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केसरिया सरकार में चंदौसी को मिल सकती है लालबत्ती
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Mon, 13 Mar 2017 12:30 AM IST
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विधानसभा क्षेत्र के गठन से लेकर अब तक रानी इंद्रा मोहिनी के बाद गुलाब देवी दूसरी महिला हैं, जिन्होंने 1991 में चंदौसी का प्रतिनिधित्व किया। अब वह चौथी बार चंदौसी की विधायक बनी है।
उनकी पार्टी की प्रति निष्ठा उस दौर में भी बरकरार रही, जब पार्टी संकट के दौर से गुजर रही थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें ही अपना प्रत्याशी बनाया। यह उनकी राजनीतिक पहुंच का अंदाजा लगाने के लिए काफी है। अब यूपी में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने जा रही है तो केसरिया मंत्रिमंडल में गुलाब देवी के शामिल होने की उम्मीद जग गई है।
चंदौसी विधानसभा के अलग अस्तित्व में आने के बाद 1962 में कुंवर नरेंद्र सिंह निर्दलीय विधायक बने, लेकिन इसके बाद 1967 में ही आधी आबादी ने अपना वर्चस्व दिखाया और चंदौसी सीट से रानी इंद्रा मोहिनी विधायक बनी। 1969 में भी उन्हीं ने सीट संभाली।
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इसके बाद 1991 में दूसरी महिला विधायक के रूप में चंदौसी का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद उन्होंने 1996 व 2002 में भी चंदौसी सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता। तीसरी महिला विधायक के रूप में लक्ष्मी गौतम रही। गुलाब देवी के रिश्ते भाजपा से अधिक आरएसएस से है। भाजपा नेता राजनाथ सिंह, केसरी नाथ त्रिपाठी, कल्याण सिंह, लालजी टंडन से भी उनके बेहतर रिश्ते हैं।
यही कारण है कि वह कल्याण सिंह की सरकार में वह राज्यमंत्री भी रही। अब यूपी में भाजपा की पूर्ण बहुमत से सरकार आई है, गुलाब देवी चौथी बार जीतकर विधानसभा पहुंच रही है। उनके भाजपा व आरएसएस से गहरे रिश्ते और सियासी ज्येष्ठता को देखते हुए उन्हें लखनऊ में बनने वाली भाजपा की सरकार के मंत्रिमंडल में स्थान मिलना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि गुलाब देवी अभी इस मामले में कुछ स्पष्ट नहीं कह रही हैं, उनका कहना है कि जो भी निर्णय शीर्ष नेतृत्व करेगा, उन्हें वह स्वीकार होगा।
सूबे की 42 महिला विधायकों में दो संभल जिले की भी
यूपी के 403 विधायकों में कुल 42 महिला विधायकों में दो महिला विधायक संभल जिले ने भी दिए हैं। इसलिए आधी आबादी की दृष्टि से संभल जिला महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में जीत कर आए कुल 403 विधायकों में 42 महिला विधायक भी जीतकर आई है, जिसमें अधिकांशत: भाजपा के चुनाव निशान पर ही विधानसभा में पहुंची है। इसमें संभल जिले की भी चंदौसी सीट से भाजपा की गुलाब देवी और असमोली सीट से सपा की पिंकी यादव चुनाव जीतकर विधान सभा में पहुंची है।
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उनकी पार्टी की प्रति निष्ठा उस दौर में भी बरकरार रही, जब पार्टी संकट के दौर से गुजर रही थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें ही अपना प्रत्याशी बनाया। यह उनकी राजनीतिक पहुंच का अंदाजा लगाने के लिए काफी है। अब यूपी में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने जा रही है तो केसरिया मंत्रिमंडल में गुलाब देवी के शामिल होने की उम्मीद जग गई है।
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चंदौसी विधानसभा के अलग अस्तित्व में आने के बाद 1962 में कुंवर नरेंद्र सिंह निर्दलीय विधायक बने, लेकिन इसके बाद 1967 में ही आधी आबादी ने अपना वर्चस्व दिखाया और चंदौसी सीट से रानी इंद्रा मोहिनी विधायक बनी। 1969 में भी उन्हीं ने सीट संभाली।
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इसके बाद 1991 में दूसरी महिला विधायक के रूप में चंदौसी का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद उन्होंने 1996 व 2002 में भी चंदौसी सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता। तीसरी महिला विधायक के रूप में लक्ष्मी गौतम रही। गुलाब देवी के रिश्ते भाजपा से अधिक आरएसएस से है। भाजपा नेता राजनाथ सिंह, केसरी नाथ त्रिपाठी, कल्याण सिंह, लालजी टंडन से भी उनके बेहतर रिश्ते हैं।
यही कारण है कि वह कल्याण सिंह की सरकार में वह राज्यमंत्री भी रही। अब यूपी में भाजपा की पूर्ण बहुमत से सरकार आई है, गुलाब देवी चौथी बार जीतकर विधानसभा पहुंच रही है। उनके भाजपा व आरएसएस से गहरे रिश्ते और सियासी ज्येष्ठता को देखते हुए उन्हें लखनऊ में बनने वाली भाजपा की सरकार के मंत्रिमंडल में स्थान मिलना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि गुलाब देवी अभी इस मामले में कुछ स्पष्ट नहीं कह रही हैं, उनका कहना है कि जो भी निर्णय शीर्ष नेतृत्व करेगा, उन्हें वह स्वीकार होगा।
सूबे की 42 महिला विधायकों में दो संभल जिले की भी
यूपी के 403 विधायकों में कुल 42 महिला विधायकों में दो महिला विधायक संभल जिले ने भी दिए हैं। इसलिए आधी आबादी की दृष्टि से संभल जिला महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में जीत कर आए कुल 403 विधायकों में 42 महिला विधायक भी जीतकर आई है, जिसमें अधिकांशत: भाजपा के चुनाव निशान पर ही विधानसभा में पहुंची है। इसमें संभल जिले की भी चंदौसी सीट से भाजपा की गुलाब देवी और असमोली सीट से सपा की पिंकी यादव चुनाव जीतकर विधान सभा में पहुंची है।