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Sambhal News: विदेशों में धूम मचाएगा संभल में तैयार बटन, हस्तशिल्प उत्पादों को मिलेगी नई पहचान

Thu, 04 Jan 2024 01:37 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Thu, 04 Jan 2024 01:37 AM IST
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Buttons made in Sambhal will make a splash in foreign countries, handicraft products will get a new identity
संभल। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार की सुबह 10: 20 बजे लखनऊ से संभल के कॉमन फैसलिटी सेंटर (सीएफसी) का लोकार्पण कर दिया। अब सीएफसी में तैयार बटन विदेश में धूम मचाएगा। जिससे संभल के हस्तशिल्प कारोबारियों को ज्यादा मुनाफा होगा।
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बुधवार को सीएफसी लोकर्पण के दौरान लखनऊ स्थित लोकभवन में संभल होर्न बोन क्राफ्ट फाउंडेशन के डायरेक्टर कमल कौशल वार्ष्णेय, ताहिर सलामी और सदस्य सुहेल परवेज भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने लोकार्पण के बाद संबोधित करते हुए कहा कि सीएफसी बनने से अब संभल के हड्डी-सींग के हस्तशिल्प उत्पादों को नई पहचान मिलेगी और ज्यादा मुनाफा होगा। समय की बचत के साथ ही रोजगार बढ़ेगा। संभल तहसील क्षेत्र के गांव रसूलपुर धतरा में बने सीएफसी पर 9.9 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसमें स्वदेशी और विदेशी आधुनिक मशीनें लगी हैं। सीएफसी से सबसे बड़ा लाभ बटन कारोबार को हुआ है। जो बटन कच्चे माल के रूप में चीन को निर्यात किया जाता था। वह अब पूरी तरह तैयार होकर विदेशों को जाएगा। इससे पूरी तरह लाभ निर्यातकों को मिलेगा और कारोबार बढ़ जाएगा। समय भी बचेगा। हॉर्न-बोन क्राफ्ट फाउंडेशन के डायरेक्टर कमल कौशल वार्ष्णेय ने बताया कि सीएफसी का लोकार्पण होने से निर्यातकों में खुशी की लहर है। अब कारोबार में ज्यादा मुनाफा होगा।
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संभल में तैयार बटन से चीन कमाता था मुनाफा
संभल में हस्तशिल्प का कारोबार दशकों पुराना है। शुरूआत तो कंघी से हुई थी लेकिन बटन से विदेशों में पहचान मिली। मशीनों की कमी के कारण बटन कच्चे माल के रूप में चीन के लिए निर्यात किया जाता है। अब सीएफसी में लगी मशीनों से बटन को पूरी तरह तैयार किया जाएगा। अब पूरी तरह तैयार होकर बटन विदेश भेजा जाएगा। इससे कारोबार में मुनाफा बढ़ेगा और अलग पहचान मिलेगी। निर्यातकों का कहना है कि चीन संभल के बटन को अपने नाम से यूरोप में बेचता था। अब वह ऐसा नहीं कर पाएगा। क्योंकि बटन को अब संभल से ही यूरोप में भेजा जाएगा।
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इटली की टीम संभल के कारीगरों को करेगी प्रशिक्षित
सीएफसी का संचालन 17 जनवरी से शुरू किया जाएगा। इटली से टीम को बुलाया गया है। इटली से आने वाली टीम मशीनों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण स्थानीय कारीगरों को देगी। जिससे वह माल को खुद ही तैयार कर सकें। फाउंडेशन के डायरेक्टर ताहिर सलामी ने बताया कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कारीगर ही ऑपरेट करेंगे। जो शुल्क तय किया गया है। उससे ही सीएफसी का खर्च उठाया जाएगा।
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लकड़ी सुखाने और डिजाइन देने का काम भी होगा
संभल में सींग-हड्डी के उत्पादों के साथ लकड़ी के उत्पाद बनाए जाते हैं। लकड़ी से बने हस्तशिल्प उत्पादों को बनाने के लिए लकड़ी को सूुखाया जाता है। इसके बाद डिजाइन दिया जाता है। उसके बाद आकर्षक बनाया जाता है। इस काम को कराने के लिए निर्यातकों को मुरादाबाद जाना पड़ता था। इसमें समय भी लगता था और खर्चा भी ज्यादा आता था। अब सीएफसी पर यह सुविधा भी मिल सकेगी।

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हड्डी-सींग उत्पाद को मिला हुआ है जीआई टैग
संभल के हड्डी-सींग हस्तशिल्प उत्पाद को जीआई टैग पिछले वर्ष मिला था। संभल के उत्पाद पूरी दुनिया में संभल के नाम से ही जाने जाएंगे। जीआई टैग से भी संभल के हस्तशिल्प कारोबार को बड़ा लाभ मिला है।
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