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विरोध के नाम पर हिंसा और राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान गलत
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एडवोकेट अखिलेश अग्रवाल
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हो रही हिंसा और आगजनी की घटनाओं पर कानून के जानकारों वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने चिंता जाहिर की है। अधिकतर अधिवक्ताओं का कहना है कि संविधान के दायरे में रहकर विरोध करना गलत नहीं है। मगर विरोध के नाम पर हिंसा और राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना गलत है।
यह कानून सही है। इसमें किसी की भी नागरिकता को कोई खतरा नहीं है। इसलिए जो प्रदर्शन किया जा रहा है, वह कुछ विपक्षी दलों की शह पर किया जा रहा है। अधिकतर लोगों को तो कानून के बारे में सही जानकारी ही नहीं है। - ब्रह्मजीत शर्मा, बार संघ के पूर्व अध्यक्ष
देश अपने यहां अवांछनीय लोगों को शरण देने के लिए बाध्य नहीं हैं और न ही नागरिक बनाने के लिए बाध्य है। विरोध प्रदर्शन और हिंसा के पीछे सरकार पर अनावश्यक दबाव की मंशा नजर आती है। यह सही नहीं है। - अखिलेश अग्रवाल, बार संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता
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कोई भी कानून धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए। यदि कानून पर किसी को आपत्ति है तो उसे जाहिर करने में बुराई नहीं मगर संविधान के दायरे में रहकर उसका विरोध जरूरी है। हिंसा फैलाने या अपने ही देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है। - गयूर-ए-आलम, वरिष्ठ अधिवक्ता
सीएए और एनआरसी सही नहीं है। इसमें बंटवारे की साजिश नजर आती है। लेकिन जो लोग हिंसा के साथ विरोध जाहिर कर रहे हैं, वह बिल्कुल सही नहीं है। संविधान हमें अपने हक की आवाज उठाने का अधिकार देता है। वही तरीका सही है। - चौधरी जांनिसार अहमद, वरिष्ठ अधिवक्ता
इस कानून की फिलहाल कोई जरूरत नहीं थी। पहले से मौजूद कानून में भी नागरिकता से जुड़े मामलों का निस्तारण संभव है। धर्म के आधार पर किसी कानून को लागू करना भी सही नहीं है। - राशिद जमील, बार संघ के पूर्व सचिव अधिवक्ता
कानून ऐसा होना चाहिए जो सबके लिए समान हो। समानता का अधिकार प्रभावित न करता हो। लेकिन कानून पर आपत्ति जाहिर करने पर हिंसा फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। - मुनव्वर आफताब, अधिवक्ता
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यह कानून सही है। इसमें किसी की भी नागरिकता को कोई खतरा नहीं है। इसलिए जो प्रदर्शन किया जा रहा है, वह कुछ विपक्षी दलों की शह पर किया जा रहा है। अधिकतर लोगों को तो कानून के बारे में सही जानकारी ही नहीं है। - ब्रह्मजीत शर्मा, बार संघ के पूर्व अध्यक्ष
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देश अपने यहां अवांछनीय लोगों को शरण देने के लिए बाध्य नहीं हैं और न ही नागरिक बनाने के लिए बाध्य है। विरोध प्रदर्शन और हिंसा के पीछे सरकार पर अनावश्यक दबाव की मंशा नजर आती है। यह सही नहीं है। - अखिलेश अग्रवाल, बार संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता
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कोई भी कानून धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए। यदि कानून पर किसी को आपत्ति है तो उसे जाहिर करने में बुराई नहीं मगर संविधान के दायरे में रहकर उसका विरोध जरूरी है। हिंसा फैलाने या अपने ही देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है। - गयूर-ए-आलम, वरिष्ठ अधिवक्ता
सीएए और एनआरसी सही नहीं है। इसमें बंटवारे की साजिश नजर आती है। लेकिन जो लोग हिंसा के साथ विरोध जाहिर कर रहे हैं, वह बिल्कुल सही नहीं है। संविधान हमें अपने हक की आवाज उठाने का अधिकार देता है। वही तरीका सही है। - चौधरी जांनिसार अहमद, वरिष्ठ अधिवक्ता
इस कानून की फिलहाल कोई जरूरत नहीं थी। पहले से मौजूद कानून में भी नागरिकता से जुड़े मामलों का निस्तारण संभव है। धर्म के आधार पर किसी कानून को लागू करना भी सही नहीं है। - राशिद जमील, बार संघ के पूर्व सचिव अधिवक्ता
कानून ऐसा होना चाहिए जो सबके लिए समान हो। समानता का अधिकार प्रभावित न करता हो। लेकिन कानून पर आपत्ति जाहिर करने पर हिंसा फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। - मुनव्वर आफताब, अधिवक्ता

एडवोकेट मुनाव्वर आफताब- फोटो : SAHARANPUR

एडवोकेट राशिद जमील- फोटो : SAHARANPUR

एडवोकेट ब्रह्मजीत शर्मा- फोटो : SAHARANPUR

एडवोकेट चौधरी जानिसार अहमद- फोटो : SAHARANPUR