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एक्सप्लेनर: महाराष्ट्र-दिल्ली में किसी भी एक दल को मिले वोट से भी ज्यादा एसआईआर में कटे, ड्राफ्ट में क्या खास?
Mon, 31 Aug 2026 08:47 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 31 Aug 2026 08:47 PM IST
सार
दिल्ली में 47.5 लाख और महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम एसआईआर ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं। जानें नाम कटने की वजह, दोनों राज्यों में दलों को मिले वोटों के आंकड़ों और वोटर लिस्ट में दोबारा नाम जुड़वाने के कदम।
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एसआईआर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में दिल्ली में 47.5 लाख नाम हटे।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महाराष्ट्र और दिल्ली में दो महीने लंबे चले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद चुनाव आयोग ने मसौदा मतदाता सूची (ड्राफ्ट वोटर लिस्ट) जारी कर दी है। आंकड़ों के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली में एसआईआर के बाद 47 लाख नाम कम हुए हैं। वहीं, महाराष्ट्र में मसौदा मतदाता सूची से कम हुए नामों की संख्या दो करोड़ के ऊपर है। यह आंकड़ा इसलिए चौंकाने वाला है, क्योंकि न तो दिल्ली और न ही महाराष्ट्र में किसी भी एक पार्टी को इतने वोट मिले थे, जितने नाम एसआईआर ड्राफ्ट में कटे हैं।
आइये जानते हैं कि महाराष्ट्र और दिल्ली में बीते चुनावों में पात्र मतदाताओं के आंकड़े क्या रहे थे? इनमें कितने लोगों ने वोट दिया था? एसआईआर के बाद अब पात्र मतदाताओं की संख्या में क्या कटौती हुई है और यह चौंकाने वाली क्यों है? महाराष्ट्र-दिल्ली में अलग-अलग राजनीतिक दलों को मिलने वाले मतों का क्या आंकड़ा था? एसआईआर की ड्राफ्ट लिस्ट आने के बाद जिनके नाम हट गए, उनका क्या होगा? वे मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए क्या कर सकते हैं? आइये जानते हैं...
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आइये जानते हैं कि महाराष्ट्र और दिल्ली में बीते चुनावों में पात्र मतदाताओं के आंकड़े क्या रहे थे? इनमें कितने लोगों ने वोट दिया था? एसआईआर के बाद अब पात्र मतदाताओं की संख्या में क्या कटौती हुई है और यह चौंकाने वाली क्यों है? महाराष्ट्र-दिल्ली में अलग-अलग राजनीतिक दलों को मिलने वाले मतों का क्या आंकड़ा था? एसआईआर की ड्राफ्ट लिस्ट आने के बाद जिनके नाम हट गए, उनका क्या होगा? वे मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए क्या कर सकते हैं? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- महाराष्ट्र-दिल्ली में क्या थे बीते चुनाव में पात्र मतदाताओं के आंकड़े?
महाराष्ट्र में कितने थे मतदाता?
महाराष्ट्र में 2024 के चुनाव में वोटिंग के आंकड़े
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में कितने थे मतदाता?
दिल्ली में 2025 के चुनाव में मतदाताओं से जुड़े आंकड़े।
- फोटो : अमर उजाला
अब जानें- महाराष्ट्र-दिल्ली में किस पार्टी को कितने वोट मिले?
