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हिंदी दिवस: मोबाइल स्क्रीन पर नई पहचान बना रही है राजभाषा, तकनीक के साथ बदला अंदाज; जानकारों ने कहा विस्तार
Mon, 14 Sep 2026 02:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सचिन कुमार, नई दिल्ली
सचिन कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 14 Sep 2026 02:31 AM IST
सार
मोबाइल फोन और इंटरनेट ने हिंदी को एक नई जगह दे दी है। दिल्ली में युवा मोबाइल पर हिंदी में संदेश भेज रहे हैं, वीडियो देख रहे हैं और सोशल मीडिया पर अपनी बात रख रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Amar ujala
विस्तार
हिंदी अब सिर्फ किताबों, अखबारों और दफ्तरों की भाषा नहीं रही। मोबाइल फोन और इंटरनेट ने हिंदी को एक नई जगह दे दी है। दिल्ली में युवा मोबाइल पर हिंदी में संदेश भेज रहे हैं, वीडियो देख रहे हैं और सोशल मीडिया पर अपनी बात रख रहे हैं। कई लोग हिंदी को देवनागरी में लिखने के बजाय अंग्रेजी अक्षरों में लिख रहे हैं। भाषा के जानकार इसे हिंदी से दूरी नहीं, बल्कि बदलते समय के साथ उसका नया रूप मानते हैं।
हिंदी दिवस पर भाषा के जानकारों का कहना है कि किसी भाषा की ताकत इस बात से तय होती है कि वह आम लोगों की जिंदगी में कितनी आसानी से इस्तेमाल हो रही है। तकनीक ने हिंदी के इस्तेमाल को आसान बनाया है। अब मोबाइल में हिंदी लिखने के लिए अलग से व्यवस्था करने की जरूरत नहीं पड़ती। बोलकर भी हिंदी में संदेश लिखा जा सकता है।
युवा बना रहे हैं अपनी भाषा
दिल्ली के युवाओं की बातचीत में हिंदी के साथ अंग्रेजी के शब्दों का इस्तेमाल आम है। सोशल मीडिया पर ‘क्या कर रहे हो’ की जगह ‘kya kar rahe ho’ लिखना भी इसी बदलाव का हिस्सा है। हिंदी विशेषज्ञ राकेश उपाध्याय के अनुसार, भाषा का यह रूप युवाओं की जरूरत और उनकी बातचीत के तरीके से बन रहा है। इसे हिंदी के कमजोर होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, तकनीक ने हिंदी लिखने की मुश्किल काफी कम कर दी है। मोबाइल में हिंदी का विकल्प होने के साथ आवाज से लिखने की सुविधा ने इसे और आसान बनाया है। इससे उन लोगों को भी फायदा हो रहा है, जो हिंदी टाइप नहीं कर पाते।
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इंटरनेट पर लोगों की पसंद बन रही हिंदी
इंटरनेट पर पढ़ाई से लेकर नौकरी, कारोबार और मनोरंजन तक हिंदी में सामग्री उपलब्ध है। यूट्यूब और दूसरे डिजिटल मंचों पर हिंदी में जानकारी देने वाले कई चैनल लोगों तक पहुंच बना रहे हैं। इससे हिंदी बोलने और समझने वाले लोगों के लिए इंटरनेट की दुनिया पहले से ज्यादा आसान हुई है।
भाषा को समय के साथ चलना होगा
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अनिल चौहान कहते हैं कि हिंदी को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय तकनीक, शिक्षा और रोजगार से जोड़ना जरूरी है। नई पीढ़ी जिस माध्यम पर सबसे ज्यादा समय बिता रही है, हिंदी को भी उसी माध्यम पर मजबूत जगह बनानी होगी। हिंदी दिवस पर सबसे बड़ी चुनौती हिंदी को केवल एक दिन की भाषा बनाने से बचाना है। हिंदी जितनी मोबाइल, इंटरनेट, शिक्षा और रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल होगी, उतनी ही मजबूत होगी। दिल्ली में बदलती भाषा इसका उदाहरण है। हिंदी का अंदाज जरूर बदला है, लेकिन लोगों की जुबान पर उसकी जगह अब भी कायम है।
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हिंदी दिवस पर भाषा के जानकारों का कहना है कि किसी भाषा की ताकत इस बात से तय होती है कि वह आम लोगों की जिंदगी में कितनी आसानी से इस्तेमाल हो रही है। तकनीक ने हिंदी के इस्तेमाल को आसान बनाया है। अब मोबाइल में हिंदी लिखने के लिए अलग से व्यवस्था करने की जरूरत नहीं पड़ती। बोलकर भी हिंदी में संदेश लिखा जा सकता है।
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युवा बना रहे हैं अपनी भाषा
दिल्ली के युवाओं की बातचीत में हिंदी के साथ अंग्रेजी के शब्दों का इस्तेमाल आम है। सोशल मीडिया पर ‘क्या कर रहे हो’ की जगह ‘kya kar rahe ho’ लिखना भी इसी बदलाव का हिस्सा है। हिंदी विशेषज्ञ राकेश उपाध्याय के अनुसार, भाषा का यह रूप युवाओं की जरूरत और उनकी बातचीत के तरीके से बन रहा है। इसे हिंदी के कमजोर होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, तकनीक ने हिंदी लिखने की मुश्किल काफी कम कर दी है। मोबाइल में हिंदी का विकल्प होने के साथ आवाज से लिखने की सुविधा ने इसे और आसान बनाया है। इससे उन लोगों को भी फायदा हो रहा है, जो हिंदी टाइप नहीं कर पाते।
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इंटरनेट पर लोगों की पसंद बन रही हिंदी
इंटरनेट पर पढ़ाई से लेकर नौकरी, कारोबार और मनोरंजन तक हिंदी में सामग्री उपलब्ध है। यूट्यूब और दूसरे डिजिटल मंचों पर हिंदी में जानकारी देने वाले कई चैनल लोगों तक पहुंच बना रहे हैं। इससे हिंदी बोलने और समझने वाले लोगों के लिए इंटरनेट की दुनिया पहले से ज्यादा आसान हुई है।
भाषा को समय के साथ चलना होगा
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अनिल चौहान कहते हैं कि हिंदी को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय तकनीक, शिक्षा और रोजगार से जोड़ना जरूरी है। नई पीढ़ी जिस माध्यम पर सबसे ज्यादा समय बिता रही है, हिंदी को भी उसी माध्यम पर मजबूत जगह बनानी होगी। हिंदी दिवस पर सबसे बड़ी चुनौती हिंदी को केवल एक दिन की भाषा बनाने से बचाना है। हिंदी जितनी मोबाइल, इंटरनेट, शिक्षा और रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल होगी, उतनी ही मजबूत होगी। दिल्ली में बदलती भाषा इसका उदाहरण है। हिंदी का अंदाज जरूर बदला है, लेकिन लोगों की जुबान पर उसकी जगह अब भी कायम है।