपंपों का पानी पूरी तरह से प्रदूषित है। ऐसे में हैंसर सहित विभिन्न क्षेत्रों में छोटे हैंडपंपों का पानी को पीने योग्य न बताते हुए क्रॉस के निशान बनाए जा रहे हैं। इस काम में सफाई कर्मियों को भी लगाया गया है। जबकि जहां पर इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं, वहां भी पानी प्रदूषित आ रहा है। हैसर ब्लॉक की बात करें तो यहां के बभनौली, कोचरी, मुंडेरा शुक्ल, डुहवा कला, रामपुर उत्तरी, होसियारी, भैसाकूट, बरगदवा, पिपरा मगर्वी सहित नौ गांवों के पानी में पूर्व में हुई जांच में आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई गई थी। विभाग के मुताबिक पानी में आर्सेनिक की मात्रा शून्य होनी चाहिए, लेकिन जो मात्रा मिल रही है, उसमें 75 पर मिलियन से अधिक है। डॉक्टर एके शर्मा बताते हैं कि पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने से शरीर पर लाल दाने व चकत्ता बन जाते हैं, जो धीरे-धीरे बढ़ता ही रहता है। इसी तरह पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से हड्डियां प्रभावित होती हैं।
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जल निगम के एक्सईन वी पी सिंह ने बताया कि जिले में 27597 इंडिया मार्क हैंडपंप लगाए गए हैड्ड। खराब हैंडपंप की मरम्मत और रिबोर कराने की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायतों की है। 22 गांव जेई, एईएस से प्रभावित चिह्नित किए गए हैं। जहां पाइप लाइन के जरिए पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। एक सप्ताह के भीतर शासन को प्रस्ताव भेज दिया जाएगा। जिले के 22 गांवों में पाइप लाइन से लोगों को पानी मिल रहा है। जबकि 38 गांवों में काम चल रहा है। यह सच है कि 30 से 35 फीसदी हैंडपंप के पानी दूषित है। अब मरम्मत और रिबोर की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। पानी में आयरन की मात्रा अधिक है। वैैसे पूर्व में जो पानी की जांच हुई थी और उसमें फ्लोराइड, नाइट्रेट, आर्सेनिक की मात्रा अधिक मिलने की बात बताई है, वह जांच एक प्राइवेट एजेंसी ने की थी। यदि शासन स्तर से निर्देश प्राप्त होगा तो दुबारा पानी की जांच लखनऊ के विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेज कर कराया जाएगा।
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