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Saharanpur News: नेजे से आगे छड़ी निकालने पर हंगामा, रोकी शोभायात्रा
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सहारनपुर। म्हाड़ी पर जा रही छड़ियों के दौरान नेजे से आगे एक छड़ी निकालने को लेकर हंगामा हो गया और टकराव के हालात बन गए। भक्तों ने मेला गुघाल पुल के नीचे धरना दे दिया और छड़ी आगे निकालने वाले भक्तों का विरोध करने के साथ शोभायात्रा रोक दी। इससे पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। बाद में उस छड़ी काे वापिस लाया गया। इसके बाद नेजे की अगुवाई में सभी छड़ियां म्हाड़ी की ओर प्रस्थान कर गई।
दरअसल, बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज का प्रतीक चिन्ह नेजा म्हाड़ी पर जाते समय शोभयात्रा में छड़ियों में सबसे आगे चलता है। यही परंपरा 800 वर्ष से चली आ रही है। रविवार की शाम सभी छड़ियां अपने स्थानों से होते हुए अंबाला रोड स्थित श्री विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर पहुंच गई। यहां पर नेजे और छड़ियों का पूजन हुआ। इसके बाद नेज की अगुवाई में छड़ियां गंगोह रोड स्थित म्हाड़ी के लिए चली। इसी दौरान 26 छड़ियों में एक छड़ी के भक्तों ने अपनी छड़ी नेजे से आगे ले गए। इसको लेकर अन्य छड़ियों के भक्तों में रोष फैल गया। भक्तों ने मेला गुघाल पुल के नीचे शोभायात्रा को रोक दिया। नेजे के साथ सभी छड़ियां यहीं पर रूक गई और भक्त धरने पर बैठ गए।
इसको लेकर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। सीओ अजेंद्र के साथ थाना कुतुबशेर इंस्पेक्टर फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने भक्तों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भक्त नहीं माने और यात्रा रोककर धरने पर बैठे रहे। छड़ी आगे निकालने वाले भक्तों की अन्य छड़ियों के भक्तों के साथ नोकझोंक भी हुई। करीब आधा घंटा शोभायात्रा रुकी रही। बाद में पुलिस ने छड़ी आगे निकालने वाले भक्तों को समझाया और वह फिर छड़ी लेकर वापिस मेला गुघाल पुल के नीचे लौटे। इसके बाद नेजा सबसे आगे चला और फिर सभी छड़ियां नेजे की अगुवाई में म्हाड़ी पर प्रस्थान कर गई।
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मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और भक्तों की भीड़ लगी रही। सीओ अजेंद्र यादव ने बताया कि छड़ी आगे निकालने को लेकर भक्तों ने यात्रा रोक दी थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच वार्ता के बाद मामला शांत हो गया और सभी छड़ियां म्हाड़ी पर चली गई।
ड्रोन से नेजे और छड़ियों पर हुई पुष्प वर्षा
गंगोह मार्ग पर ड्राेन से छड़ियों पर पुष्प वर्षा हुई, जिसे देखने के लिए सड़क के दोनों बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। इसके साथ ही श्री गोरखनाथ और बाबा श्री जाहरवीर के जयकारे गूंजते रहे।
नाचते-गाते म्हाड़ी पर पहुंचे श्रद्धालु
छड़ियों के साथ ढोल और डीजे की धुन पर नाचते गाते हुए श्रद्धालु म्हाड़ी पर पहुंचे। मार्ग कई जगहों पर स्टॉल लगाकर कढ़ी-चावल और हलवे का प्रसाद वितरित किया गया। बाबा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
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दरअसल, बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज का प्रतीक चिन्ह नेजा म्हाड़ी पर जाते समय शोभयात्रा में छड़ियों में सबसे आगे चलता है। यही परंपरा 800 वर्ष से चली आ रही है। रविवार की शाम सभी छड़ियां अपने स्थानों से होते हुए अंबाला रोड स्थित श्री विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर पहुंच गई। यहां पर नेजे और छड़ियों का पूजन हुआ। इसके बाद नेज की अगुवाई में छड़ियां गंगोह रोड स्थित म्हाड़ी के लिए चली। इसी दौरान 26 छड़ियों में एक छड़ी के भक्तों ने अपनी छड़ी नेजे से आगे ले गए। इसको लेकर अन्य छड़ियों के भक्तों में रोष फैल गया। भक्तों ने मेला गुघाल पुल के नीचे शोभायात्रा को रोक दिया। नेजे के साथ सभी छड़ियां यहीं पर रूक गई और भक्त धरने पर बैठ गए।
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इसको लेकर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। सीओ अजेंद्र के साथ थाना कुतुबशेर इंस्पेक्टर फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने भक्तों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भक्त नहीं माने और यात्रा रोककर धरने पर बैठे रहे। छड़ी आगे निकालने वाले भक्तों की अन्य छड़ियों के भक्तों के साथ नोकझोंक भी हुई। करीब आधा घंटा शोभायात्रा रुकी रही। बाद में पुलिस ने छड़ी आगे निकालने वाले भक्तों को समझाया और वह फिर छड़ी लेकर वापिस मेला गुघाल पुल के नीचे लौटे। इसके बाद नेजा सबसे आगे चला और फिर सभी छड़ियां नेजे की अगुवाई में म्हाड़ी पर प्रस्थान कर गई।
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मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और भक्तों की भीड़ लगी रही। सीओ अजेंद्र यादव ने बताया कि छड़ी आगे निकालने को लेकर भक्तों ने यात्रा रोक दी थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच वार्ता के बाद मामला शांत हो गया और सभी छड़ियां म्हाड़ी पर चली गई।
ड्रोन से नेजे और छड़ियों पर हुई पुष्प वर्षा
गंगोह मार्ग पर ड्राेन से छड़ियों पर पुष्प वर्षा हुई, जिसे देखने के लिए सड़क के दोनों बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। इसके साथ ही श्री गोरखनाथ और बाबा श्री जाहरवीर के जयकारे गूंजते रहे।
नाचते-गाते म्हाड़ी पर पहुंचे श्रद्धालु
छड़ियों के साथ ढोल और डीजे की धुन पर नाचते गाते हुए श्रद्धालु म्हाड़ी पर पहुंचे। मार्ग कई जगहों पर स्टॉल लगाकर कढ़ी-चावल और हलवे का प्रसाद वितरित किया गया। बाबा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।