{"_id":"5bf05fe4bdec2269436ba459","slug":"111542479844-sant-kabir-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वच्छ भारत अभियान---","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वच्छ भारत अभियान---
Updated Sun, 18 Nov 2018 12:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तय तारीख के बाद भी गांव नहीं बन पाए स्वच्छ
पहले दो अक्तूबर और बाद में 10 नवंबर को जिले को ओडीएफ घोषित करना था
794 ग्राम पंचायतों में से अब तक 577 ग्राम पंचायतों का हो पाया है सत्यापन
जिला विकास अधिकारी की अगुवाई में 65 टीमें कर रही हैं ग्राम पंचायतों की जांच
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित करने के लिए दो बार तारीख तय हो चुकी है, लेकिन कार्य अब तक पूर्ण नहीं हो पाए हैं। कई गांवों में शौचालय का निर्माण अधूरा है तो कई लोग किस्त के लिए दौड़ रहे हैं। हालांकि पंचायती राज विभाग ने जिले के सभी 794 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित करने के लिए प्रस्तावित कर दिया है, मगर 577 ग्राम पंचायतों का ही सत्यापन हो पाया है। जिले में सिर्फ 68 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित करने के साथ ही पूर्ण रूप से सत्यापित भी किया गया है।
जिले की 794 ग्राम पंचायतों में 1605 राजस्व गांव हैं। वर्ष-2012 के हाऊस होल्ड सर्वे के अनुसार इन गांवेें में 333292 परिवार थे। इनमें 99105 परिवारों में ही शौचालय था। शेष 234187 परिवारों में शौचालय का निर्माण कराया जाना था। शौचालय निर्माण के बाद इनकी जियो टैगिंग (निर्माण कार्य की फोटो वेबसाइट पर अपलोड करने का कार्य) होना है। जिले का एमआईएस डाटा (शौचालय निर्माण का कंप्यूटरीकृत आंकड़ा) तो शत-प्रतिशत पूर्ण है, लेकिन जियो टैगिंग के मामले में हालत खराब है। मात्र 76.80 प्रतिशत शौचालयों की ही जियो टैगिंग हो पाई है। शासन ने दो अक्तूबर को ही जिले को संपूर्ण रूप से ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य रखा था। बाद में इसे बढ़ाकर 20 अक्तूबर कर दिया था। इसके बाद अगली तारीख 10 नवंबर तय की गई, लेकिन अब तक कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि वर्ष-2012 के सर्वे के अनुसार सभी दो लाख चौंतीस हजार परिवारों में शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा हो गया है। अब सत्यापन किया जा रहा है। अत तक 577 गांवों का सत्यापन हो चुका है। जिले को पूर्ण रूप से ओडीएफ घोषित करने की तारीख 30 नवंबर हो गई है।
1027 गांवों का सत्यापन बाकी
पंचायतीराज विभाग जिन गांवों को ओडीएफ घोषित करने का प्रस्ताव डीएम को भेजता है, उसकी जांच जिला स्तरीय टीम करती है। इसके लिए डीएम ने डीडीओ की अगुवाई में 65 टीमों का गठन किया है। पंचायतीराज विभाग ने 794 में से 793 गांवों को ओडीएफ के लिए प्रस्तावित किया है। जिले की 68 ग्राम पंचायतों को ही पूर्ण रूप से ओडीएफ किया गया है। इनमें बघौली में दो, बेलहर कलां में नौ, हैंसर बाजार में छह, खलीलाबाद में छह, मेंहदावल में नौ, नाथनगर में चार, पौली में 15, सांथा में तीन और सेमरियांवा में 14 ग्राम पंचायतें पूर्ण रूप से ओडीएफ हो चुकी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पहले दो अक्तूबर और बाद में 10 नवंबर को जिले को ओडीएफ घोषित करना था
794 ग्राम पंचायतों में से अब तक 577 ग्राम पंचायतों का हो पाया है सत्यापन
जिला विकास अधिकारी की अगुवाई में 65 टीमें कर रही हैं ग्राम पंचायतों की जांच
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित करने के लिए दो बार तारीख तय हो चुकी है, लेकिन कार्य अब तक पूर्ण नहीं हो पाए हैं। कई गांवों में शौचालय का निर्माण अधूरा है तो कई लोग किस्त के लिए दौड़ रहे हैं। हालांकि पंचायती राज विभाग ने जिले के सभी 794 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित करने के लिए प्रस्तावित कर दिया है, मगर 577 ग्राम पंचायतों का ही सत्यापन हो पाया है। जिले में सिर्फ 68 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित करने के साथ ही पूर्ण रूप से सत्यापित भी किया गया है।
जिले की 794 ग्राम पंचायतों में 1605 राजस्व गांव हैं। वर्ष-2012 के हाऊस होल्ड सर्वे के अनुसार इन गांवेें में 333292 परिवार थे। इनमें 99105 परिवारों में ही शौचालय था। शेष 234187 परिवारों में शौचालय का निर्माण कराया जाना था। शौचालय निर्माण के बाद इनकी जियो टैगिंग (निर्माण कार्य की फोटो वेबसाइट पर अपलोड करने का कार्य) होना है। जिले का एमआईएस डाटा (शौचालय निर्माण का कंप्यूटरीकृत आंकड़ा) तो शत-प्रतिशत पूर्ण है, लेकिन जियो टैगिंग के मामले में हालत खराब है। मात्र 76.80 प्रतिशत शौचालयों की ही जियो टैगिंग हो पाई है। शासन ने दो अक्तूबर को ही जिले को संपूर्ण रूप से ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य रखा था। बाद में इसे बढ़ाकर 20 अक्तूबर कर दिया था। इसके बाद अगली तारीख 10 नवंबर तय की गई, लेकिन अब तक कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि वर्ष-2012 के सर्वे के अनुसार सभी दो लाख चौंतीस हजार परिवारों में शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा हो गया है। अब सत्यापन किया जा रहा है। अत तक 577 गांवों का सत्यापन हो चुका है। जिले को पूर्ण रूप से ओडीएफ घोषित करने की तारीख 30 नवंबर हो गई है।
विज्ञापन
1027 गांवों का सत्यापन बाकी
पंचायतीराज विभाग जिन गांवों को ओडीएफ घोषित करने का प्रस्ताव डीएम को भेजता है, उसकी जांच जिला स्तरीय टीम करती है। इसके लिए डीएम ने डीडीओ की अगुवाई में 65 टीमों का गठन किया है। पंचायतीराज विभाग ने 794 में से 793 गांवों को ओडीएफ के लिए प्रस्तावित किया है। जिले की 68 ग्राम पंचायतों को ही पूर्ण रूप से ओडीएफ किया गया है। इनमें बघौली में दो, बेलहर कलां में नौ, हैंसर बाजार में छह, खलीलाबाद में छह, मेंहदावल में नौ, नाथनगर में चार, पौली में 15, सांथा में तीन और सेमरियांवा में 14 ग्राम पंचायतें पूर्ण रूप से ओडीएफ हो चुकी हैं।
विज्ञापन