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Sambhal News: दिल्ली में बाबा पीरतन नाथ मंदिर में तोड़फोड़ पर पंजाबी समाज ने निकाली पदयात्रा
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चंदौसी(संभल)। दिल्ली के झंडेवालान स्थित दरगाह मंदिर बाबा पीरतन नाथ में एमसीडी व डीडीए के तोड़फोड़ करने के विरोध में पंजाबी समाज ने बुधवार को पदयात्रा निकाली। बाद में सुभाष रोड पर माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि दिल्ली झंडेवालान स्थित बाबा श्री पीरतन नाथ मंदिर में 29 नवंबर 2025 को एमसीडी और डीडीए की ओर से तोड़ फोड़ की गई। मंदिर परिसर में स्थित लंगर स्थल और तुलसी वाटिका भी तोड़ दी गई। भक्त भोग भगवान जी को भोग तक नहीं चढ़ा सके और संगत को मंदिर में जाने से भी रोक दिया गया। इससे श्रद्धालुओं में बहुत नाराजगी है।
कहा कि परम सिद्ध बाबा गोरखनाथ जी की आज्ञा व मार्गदर्शन में उनके शिष्य परम सिद्ध सतगुरू बाबा श्री पीररतन नाथ ने राजसी जीवन त्यागकर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सनातन धर्म का प्रचार प्रसार किया। उन्होंने गजनी, काबुल, जलालाबाद, पेशावर सहित कई स्थानों पर बाबा गोरखनाथ जी के स्थल स्थापित कर धर्मांतरण रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देशभर में उनके सवा करोड़ से अधिक अनुयायी हैं। यह आस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला है, इसलिए सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर मंदिर का स्थान वापस दिलाए और धार्मिक गतिविधियां फिर से शुरू कराए। ज्ञापन सौंपने वालों में सुधीर मल्होत्रा, बुद्धिश छाबड़ा, सत्यनारायण अरोरा, सतीश अरोरा, सचिन मग्गो, विजय अरोरा, संजू, राजू कालड़ा, गगन अरोरा, यश मदान, सावन शर्मा, यश मदान, पूनम अरोरा आदि शामिल रहे।
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ज्ञापन में बताया गया कि दिल्ली झंडेवालान स्थित बाबा श्री पीरतन नाथ मंदिर में 29 नवंबर 2025 को एमसीडी और डीडीए की ओर से तोड़ फोड़ की गई। मंदिर परिसर में स्थित लंगर स्थल और तुलसी वाटिका भी तोड़ दी गई। भक्त भोग भगवान जी को भोग तक नहीं चढ़ा सके और संगत को मंदिर में जाने से भी रोक दिया गया। इससे श्रद्धालुओं में बहुत नाराजगी है।
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कहा कि परम सिद्ध बाबा गोरखनाथ जी की आज्ञा व मार्गदर्शन में उनके शिष्य परम सिद्ध सतगुरू बाबा श्री पीररतन नाथ ने राजसी जीवन त्यागकर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सनातन धर्म का प्रचार प्रसार किया। उन्होंने गजनी, काबुल, जलालाबाद, पेशावर सहित कई स्थानों पर बाबा गोरखनाथ जी के स्थल स्थापित कर धर्मांतरण रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देशभर में उनके सवा करोड़ से अधिक अनुयायी हैं। यह आस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला है, इसलिए सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर मंदिर का स्थान वापस दिलाए और धार्मिक गतिविधियां फिर से शुरू कराए। ज्ञापन सौंपने वालों में सुधीर मल्होत्रा, बुद्धिश छाबड़ा, सत्यनारायण अरोरा, सतीश अरोरा, सचिन मग्गो, विजय अरोरा, संजू, राजू कालड़ा, गगन अरोरा, यश मदान, सावन शर्मा, यश मदान, पूनम अरोरा आदि शामिल रहे।
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