महाराष्ट्र और दिल्ली की स्थिति को देखा जाए तो सामने आता है कि दोनों में ही जितने नाम कटे, उनकी संख्या पिछले विधानसभा चुनाव में किसी भी एक पार्टी को मिले वोटों से ज्यादा है। यहां तक कि महाराष्ट्र और दिल्ली, जहां भाजपा विजयी पार्टी के तौर पर उभरी, उसे भी ड्राफ्ट सूची से कटे हुए वोटों के बराबर मत नहीं मिले।ये भी पढ़ें: दिल्ली एसआईआर की ड्राफ्ट लिस्ट जारी: 47.7 लाख नाम बाहर, आपका नाम है या नहीं ऐसे करें चेक; 30 सितंबर तक मौका
महाराष्ट्र में 2024 के चुनाव में दलों को मिले वोट।
- फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र की बात करें तो ड्राफ्ट वोटर सूची में जितने नाम हटे हैं, भाजपा को उनसे करीब 30 लाख वोट कम मिले थे। इसी तरह दिल्ली में भाजपा को ड्राफ्ट से बाहर किए गए कुल नामों के मुकाबले करीब चार लाख कम वोट मिले थे।
ये भी पढ़ें: एसआईआर पर रार: ड्राफ्ट लिस्ट में दिल्ली के 47.7 लाख, महाराष्ट्र के 2 करोड़ वोटर घटे, जानें अन्य राज्यों का हाल
ये भी पढ़ें: एसआईआर पर रार: ड्राफ्ट लिस्ट में दिल्ली के 47.7 लाख, महाराष्ट्र के 2 करोड़ वोटर घटे, जानें अन्य राज्यों का हाल
दिल्ली में 2025 के चुनाव में दलों को मिले वोट।
- फोटो : अमर उजाला
एसआईआर के बाद अब पात्र मतदाताओं की संख्या में क्या कटौती हुई है?
विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद दिल्ली और महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के लिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नामों को शुरुआती ड्राफ्ट से बाहर या गैर-एकत्रित वर्ग में रख दिया गया है।1. दिल्ली में मतदाताओं की कटौती
दिल्ली में एसआईआर के तहत मतदाता सूची के ड्राफ्ट में देश में सबसे बड़ी कटौती देखी गई है। दिल्ली में 2025 के कुल 1.56 करोड़ पात्र मतदाताओं में से 47.5 लाख से (47,56,722) मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। यह मूल सूची के कुल मतदाताओं का लगभग 33% यानी हर तीन में से एक मतदाता है, जो देश के अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस प्रक्रिया के दौरान दर्ज की गई सबसे अधिक कटौती है।नए ड्राफ्ट रोल में कितने वोटर: नए ड्राफ्ट रोल में अब केवल 97.5 लाख (97,53,577) वोटर हैं। इसमें उन्हीं मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जिनके फॉर्म घर-घर जाकर किए गए सत्यापन के दौरान सत्यापित और डिजिटल किए जा सके।
हटाने की क्या वजह: इन 47.5 लाख मतदाताओं को ASDDO यानी अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted), मृत (Dead), डुप्लिकेट (Duplicate) और अन्य (Others) श्रेणियों के तहत अनकलेक्टेबल (जिनके प्रपत्र नहीं मिल सके) माना गया है। दिल्ली में बड़ी संख्या में घुमंतू आबादी होने की वजह से अधिकतर मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित के तौर पर चिह्नित किया गया है।
महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के मुताबिक, घर-घर जाकर किए गए पुनरीक्षण कार्य के दौरान कुल 2.07 करोड़ मतदाताओं के फॉर्म एकत्र नहीं किए जा सके। बीते विधानसभा चुनाव 2024 के समय महाराष्ट्र में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 9.71 करोड़ (9,71,41,289) थी। अब 2.07 करोड़ मतदाताओं के प्रपत्र एकत्र न होने के कारण उनके नाम हटने से यह राज्य के कुल मतदाताओं में लगभग 21.31% की कमी है। यानी हर पांच में से एक से ज्यादा मतदाता की कटौती होगी।
नए ड्राफ्ट रोल में कितने वोटर: इस बड़ी कटौती के बाद राज्य की प्रारंभिक ड्राफ्ट सूची में मतदाताओं की संख्या घटकर लगभग 7.64 करोड़ हैं।
