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Sambhal News: तीन जुलाई की सुनवाई से पहले जामा मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट खोलने की मांग कर सकता है हिन्दू पक्ष
Thu, 22 May 2025 01:23 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Thu, 22 May 2025 01:23 AM IST
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संभल। जामा मस्जिद सर्वे रिपोर्ट चंदौसी की कोर्ट में तीन जुलाई को होने वाली सुनवाई से पहले खोले जाने की मांग हिन्दू पक्ष की ओर से की जा सकती है। ताकि रिपोर्ट का किसी विशेषज्ञ से मूल्यांकन कराया जा सके। सर्वे रिपोर्ट खोले जाने की मांग वादीगण के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन कर सकते हैं। इस वाद की पैरवी करने में मुख्य अधिवक्ता की भूमिका में विष्णु शंकर जैन शामिल हैं। इसके अलावा स्थानीय अधिवक्ता भी शामिल किए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही यह मांग की जा सकती है। क्योंकि पहली जून से अदालत में अवकाश घोषित हो जाएगा।
मालूम हो 19 नवंबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में संभल की जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए हरिशंकर जैन, कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरि समेत आठ आठ वादकारियों ने वाद दायर किया था। न्यायालय ने वाद स्वीकार करते हुए उसी दिन सर्वे का आदेश कर दिया था। जिसमें कोर्ट कमिश्नर रमेश सिंह राघव को बनाया गया था। 19 और 24 नवंबर 2024 को किए गए सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट कमिश्रर ने 2 जनवरी 2025 को अदालत में पेश की थी। यह सर्वे रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में पेश की गई थी। 3 जनवरी को जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी। बाद में हाईकोर्ट को मामला भेज दिया गया था। हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद 19 मई को जामा मस्जिद कमेटी की उस याचिका को खारिज कर दिया गया। जिसमें सर्वे को गलत बताते हुए रोक लगाने की मांग की थी। अब जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामले में सुनवाई तीन जुलाई को होनी है, लेकिन चर्चा है कि जो सर्वे रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में अदालत में पेश की गई है। उसको वादकारियों द्वारा खुलवाने की मांग की जा सकती है।
जामा मस्जिद को लेकर अदालत में कब क्या हुआ-
19 नवंबर 2024- हिंदू पक्ष ने चंदौसी कोर्ट में दावा किया, सर्वे के लिए अनुमति मिली और 19 नवंबर को सर्वे भी किया गया।
24 नवंबर- सर्वे करने के लिए टीम जामा मस्जिद पहुंची, इसी दौरान बवाल हो गया था।
2 जनवरी 2025- सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में कोर्ट कमिश्रर ने सर्वे रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की।
3 जनवरी- जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम में सर्वे पर रोक लगाने की याचिका दायर की।
8 जनवरी- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने निचली के आदेश पर रोक लगाई।
19 मई- हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की सर्वे पर रोक लगाने वाली याचिका खारिज कर दी है।
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मालूम हो 19 नवंबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में संभल की जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए हरिशंकर जैन, कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरि समेत आठ आठ वादकारियों ने वाद दायर किया था। न्यायालय ने वाद स्वीकार करते हुए उसी दिन सर्वे का आदेश कर दिया था। जिसमें कोर्ट कमिश्नर रमेश सिंह राघव को बनाया गया था। 19 और 24 नवंबर 2024 को किए गए सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट कमिश्रर ने 2 जनवरी 2025 को अदालत में पेश की थी। यह सर्वे रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में पेश की गई थी। 3 जनवरी को जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी। बाद में हाईकोर्ट को मामला भेज दिया गया था। हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद 19 मई को जामा मस्जिद कमेटी की उस याचिका को खारिज कर दिया गया। जिसमें सर्वे को गलत बताते हुए रोक लगाने की मांग की थी। अब जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामले में सुनवाई तीन जुलाई को होनी है, लेकिन चर्चा है कि जो सर्वे रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में अदालत में पेश की गई है। उसको वादकारियों द्वारा खुलवाने की मांग की जा सकती है।
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जामा मस्जिद को लेकर अदालत में कब क्या हुआ-
19 नवंबर 2024- हिंदू पक्ष ने चंदौसी कोर्ट में दावा किया, सर्वे के लिए अनुमति मिली और 19 नवंबर को सर्वे भी किया गया।
24 नवंबर- सर्वे करने के लिए टीम जामा मस्जिद पहुंची, इसी दौरान बवाल हो गया था।
2 जनवरी 2025- सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में कोर्ट कमिश्रर ने सर्वे रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की।
3 जनवरी- जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम में सर्वे पर रोक लगाने की याचिका दायर की।
8 जनवरी- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने निचली के आदेश पर रोक लगाई।
19 मई- हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की सर्वे पर रोक लगाने वाली याचिका खारिज कर दी है।