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महायोजना 2021 में होगा बदलाव

Sun, 08 Oct 2017 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sun, 08 Oct 2017 12:29 AM IST
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Will change in Master plan 2021
घंटाघर का क्लॉक टावर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
शहर के सुनियोजित विकास और बड़े पैमाने पर कायाकल्प के लिए अब विकास प्राधिकरण नए सिरे से योजनाएं तैयार करने में जुट गया है। सीमा विस्तार के बाद संसाधनों से जूझ रहे विकास प्राधिकरण का मास्टर प्लान रिवाइज किया जा रहा है।
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प्राधिकरण उपाध्यक्ष की पहल पर शहर को कई जोन में बांट कर उसके विकास की रूपरेखा तैयार हो रही है। घंटाघर से 10 किलोमीटर की परिधि का रिमोट सेंसिंग इमेजेज बंगलुरु से मंगाया गया है।
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इसमें शहर के आवासीय क्षेत्र को आर जोन और अन्य क्षेत्रों को अलग-अलग तरह से विकसित किया जाएगा। इसके बाद अवैध कालोनियों को विकसित करने का अभियान चलाकर उन्हें नियमित किया जाएगा और फिर वहां भी विकास कार्य कराकर जनता को सहूलियत दी जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि जनवरी 2018 तक यह प्लान तैयार हो जाएगा और इसके बाद उस पर अमल शुरू होगा। 
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शहर के सुनियोजित विकास की जिम्मेदारी वाले प्राधिकरण की ओर से बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। अवैध निर्माणों के चलते बिगड़ी शहर की सूरत को संवारने के लिए अब विकास प्राधिकरण नए सिरे मास्टर प्लान तैयार कर रहा है। इसमें महायोजना के जरिए शहर का कायाकल्प किया जाएगा, इसके लिए प्राधिकरण के कोष को भी भरने की पूरी तैयारी है।

घंटाघर के 10 किलोमीटर की परिधि का बंगलुरु से रिमोट सेंसिंग इमेजेज के जरिए वर्तमान स्थिति का आंकलन होगा। इसके बाद आवासीय क्षेत्रों को चिह्नित कर उन्हें विकसित किया जाएगा। ऐसे क्षेत्रों को आर जोन में शामिल कर उसकी जरूरत के हिसाब से विकास कार्य होंगे।

उधर, औद्योगिक क्षेत्रों को चिह्नित कर उन्हें आवासीय से अलग करने की तैयारी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल हो चुके गांव जो विकास से अछूते हैं, उन्हें भी इस मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा। 

200 से ज्यादा अवैध कालोनियां होंगी नियमित 
मास्टर प्लान रिवाइज होने की पूरी प्रक्रिया के बाद अवैध कालोनियों के नियमित होने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। माना जा रहा है कि शहर की करीब 200 से ज्यादा कालोनियों को नियमित करने की तैयारी है।

इसके लिए शासन से अनुमति ली जाएगी। इसमें रिमोट सेंसिंग इमेजेज से मौजूदा हालात पता होने के बाद इन अवैध कालोनियों का आंकलन कर इनसे शुल्क वसूली की जाएगी और यदि इन कालोनियों का नियमितिकरण हुआ तो यहां रहने वाले लाखों लोगों को मूलभूत सुविधाएं प्राधिकरण देगा। 

क्या है रिमोट सेंसिंग इमेजेज
रिमोट सेंसिंग इमेजेज का सामान्य अर्थ है किसी वस्तु के सीधे संपर्क में आए बिना उसके बारे में आंकड़े संग्रह करना है, लेकिन वर्तमान वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में रिमोट सेंसिंग का तात्पर्य आकाश में स्थित किसी प्लेटफार्म जैसे हवाईजहाज, उपग्रह या गुब्बारे से पृथ्वी के किसी भूभाग का चित्र लेना।

यह एक ऐसी उन्नत विधा है जिसके माध्यम से ऊंचाई पर जाकर बिना किसी भौतिक संपर्क के पृथ्वी के धरातलीय रूपों और संसाधनों का अध्ययन वैज्ञानिक विधि से किया जंाता है। सहारनपुर विकास प्राधिकरण इसी उन्नत विधा से शहर की वर्तमान स्थिति का चित्र एकत्र करेगी।

सीमा में शामिल गांवों में पहली बार विकास 
विकास प्राधिकरण की सीमा में सहारनपुर के करीब 100 गांवों को शामिल किया गया है। मगर, अब तक विकास के नाम इन गांवों में कोई काम नहीं कराया गया। मास्टर प्लान रिवाइज होने से इन 100 गांवों को भी बड़ा फायदा मिलेगा। कारण, पहले तैयार मास्टर प्लान में ज्यादातर गांव शामिल ही नहीं हैं। ऐसे में रिवाइज होने के बाद इन गांवों के विकास की रूपरेखा तैयार होगी। 


मास्टर प्लान रिवाइज किया जा रहा है और बंगलुरु से रिमोट सेंसिंग इमेजेज मंगाया गया है। शहर में बड़े बदलाव के साथ सुनियोजित विकास का खाका तैयार किया जाएगा। जनवरी 2018 से इस पर अमल की तैयारी है। महानगर की तर्ज पर सहारनपुर शहर को विकसित किया जाएगा। 
मनोज कुमार, उपाध्यक्ष, विकास प्राधिकरण
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