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Sanjeev Jeeva Murder: जीवा को मारने वाले शूटर का विजय नहीं ये है असली नाम, दर्ज हैं सिर्फ इतने केस; पूरी कहानी
Thu, 08 Jun 2023 10:33 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 08 Jun 2023 10:33 AM IST
सार
गैंगस्टर जीवा को मारने वाले विजय यादव का न बड़ा आपराधिक इतिहास है। न कोई रंजिश। उसे मोहरा बनाया गया है। आरोपी विजय यादव पर लड़की भगाने का एक केस दर्ज हुआ था, जिसमें समझौता हो चुका था। एक कोविड उल्लंघन का था, कोई बड़ा केस दर्ज नहीं हुआ, न ही जीवा से कोई उसकी कोई दुश्मनी थी।
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Sanjeev Jeeva Murder
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कुख्यात संजीव उर्फ जीवा को को मारने वाले विजय यादव का न कोई बड़ा आपराधिक इतिहास है। न संजीव से उसकी कोई सीधे रंजिश है। ऐसा लगता है कि उसे मोहरा बना जीवा को रास्ते हटाया गया। जौनपुर का वह रहने वाला था और मुंबई में तीन साल तक रहा। इसलिए पुलिस जौनपुर व मुंबई का कनेक्शन तलाश रही है।
पता किया जा रहा है कि जौनपुर में उसका कौन बड़ा माफिया-गैंगस्टर उसके करीबी हैं और वह मुंबई में किस ठिकाने पर रहा। एक महीने से वह कहां अंडरग्राउंड रहा। पुलिस का दावा है कि हमलावर विजय शूटर है। उसका असली नाम आनंद यादव है।
जौनपुर और आजमगढ़ में पोक्सो समेत दो केस दर्ज हैं। जौनपुर में उस पर सिर्फ एक केस कोविड प्रोटोकॉल उल्लंघन का दर्ज था। उसके पहले आजमगढ़ में किशोरी को भगाने का केस हुआ था, जिसमें वह जेल गया था।
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बाद में इस केस में समझौता हो गया था। इसके अलावा उस पर कोई भी गंभीर आपराधिक केस दर्ज नहीं है। जानकारी के मुताबिक संजीव से उसका कोई कनेक्शन भी नहीं रहा, ऐसे में उससे किसी तरह की रंजिश की भी आशंका है।
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पता किया जा रहा है कि जौनपुर में उसका कौन बड़ा माफिया-गैंगस्टर उसके करीबी हैं और वह मुंबई में किस ठिकाने पर रहा। एक महीने से वह कहां अंडरग्राउंड रहा। पुलिस का दावा है कि हमलावर विजय शूटर है। उसका असली नाम आनंद यादव है।
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जौनपुर और आजमगढ़ में पोक्सो समेत दो केस दर्ज हैं। जौनपुर में उस पर सिर्फ एक केस कोविड प्रोटोकॉल उल्लंघन का दर्ज था। उसके पहले आजमगढ़ में किशोरी को भगाने का केस हुआ था, जिसमें वह जेल गया था।
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बाद में इस केस में समझौता हो गया था। इसके अलावा उस पर कोई भी गंभीर आपराधिक केस दर्ज नहीं है। जानकारी के मुताबिक संजीव से उसका कोई कनेक्शन भी नहीं रहा, ऐसे में उससे किसी तरह की रंजिश की भी आशंका है।
इन सभी वजहों से यही आशंका है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ा साजिशकर्ता है, जिसके इशारे पर वारदात की साजिश रची गई। जिसको विजय यादव से अंजाम दिलाया गया। अब देखना होगा कि एसआईटी मुख्य साजिशकर्ता तक पहुंचती है या नहीं।
कहीं जेल से तो नहीं संपर्क में आया, इसलिए मुंबई कनेक्शन अहम
किशोरी को भगाने में जब विजय पकड़ा गया था तो आजमगढ़ जेल भेजा गया था। कहीं ऐसा तो नहीं कि जेल में उसकी किसी बड़े आपराधी के संपर्क में वह आया हो और अपराध की दुनिया में कदम रखा। दूसरी तरफ विजय तीन साल तक मुंबई में रहा। जौनपुर के एक पूर्व सांसद का मुंबई का गहना कनेक्शन रहा है। ऐसे में आशंका ये भी है कि विजय कहीं इन्हीं के संपर्क में तो नहीं था। ये सभी अलग-अलग पहलू हैं। जिन पर तफ्तीश होगी। जांच के बाद ही सभी तथ्य सामने आएंगे।
किशोरी को भगाने में जब विजय पकड़ा गया था तो आजमगढ़ जेल भेजा गया था। कहीं ऐसा तो नहीं कि जेल में उसकी किसी बड़े आपराधी के संपर्क में वह आया हो और अपराध की दुनिया में कदम रखा। दूसरी तरफ विजय तीन साल तक मुंबई में रहा। जौनपुर के एक पूर्व सांसद का मुंबई का गहना कनेक्शन रहा है। ऐसे में आशंका ये भी है कि विजय कहीं इन्हीं के संपर्क में तो नहीं था। ये सभी अलग-अलग पहलू हैं। जिन पर तफ्तीश होगी। जांच के बाद ही सभी तथ्य सामने आएंगे।
आखिर बुलेट प्रूफ जैकेट क्यों नहीं पहनी थी
वारदात की जानकारी पर संजीव की बहन मोर्चरी पहुंची। उन्होंने बताया कि हर पेशी पर संजीव को बुलेटप्रूफ जैकेट पहनाकर ले जाया जाता था। पिछले दो बार से उसे जैकेट नहीं पहनाई जा रही थी। उनका आरोप है कि ये साजिश की ओर इशारा करता है। सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों किया गया।
वारदात की जानकारी पर संजीव की बहन मोर्चरी पहुंची। उन्होंने बताया कि हर पेशी पर संजीव को बुलेटप्रूफ जैकेट पहनाकर ले जाया जाता था। पिछले दो बार से उसे जैकेट नहीं पहनाई जा रही थी। उनका आरोप है कि ये साजिश की ओर इशारा करता है। सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों किया गया।
मुन्ना बजरंगी के बाद संजीव का अंत
मुख्तार के दो सबसे करीबी शूटर थे। ये हथियारों की डीलिंग भी करते थे। जिसमें मुन्ना बजरंगी व संजीव शामिल थे। दोनों उसके मजबूत हाथ थे। मुन्ना पहले ही बागपत जेल में मारा जा चुका है। अब संजीव भी मार दिया गया। पुलिस मुन्ना बजरंगी की हत्या करने वाले सुनील राठी गैंग से कनेक्शन को लेकर पड़ताल कर रही है।
मुख्तार के दो सबसे करीबी शूटर थे। ये हथियारों की डीलिंग भी करते थे। जिसमें मुन्ना बजरंगी व संजीव शामिल थे। दोनों उसके मजबूत हाथ थे। मुन्ना पहले ही बागपत जेल में मारा जा चुका है। अब संजीव भी मार दिया गया। पुलिस मुन्ना बजरंगी की हत्या करने वाले सुनील राठी गैंग से कनेक्शन को लेकर पड़ताल कर रही है।