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वन स्टॉप सेंटर में सुविधाएं पूरी, स्टाफ कम
सार
वन स्टॉप सेंटर में सुविधाएं लगभग पूरी हैं।इसके बाद करीब तीन माह पहले वन स्टॉप सेंटर के भवन निर्माण का कार्य तो पूरा करा दिया गया लेकिन काउंसलिंग समेत वन स्टॉप सेंटर के सुचारु संचालन को लेकर स्टाफ की तैनाती अभी भी पूरी तरह से नहीं हो सकी है।
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विस्तार
वन स्टॉप सेंटर में सुविधाएं लगभग पूरी हैं। स्टाफ की कमी है। इससे हिंसा पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराने की शासन की मंशा भी अधर में है।
वर्ष 2018-19 में शासन की ओर से जिले में हिंसा पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने को लेकर प्रस्ताव मिला था। इसके तहत प्रोवेशन विभाग की ओर से कार्यदायी संस्था आरईडी के माध्यम से वर्ष 2019 में करीब 48 लाख रुपये की लागत से कलक्ट्रेट परिसर वन स्टॉप सेंटर का निर्माण कार्य प्रारंभ कराया गया था। इसके बाद करीब तीन माह पहले वन स्टॉप सेंटर के भवन निर्माण का कार्य तो पूरा करा दिया गया लेकिन काउंसलिंग समेत वन स्टॉप सेंटर के सुचारु संचालन को लेकर स्टाफ की तैनाती अभी भी पूरी तरह से नहीं हो सकी है। इससे वन स्टॉप सेंटर का संचालन पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है।
रिक्त पदों के चलते हिंसा पीड़ित महिलाओं को वन स्टॉप सेंटर की सुविधाएं पूरी तरह से नहीं मिल पा रही हैं। जिला प्रोवेशन अधिकारी और जिला समाज कल्याण अधिकारी शैलेंद्र कुमार गौतम का कहना है कि वैसे तो वन स्टॉप सेंटर के संचालन को लेकर मनोवैज्ञानिक सामाजिक परामर्शदाता (महिला) के एक पद, केस वर्कर सामाजिक कार्यकर्ता महिला के एक पद, कंप्यूटर ऑपरेटर सह क्लर्क के एक पद व हेल्पर और सह चौकीदार के दो पदों पर पहले से ही तैनाती है। दूसरे पदों के रिक्तों के लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही है। संबंधित आउट सोर्सिंग संस्था को रिक्त पदों पर आवेदन उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है।
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ये पद हैं खाली
सेंटर मैनेजर/प्रशासक (महिला) का एक पद, केस वर्कर/सामाजिक कार्यकर्ता (महिला) का एक पद, प्रशिक्षित पैरा मेडिकल नर्स (महिला) के तीन पद, हेल्पर/सह चौकीदार (महिला/ पुरुष) का एक पद रिक्त है।
महीनेभर में 50 से 60 मामले पहुंचते हैं वन स्टॉप सेंटर
बहजोई। जिला प्रोवेशन अधिकारी ने बताया कि एक माह में हिंसा पीड़ित महिलाओं की काउंसलिंग से जुड़े करीब 50 से 60 मामले वन स्टॉप सेंटर पर पहुंचते हैं। इनमें करीब 4 से 5 मामले ऐसे होते हैं, जिनमें कि पीड़ित महिलाओं को सेंटर पर प्रवास कराया जाता है।
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वर्ष 2018-19 में शासन की ओर से जिले में हिंसा पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने को लेकर प्रस्ताव मिला था। इसके तहत प्रोवेशन विभाग की ओर से कार्यदायी संस्था आरईडी के माध्यम से वर्ष 2019 में करीब 48 लाख रुपये की लागत से कलक्ट्रेट परिसर वन स्टॉप सेंटर का निर्माण कार्य प्रारंभ कराया गया था। इसके बाद करीब तीन माह पहले वन स्टॉप सेंटर के भवन निर्माण का कार्य तो पूरा करा दिया गया लेकिन काउंसलिंग समेत वन स्टॉप सेंटर के सुचारु संचालन को लेकर स्टाफ की तैनाती अभी भी पूरी तरह से नहीं हो सकी है। इससे वन स्टॉप सेंटर का संचालन पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है।
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रिक्त पदों के चलते हिंसा पीड़ित महिलाओं को वन स्टॉप सेंटर की सुविधाएं पूरी तरह से नहीं मिल पा रही हैं। जिला प्रोवेशन अधिकारी और जिला समाज कल्याण अधिकारी शैलेंद्र कुमार गौतम का कहना है कि वैसे तो वन स्टॉप सेंटर के संचालन को लेकर मनोवैज्ञानिक सामाजिक परामर्शदाता (महिला) के एक पद, केस वर्कर सामाजिक कार्यकर्ता महिला के एक पद, कंप्यूटर ऑपरेटर सह क्लर्क के एक पद व हेल्पर और सह चौकीदार के दो पदों पर पहले से ही तैनाती है। दूसरे पदों के रिक्तों के लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही है। संबंधित आउट सोर्सिंग संस्था को रिक्त पदों पर आवेदन उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है।
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ये पद हैं खाली
सेंटर मैनेजर/प्रशासक (महिला) का एक पद, केस वर्कर/सामाजिक कार्यकर्ता (महिला) का एक पद, प्रशिक्षित पैरा मेडिकल नर्स (महिला) के तीन पद, हेल्पर/सह चौकीदार (महिला/ पुरुष) का एक पद रिक्त है।
महीनेभर में 50 से 60 मामले पहुंचते हैं वन स्टॉप सेंटर
बहजोई। जिला प्रोवेशन अधिकारी ने बताया कि एक माह में हिंसा पीड़ित महिलाओं की काउंसलिंग से जुड़े करीब 50 से 60 मामले वन स्टॉप सेंटर पर पहुंचते हैं। इनमें करीब 4 से 5 मामले ऐसे होते हैं, जिनमें कि पीड़ित महिलाओं को सेंटर पर प्रवास कराया जाता है।