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सर्दी का सितम जारी, घरों से निकलना हुआ मुश्किल
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संभल में सर्दी के दौरान यह नजारा।
- फोटो : SAMBHAL
चंदौसी। गुरुवार को मौसम काफी सर्द रहा। शीत लहर से लोग बेहाल रहे। ठिठुरन के कारण दिन में भी लोग घरों में कैद रहे। लोेग आवश्यक कार्यों से ही बाहर निकले। हालांकि दोपहर को बाजार में रौनक रही लेकिन सुबह और शाम को बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। सुबह को घने कोहरे ने रफ्तार को भी प्रभावित किया।
यूं तो अमावस्या को सूर्य ग्रहण था लेकिन सुबह से ही घने कोहरे की चादर व बादलों ने सूर्य को ढक रखा था। दिनभर सूर्य के दर्शन नहीं हुए। सुबह को ग्रहण के बाद लोगों ने घरों में पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया।
कोहरे ने रफ्तार को भी प्रभावित किया। दृश्यता काफी कम होने के कारण बड़े वाहनों को हाइवे पर ढाबों आदि पर खड़े होकर समय का इंतजार करना पड़ा। लोगों की सुबह भी काफी देर से हुई। सुबह दस बजे के बाद ही आवश्यक कार्यों से बाहर निकल सके। सुबह से बाजारों में सन्नाटा रहा। हालांकि दोपहर को बाजारों में रौनक दिखी। लेकिन शीत लहर ने लोगों को शीघ्रता से घरों को लौटने को विवश कर दिया।
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गर्म कपड़ों की जमकर बिक्री हुई। खेत खलिहानों में भी कार्य प्रभावित रहा। दुकानदार भी दुकानों के अंदर हीटर आदि जलाकर बैठे दिखाई दिए। मजदूर नहीं मिल पाने के कारण खेतिहरों को खुद ही जैसे जैसे गन्ने आदि की छिलाई करनी पड़ी।
आलू की खुदाई का कार्य भी प्रभावित रहा। सुबह से ही लोग मुंह पर भी कपड़ा लपेटकर निकले। ठिठुरन इस कदर थी कि बाइक चलाने वालों को भी बिना दस्ताने पहने भारी दिक्कत हो रही थी। शाम से ही जगह जगह लोग अलाव तापते नजर आने लगे।
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यूं तो अमावस्या को सूर्य ग्रहण था लेकिन सुबह से ही घने कोहरे की चादर व बादलों ने सूर्य को ढक रखा था। दिनभर सूर्य के दर्शन नहीं हुए। सुबह को ग्रहण के बाद लोगों ने घरों में पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया।
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कोहरे ने रफ्तार को भी प्रभावित किया। दृश्यता काफी कम होने के कारण बड़े वाहनों को हाइवे पर ढाबों आदि पर खड़े होकर समय का इंतजार करना पड़ा। लोगों की सुबह भी काफी देर से हुई। सुबह दस बजे के बाद ही आवश्यक कार्यों से बाहर निकल सके। सुबह से बाजारों में सन्नाटा रहा। हालांकि दोपहर को बाजारों में रौनक दिखी। लेकिन शीत लहर ने लोगों को शीघ्रता से घरों को लौटने को विवश कर दिया।
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गर्म कपड़ों की जमकर बिक्री हुई। खेत खलिहानों में भी कार्य प्रभावित रहा। दुकानदार भी दुकानों के अंदर हीटर आदि जलाकर बैठे दिखाई दिए। मजदूर नहीं मिल पाने के कारण खेतिहरों को खुद ही जैसे जैसे गन्ने आदि की छिलाई करनी पड़ी।
आलू की खुदाई का कार्य भी प्रभावित रहा। सुबह से ही लोग मुंह पर भी कपड़ा लपेटकर निकले। ठिठुरन इस कदर थी कि बाइक चलाने वालों को भी बिना दस्ताने पहने भारी दिक्कत हो रही थी। शाम से ही जगह जगह लोग अलाव तापते नजर आने लगे।