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Sambhal News: पर्याप्त बिजली का इंतजार, मिले तो सीएफसी भरे रफ्तार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 11 Feb 2025 01:10 AM IST
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Waiting for sufficient electricity, if available then CFC will speed up
कॉमन फैसलिटी सेंटर - फोटो : कॉमन फैसलिटी सेंटर
संभल। इटली से आई आधुनिक मशीनों से लैस कॉमन फैसलिटी सेंटर (सीएफसी) का संचालन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। जो उम्मीद हस्तशिल्प कारोबारियों को थी वह भी अभी पूरी नहीं हुई है। इसका कारण है कि बिजली की आपूर्ति पर्याप्त नहीं मिल पा रही है। चंदौसी डिवीजन के पवांसा बिजलीघर क्षेत्र से आपूर्ति की जाती है। देहात क्षेत्र की आपूर्ति कभी मिलती है और कभी नहीं मिलती है।
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अब संचालन करने वाली संभल हैंडीक्राफ्ट वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने संभल डिवीजन से बिजली आपूर्ति की मांग उठाई है। इसके लिए प्रक्रिया भी चल रही है। जिससे सीएफसी का संचालन रफ्तार भर सके। फिलहाल कम आपूर्ति मिलने के चलते जरूरी ही काम हो पा रहा है।
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संभल तहसील क्षेत्र के गांव रसूलपुर धतरा में बने कॉमन फैसलिटी सेंटर (सीएफसी) पर 9.9 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसमें स्वदेशी और विदेशी आधुनिक मशीनें लगी हैं। लेकिन पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से इस सीएफसी का लाभ मिल नहीं पा रहा है। इसमें सींग से तैयार होने वाले बटन की फिनिशिंग की जाएगी। अभी तक बटन कच्चे माल के रूप में चीन और यूरोप को निर्यात किया जाता था। वह बटन इसी सीएफसी में तैयार होकर जाएगा। जिससे संभल के हस्तशिल्प कारोबारियों को ज्यादा मुनाफा होगा और पहचान भी बढ़ेगी। और निर्यात भी बढ़ जाएगा। हस्तशिल्प से करीब पांच हजार लोग जुड़े हैं। इसमें कारोबारी और कारीगर शामिल हैं। फिलहाल यह संचालित तो हो रहा है लेकिन ऑटोमैटिक मशीन काम नहीं कर पा रही हैं। कुछ ही मशीनें हैं जो मिलने वाली आपूर्ति से संचालित होती हैं।
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लकड़ी सुखाने और डिजाइन देने का काम भी होगा



संभल में सींग-हड्डी के उत्पादों के साथ लकड़ी के उत्पाद बनाए जाते हैं। लकड़ी से बने हस्तशिल्प उत्पादों को बनाने के लिए लकड़ी को सुखाया जाता है। इसके बाद डिजाइन कर आकर्षक बनाया जाता है। इसके लिए निर्यातकों को मुरादाबाद जाना पड़ता था। इसमें समय भी लगता था और खर्चा भी ज्यादा आता था। सीएफसी पर यह सुविधा भी मिल सकेगी।

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जीआई टैग प्राप्त है संभल का हड्डी सींग उत्पाद



संभल के हड्डी-सींग हस्तशिल्प उत्पाद को जीआई टैग मिला हुआ है। इससे संभल में तैयार किए गए उत्पाद की पहचान पूरी दुनिया में होगी। जीआई टैग से संभल के हस्तशिल्प कारोबार को बड़ा लाभ भी मिल रहा है। अब अलग पहचान है। कहने को तो जीआई टैग मिलने से पहले ही संभल दुनियाभर में हस्तशिल्प के लिए पहचाना जाता है। अब जीआई टैग से अलग पहचान मिली है।


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स्टीमेट के 7.20 लाख रुपये जमा कर दिए हैं। अब संभल डिविजन से आपूर्ति मिलने लगेगी। इसके लिए प्रक्रिया शुरू करा दी है। उम्मीद है कि एक सप्ताह में आपूर्ति सुचारु हो जाएगी।इसके बाद सीएफसी का काम भी रफ्तार भरेगा।

ताहिर सलामी, अध्यक्ष, हैंडीक्राफ्ट वेलफेयर एसोसिएशन,संभल
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