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UP: सहारनपुर में 11 परिवारों ने की धर्मवापसी, महिला की मौत पर श्मशान में अंतिम संस्कार से रोकने पर फैसला

Fri, 27 Feb 2026 03:23 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: Mohd Mustakim Updated Fri, 27 Feb 2026 03:23 PM IST
सार

Saharanpur News: जिले के गांव पीकी में 13 परिवारों ने ईसाई धर्म अपना लिया था। गांव की मामचंदी की मौत होने पर उसे श्मशान ले जाया जाने लगा, तो उसे रोक दिया गया। पंचायत बैठी तो 11 परिवारों ने धर्मवापसी कर ली, दो ने ईसाई धर्म छोड़ने से इंकार कर दिया। 

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UP: 11 families converted to religion in Saharanpur
गांव पीकी में पंचायत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

थाना कोतवाली देहात के गांव पीकी में हिंदू से ईसाई बने परिवार की महिला की मौत के बाद श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने से रोक दिया गया। गांव में बैठी पंचायत में 11 परिवारों ने हिंदू धर्म में वापसी की, इसके बाद ही महिला के शव का अंतिम संस्कार होने दिया गया। इस दौरान गांव में तनाव की स्थिति रही। 
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गांव पीकी निवासी राम सिंह का परिवार अनुसूचित जाति से है और उन्होंने कुछ वर्ष पूर्व अपने परिवार के साथ ईसाई धर्म अपना लिया था। उनके अलावा, गांव के 12 अन्य परिवारों ने भी ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था। कई परिवारों द्वारा धर्म परिवर्तन करने के कारण समाज के अन्य लोग उनसे नाराज थे। 
 
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बृहस्पतिवार रात राम सिंह की पत्नी मामचंदी का निधन हो गया। धर्म परिवर्तन करने के कारण समाज के लोग नाराज थे। इसी नाराजगी का परिणाम था कि मामचंदी की मृत्यु के बाद ग्रामीण उनके घर नहीं गए और न ही उन्होंने गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी। ग्रामीणों का तर्क था कि यदि उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया है, तो उनका अंतिम संस्कार भी उसी धर्म के अनुसार होना चाहिए। उन्हें शव को ईसाइयों के कब्रिस्तान में ले जाना चाहिए। 


 
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गांव में बैठी पंचायत में हुआ फैसला
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गांव के रविदास मंदिर में एक पंचायत बुलाई गई। इस पंचायत में अनुसूचित जाति (एसएसी) समाज के लोग शामिल हुए। पंचायत में कुल 13 परिवारों ने भाग लिया, जिन्होंने पूर्व में ईसाई धर्म अपनाया था। काफी विचार-विमर्श के बाद इनमें से 11 परिवारों ने पुनः अपने मूल धर्म में वापसी की घोषणा कर दी। इन 11 परिवारों में करीब 50 लोग हैं। हालांकि, दो परिवारों ने ईसाई धर्म छोड़ने से इनकार कर दिया। धर्म में पुनः वापसी की घोषणा के बाद ही मामचंदी के अंतिम संस्कार पर सहमति बन सकी और श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी गई। 

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