2. महाराष्ट्र में मतदाताओं की स्थिति
महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के मुताबिक, घर-घर जाकर किए गए पुनरीक्षण कार्य के दौरान कुल 2.07 करोड़ मतदाताओं के फॉर्म एकत्र नहीं किए जा सके। बीते विधानसभा चुनाव 2024 के समय महाराष्ट्र में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 9.71 करोड़ (9,71,41,289) थी। अब 2.07 करोड़ मतदाताओं के प्रपत्र एकत्र न होने के कारण उनके नाम हटने से यह राज्य के कुल मतदाताओं में लगभग 21.31% की कमी है। यानी हर पांच में से एक से ज्यादा मतदाता की कटौती होगी।
नए ड्राफ्ट रोल में कितने वोटर: इस बड़ी कटौती के बाद राज्य की प्रारंभिक ड्राफ्ट सूची में मतदाताओं की संख्या घटकर लगभग 7.64 करोड़ हैं।
नाम हटने की वजह क्या: महाराष्ट्र में स्थिति थोड़ी अलग है। यहां मतदाता सूची के ड्राफ्ट प्रकाशन से पहले बड़े पैमाने पर फॉर्म एकत्र न होने का आंकड़ा सामने आया। सीईओ ने जो आंकड़े दिए उसके मुताबिक, 75.52 लाख मतदाताओं के प्रपत्र इसलिए नहीं मिले, क्योंकि बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) जब घर-घर सत्यापन के लिए गए, तो कम से कम एक से तीन बार जाने के बावजूद ये लोग अपने पते पर मौजूद नहीं मिले। वहीं, 76.80 लाख मतदाता वे हैं, जिन्होंने वास्तव में अपना पुराना पता छोड़ दिया है और कहीं और चले गए हैं।
इसके अलावा महाराष्ट्र में पिछली चुनावी लिस्ट के मुकाबले अब 34.81 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है। आधिकारिक मृत्यु प्रमाणपत्रों और परिजनों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर इनके नाम हटाए गए हैं, जो मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए जरूरी हैं। इनके अलावा 17.63 लाख मतदाता ऐसे रहे, जिनके नाम किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज हैं, इसलिए एक जगह से नाम हटने पर भी इनका मताधिकार सुरक्षित हैं। इसके अलावा कुछ अन्य कारणों से 2.23 लाख मतदाताओं के प्रपत्र या तो नहीं मिले या इन्हें सूची से हटाया गया।
इसके अलावा महाराष्ट्र में पिछली चुनावी लिस्ट के मुकाबले अब 34.81 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है। आधिकारिक मृत्यु प्रमाणपत्रों और परिजनों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर इनके नाम हटाए गए हैं, जो मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए जरूरी हैं। इनके अलावा 17.63 लाख मतदाता ऐसे रहे, जिनके नाम किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज हैं, इसलिए एक जगह से नाम हटने पर भी इनका मताधिकार सुरक्षित हैं। इसके अलावा कुछ अन्य कारणों से 2.23 लाख मतदाताओं के प्रपत्र या तो नहीं मिले या इन्हें सूची से हटाया गया।
जिन लोगों के नाम एसआईआर ड्राफ्ट से बाहर, उनका क्या होगा?
एसआईआर ड्राफ्ट सूची से जिन मतदाताओं के नाम बाहर हो गए हैं, उनका वोटर बनने का अधिकार पूरी तरह छिना नहीं है। आइये सवाल-जवाब में जानते हैं अब आगे क्या होगा?
क्या नाम स्थायी रूप से कट गए हैं?
जी नहीं, यह स्थायी कटौती नहीं है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और दिल्ली के चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि वे हमेशा के लिए मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। डोर-टू-डोर सत्यापन के दौरान प्रपत्र न मिल पाने के कारण इन्हें सिर्फ अस्थायी रूप से गैर-एकत्रित या ASDDO (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट) श्रेणी में रखा गया है। पात्र मतदाताओं को फिर से अपना नाम जुड़वाने का पूरा अधिकार है।
अब मतदाताओं को क्या करना होगा?
