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संभल के जियानगला गांव में नलों से निकलता है लाल पानी
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Tue, 20 Feb 2018 02:02 AM IST
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नलों से निकलता है लाल पानी
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला संभल
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जनपद संभल की गुन्नौर तहसील का एक गांव जियानगला और उसके निकट नत्थू सिंह शाहजी की मढ़ईयां के बोरिंग और नलों में लाल और काला पानी निकलता है। सरकारी हैंडपंप भी लाल पानी उगलते हैं। यही पानी ग्रामीण पीकर जिदंगी जी रहे हैं। वे इस स्थिति को शासन-प्रशासन की लापरवाही ही नहीं बल्कि अपना नसीब भी मान रहे हैं। कहते हैं कि धीरे-धीरे ही सही, जहर पी रहे हैं हम। स्वच्छ पेयजल सपना मात्र है क्योंकि यहां के नेता सिर्फ वायदे और अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं।
विकास खंड रजपुरा के सीमावर्ती गांव जियानगला और मढ़ईयां यहां की प्रसिद्ध और विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी महावा नदी के किनारे बसा है। ग्रामीणों ने बताया गया कि यहां बहने वाली महावा नदी में अमरोहा जनपद के पिपरिया घाट से गंगा नदी का पानी आता है। क्षेत्र में इससे सिंचाईं होती थी लेकिन बीस वर्ष पूर्व गजरौला की फैक्ट्रियों का गंदा व काला इसमें प्रवाहित कर दिया गया। हालांकि बाद में बंद हो गया।
नदी सूख गई लेकिन उसका जहरीला पानी यहां की जमीन में समां गया। पिछले बीस वर्षों से इन गांवों के बांरिंग और नलों में लाल पानी आता है। बर्तन में रखने पर कुछ समय पश्चात यह पानी काला पड़ जाता है और परत जम जाती है। गांव में सरकारी हैंडपंप लगे हैं लेकिन उनमें भी लाल पानी आता है।
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विकास खंड रजपुरा के सीमावर्ती गांव जियानगला और मढ़ईयां यहां की प्रसिद्ध और विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी महावा नदी के किनारे बसा है। ग्रामीणों ने बताया गया कि यहां बहने वाली महावा नदी में अमरोहा जनपद के पिपरिया घाट से गंगा नदी का पानी आता है। क्षेत्र में इससे सिंचाईं होती थी लेकिन बीस वर्ष पूर्व गजरौला की फैक्ट्रियों का गंदा व काला इसमें प्रवाहित कर दिया गया। हालांकि बाद में बंद हो गया।
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नदी सूख गई लेकिन उसका जहरीला पानी यहां की जमीन में समां गया। पिछले बीस वर्षों से इन गांवों के बांरिंग और नलों में लाल पानी आता है। बर्तन में रखने पर कुछ समय पश्चात यह पानी काला पड़ जाता है और परत जम जाती है। गांव में सरकारी हैंडपंप लगे हैं लेकिन उनमें भी लाल पानी आता है।
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