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तीन दिन में ग्राम पंचायतों को देना होगा खर्च का हिसाब
Sat, 02 Feb 2019 10:38 PM IST
राकेश पांडेय
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Published by: राकेश पांडेय
Updated Sat, 02 Feb 2019 10:38 PM IST
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संतकबीरनगर। जिले की सभी 794 ग्राम पंचायतें बजट खर्च करने में तो आगे हैं, लेकिन खर्च हुए धन का ब्योरा नहीं दे रही हैं। दो महीने में कई बार रिमाइंडर जारी होने के बाद भी अभी 296 ग्राम पंचायतों ने प्रिया सॉफ्ट पर कार्य का ब्योरा अपलोड नहीं कराया है। सबसे खराब हालत तो कराए गए कार्य की जियो टैगिंग की है। नाराज डीपीआरओ ने सभी एडीओ पंचायतों का वेतन रोकते हुए तीन दिन के अंदर प्रत्येक ग्राम पंचायत से उपभोग प्रमाण पत्र लेकर जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
जिले की ग्राम पंचायतों को इस वित्तीय वर्ष में 86 करोड़, 80 लाख, 6286 रुपये का बजट दिया गया था। ग्राम पंचायतों ने आवंटित बजट से भी आगे बढ़ते हुए करीब 88 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। लेकिन इनमें से करीब 32 करोड़, 84 लाख रुपये का ही डिटेल प्रिया सॉफ्ट पोर्टल पर अपलोड कराया गया है। इन 794 में से 296 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिन्होंने अब तक प्रिया सॉफ्ट पोर्टल पर एक भी डाटा अपलोड नहीं कराया है। इनकी वजह से प्रिया सॉफ्ट पर डाटा अपलोड करने का प्रतिशत भी 37.77 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। यही स्थित एम एक्शन पोर्टल पर है। इस वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायतों में 52214 कार्य कराते हुए करीब 88 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन एम एक्शन पोर्टल पर इनमें से पूर्ण कार्य की प्रगति शून्य है। इन कार्यों में से केवल 4392 कार्यों को ही प्रशासनिक स्वीकृति अपलोड है।
फॉर्मेट पर मांगी गई सूचनाएं
डीपीआरओ कार्यालय से सभी एडीओ पंचायतों को एक फॉर्मेट भेजा गया है। इस फार्मेट पर ग्राम पंचायत को राज्य वित्त व चौदहवें वित्त से मिले बजट का हिसाब देना है। इसमें वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले उपलब्ध बजट, इस वित्तीय वर्ष में मिला बजट, खर्च किए गए बजट व अवशेष बजट का ब्योरा देना है।
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तीन वर्ष में हुए कार्यों की होगी जियो टैगिंग
डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि ग्राम पंचायतों में कराए गए कार्यों की प्रिया सॉफ्ट पर एंट्री के साथ ही एक्शन सॉफ्ट पर भी एंट्री होनी है। सभी कार्यों की जियो टैगिंग भी होनी है। वर्ष 2016-17 से लेकर अब तक हुए कार्यों की जियो टैगिंग कराई जा रही है। लेकिन कार्य बेहद सुस्त है। इसके चलते सभी एडीओ पंचायतों का वेतन रोक दिया गया है और तीन दिन के अंदर ग्राम पंचायतों में खर्च हुए धन का उपभोग प्रमाण पत्र जमा करने तथा एक्शन साफ्ट पर एंट्री व जियो टैगिंग कराने का निर्देश दिया गया है। ये कार्य पूर्ण होने पर ही वेतन जारी होगा।
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जिले की ग्राम पंचायतों को इस वित्तीय वर्ष में 86 करोड़, 80 लाख, 6286 रुपये का बजट दिया गया था। ग्राम पंचायतों ने आवंटित बजट से भी आगे बढ़ते हुए करीब 88 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। लेकिन इनमें से करीब 32 करोड़, 84 लाख रुपये का ही डिटेल प्रिया सॉफ्ट पोर्टल पर अपलोड कराया गया है। इन 794 में से 296 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिन्होंने अब तक प्रिया सॉफ्ट पोर्टल पर एक भी डाटा अपलोड नहीं कराया है। इनकी वजह से प्रिया सॉफ्ट पर डाटा अपलोड करने का प्रतिशत भी 37.77 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। यही स्थित एम एक्शन पोर्टल पर है। इस वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायतों में 52214 कार्य कराते हुए करीब 88 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन एम एक्शन पोर्टल पर इनमें से पूर्ण कार्य की प्रगति शून्य है। इन कार्यों में से केवल 4392 कार्यों को ही प्रशासनिक स्वीकृति अपलोड है।
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फॉर्मेट पर मांगी गई सूचनाएं
डीपीआरओ कार्यालय से सभी एडीओ पंचायतों को एक फॉर्मेट भेजा गया है। इस फार्मेट पर ग्राम पंचायत को राज्य वित्त व चौदहवें वित्त से मिले बजट का हिसाब देना है। इसमें वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले उपलब्ध बजट, इस वित्तीय वर्ष में मिला बजट, खर्च किए गए बजट व अवशेष बजट का ब्योरा देना है।
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तीन वर्ष में हुए कार्यों की होगी जियो टैगिंग
डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि ग्राम पंचायतों में कराए गए कार्यों की प्रिया सॉफ्ट पर एंट्री के साथ ही एक्शन सॉफ्ट पर भी एंट्री होनी है। सभी कार्यों की जियो टैगिंग भी होनी है। वर्ष 2016-17 से लेकर अब तक हुए कार्यों की जियो टैगिंग कराई जा रही है। लेकिन कार्य बेहद सुस्त है। इसके चलते सभी एडीओ पंचायतों का वेतन रोक दिया गया है और तीन दिन के अंदर ग्राम पंचायतों में खर्च हुए धन का उपभोग प्रमाण पत्र जमा करने तथा एक्शन साफ्ट पर एंट्री व जियो टैगिंग कराने का निर्देश दिया गया है। ये कार्य पूर्ण होने पर ही वेतन जारी होगा।