चरण 1: नाम की जांच करें
सबसे पहले चुनाव आयोग के मतदाता खोज पोर्टल (https://voters.eci.gov.in/) या ECINET एप पर जाकर अपना EPIC नंबर (मतदाता पहचान पत्र संख्या) या पंजीकृत मोबाइल नंबर डालकर चेक करें कि आपका नाम ड्राफ्ट सूची में है या नहीं।
चरण 2: फॉर्म 6 भरें
अगर ड्राफ्ट सूची में आपका नाम गायब है, तो नाम को वापस सूची में शामिल करने के लिए आपको फॉर्म 6 भरना होगा। अगर आपने अपना निवास स्थान बदल लिया है, तो नए पते पर नाम स्थानांतरित करने के लिए भी फॉर्म 6 ही जमा करना होगा।
चरण 3: आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें
फॉर्म 6 के साथ आपको कुछ अहम दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
आयु प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, 10वीं/12वीं का सर्टिफिकेट, या भारतीय पासपोर्ट में से कोई एक।
निवास प्रमाण: पानी/बिजली/गैस का बिल (कम से कम एक वर्ष पुराना), आधार कार्ड, राष्ट्रीयकृत बैंक या डाकघर की पासबुक, भारतीय पासपोर्ट, या पंजीकृत रेंट डीड/सेल डीड में से कोई एक।
अगर ड्राफ्ट सूची में आपका नाम गायब है, तो नाम को वापस सूची में शामिल करने के लिए आपको फॉर्म 6 भरना होगा। अगर आपने अपना निवास स्थान बदल लिया है, तो नए पते पर नाम स्थानांतरित करने के लिए भी फॉर्म 6 ही जमा करना होगा।
चरण 3: आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें
फॉर्म 6 के साथ आपको कुछ अहम दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
आयु प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, 10वीं/12वीं का सर्टिफिकेट, या भारतीय पासपोर्ट में से कोई एक।
निवास प्रमाण: पानी/बिजली/गैस का बिल (कम से कम एक वर्ष पुराना), आधार कार्ड, राष्ट्रीयकृत बैंक या डाकघर की पासबुक, भारतीय पासपोर्ट, या पंजीकृत रेंट डीड/सेल डीड में से कोई एक।
चरण 4: आवेदन जमा करें
इसे आप ऑनलाइन माध्यम से चुनाव आयोग के पोर्टल voters.eci.gov.in या ECINET मोबाइल एप के जरिए आसानी से जमा कर सकते हैं। ऑफलाइन आवेदन के लिए आप अपने क्षेत्र के बीएलओ या सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) के पास फॉर्म जमा करा सकते हैं।
मतदाताओं को इस पूरी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग द्वारा एक निश्चित समय सीमा दी गई है।
दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि: 31 अगस्त से 30 सितंबर। इस एक महीने के दौरान मतदाता अपने फॉर्म जमा कर सकते हैं।
दावों की जांच और निपटारा: प्राप्त आवेदनों की जांच और उन पर निर्णय लेने की प्रक्रिया 29 अक्तूबर तक पूरी कर ली जाएगी।
अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: सभी सुधारों के बाद 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। इसी सूची के आधार पर आगामी चुनावों में मतदान किया जा सकेगा।
इसे आप ऑनलाइन माध्यम से चुनाव आयोग के पोर्टल voters.eci.gov.in या ECINET मोबाइल एप के जरिए आसानी से जमा कर सकते हैं। ऑफलाइन आवेदन के लिए आप अपने क्षेत्र के बीएलओ या सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) के पास फॉर्म जमा करा सकते हैं।
कब तक मतदाता सूची में जुड़ सकता है नाम?
मतदाताओं को इस पूरी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग द्वारा एक निश्चित समय सीमा दी गई है।
दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि: 31 अगस्त से 30 सितंबर। इस एक महीने के दौरान मतदाता अपने फॉर्म जमा कर सकते हैं।
दावों की जांच और निपटारा: प्राप्त आवेदनों की जांच और उन पर निर्णय लेने की प्रक्रिया 29 अक्तूबर तक पूरी कर ली जाएगी।
अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: सभी सुधारों के बाद 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। इसी सूची के आधार पर आगामी चुनावों में मतदान किया जा सकेगा।