{"_id":"66b5023c1903006f3a0f486e","slug":"the-victim-student-is-standing-at-the-crossroads-abortion-is-not-possible-saharanpur-news-c-30-1-sah1001-129111-2024-08-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: दोराहे पर खड़ी पीड़ित छात्रा, गर्भपात संभव नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: दोराहे पर खड़ी पीड़ित छात्रा, गर्भपात संभव नहीं
Thu, 08 Aug 2024 11:07 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 08 Aug 2024 11:07 PM IST
विज्ञापन
सहारनपुर। चिलकाना में सातवीं कक्षा की छात्रा दुष्कर्म के बाद छह माह की गर्भवती हो गई। इससे पीडि़त परिवार भी परेशान है। गर्भ ज्यादा दिन का होने के कारण गर्भपात संभव नहीं है। यदि प्रसव कराए भी तो इतनी कम उम्र में छात्रा को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वह जिंदगी भर इस दर्द को नहीं भूल पाएगी।
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. इंद्रा सिंह का कहना है कि एक तरफ बच्ची की उम्र कम है तो दूसरी तरफ गर्भ को ज्यादा समय हो चुका है। ऐसे में गर्भपात कराना खतरे से खाली नहीं है। इसके अलावा गर्भपात कराने के लिए अदालत की अनुमति जरूरी है। प्राथमिक तौर पर ऐसी स्थिति में प्रसव ही कराया जाता है, लेकिन इसमें बच्ची में शारीरिक दिक्कतों के अलावा मानसिक तौर पर भी मजबूत होना होगा।
बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें परिजन
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत पोपली का कहना है कि ऐसी उम्र में बच्चे नादान होते हैं। उन्हें अच्छे और बुरे की समझ इतनी नहीं होती। इसलिए माता-पिता को बच्चों के साथ दोस्ती वाला माहौल रखना चाहिए। बच्चे को लगना चाहिए कि अगर उसके साथ कुछ हुआ है तो माता-पिता को बताने में उसे डर नहीं लगेगा। इस प्रकरण में परिजनों को बच्ची के साथ रहकर उसका हौसला बढ़ाना होगा। उसे विश्वास दिलाना होगा कि परिवार के साथ सुरक्षित है और हर परिस्थिति का सामना कर सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. इंद्रा सिंह का कहना है कि एक तरफ बच्ची की उम्र कम है तो दूसरी तरफ गर्भ को ज्यादा समय हो चुका है। ऐसे में गर्भपात कराना खतरे से खाली नहीं है। इसके अलावा गर्भपात कराने के लिए अदालत की अनुमति जरूरी है। प्राथमिक तौर पर ऐसी स्थिति में प्रसव ही कराया जाता है, लेकिन इसमें बच्ची में शारीरिक दिक्कतों के अलावा मानसिक तौर पर भी मजबूत होना होगा।
विज्ञापन
बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें परिजन
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत पोपली का कहना है कि ऐसी उम्र में बच्चे नादान होते हैं। उन्हें अच्छे और बुरे की समझ इतनी नहीं होती। इसलिए माता-पिता को बच्चों के साथ दोस्ती वाला माहौल रखना चाहिए। बच्चे को लगना चाहिए कि अगर उसके साथ कुछ हुआ है तो माता-पिता को बताने में उसे डर नहीं लगेगा। इस प्रकरण में परिजनों को बच्ची के साथ रहकर उसका हौसला बढ़ाना होगा। उसे विश्वास दिलाना होगा कि परिवार के साथ सुरक्षित है और हर परिस्थिति का सामना कर सकती है।
विज्ञापन