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Saharanpur News: शब्दों की कंजूसी बनी फजीहत की वजह

Fri, 16 Jun 2023 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jun 2023 11:54 PM IST
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Why is there an uproar from Delhi to Lucknow?
देवबंद (सहारनपुर)। कोई भी संस्थान छात्रों को अनुशासन में रखने के लिए सख्त कायदे-कानून बनाता है। ऐसा ही इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम ने भी किया है। लेकिन इसमें शिक्षा विभाग द्वारा शब्दों में की गई कंजूसी फजीहत की वजह बन गई। छात्रों के इंग्लिश सीखने पर लगाई गई रोक के मुद्दे ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हलचल पैदा की हुई है।
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दारुल उलूम के शिक्षा विभाग की और से छात्रों के नाम जारी किया गया आदेश मानो जल्दबाजी में लिखा गया है। जिस साफ सुथरी भाषा का इस्तेमाल इस आदेश में किया गया, उससे हंगामा होना लाजिमी है। इसमें लिखा गया कि दारुल उलूम देवबंद में जेरे तालीम (तालीम हासिल करने के दौरान) रहते हुए दीगर (दूसरी) किसी तालीम (इंग्लिश वगैहरा) की इजाजत नहीं होगी। अगर कोई तलबा (छात्र) इस अमल में मुबतला (लिप्त) पाया गया या कहीं से इस अमल की निशानदेही होती तो उसका (छात्र का) अखराज (निष्कासन) कर दिया जाएगा। इस पूरे मसले पर कई उलमा से बात हुई। जिसमें सभी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की शिक्षा विभाग ने आदेश लिखवाने में जल्दबाजी और शब्दों में कंजूसी की। यदि आदेश में केवल बाहरी शिक्षा जैसे दो शब्दों को जोड़ दिया जाता तो जो हंगामा हो रहा है, वह न हुआ होता। हालांकि उनका यह भी कहना था कि जब मस्जिद रशीदिया में हुए इजलास में सदर मुदर्रिस मौलाना अरशद मदनी ने छात्रों को इस संबंध में सब कुछ बता और समझा दिया था तो फिर यह आदेश जारी करने की कोई जरूरत ही नहीं थी।
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