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Saharanpur News: स्नातकोत्तर स्तर पर अर्थशास्त्र और भूगोल जैसे विषयों को पीछे छोड़ हिंदी आगे

Mon, 14 Sep 2026 01:10 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 01:10 AM IST
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Hindi surpasses subjects like Economics and Geography at the postgraduate level.
-------हिंदी दिवस
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- स्नातक स्तर पर बीए में भी 95 फीसदी से अधिक छात्रों को हिंदी पसंद
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हिंदी के प्रति विद्यार्थियों की लोकप्रियता आज भी कम नहीं हुई है। स्नातकोत्तर स्तर पर हिंदी विषय भूगोल, संस्कृत, अर्थशास्त्र और विज्ञान वर्ग में कहें तो गणित और भौतिक विज्ञान जैसे विषयों को पछाड़ रहा है। स्नातक स्तर पर बीए में भी 95 फीसदी छात्र हिंदी को पसंद कर रहे हैं।
जेवी जैन कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश चंद्रा ने बताया कि पीढ़ी बदलने के बाद भी हिंदी के प्रति विद्यार्थियों का लगाव और विषय के रूप में चाह कम नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि उनके कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी है। रिक्त सीटों को भरने के लिए विश्वविद्यालय ने और समय दिया है, लेकिन आंकड़ों पर नजर डालें तो एमए संस्कृत में 39, एमए भूगोल में पांच, एमए चित्रकला में दो, एमए अर्थशास्त्र में एक सीट खाली है।
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एमएससी गणित में 29 और एमएससी भौतिक विज्ञान में नौ सीटें खाली हैं, जबकि एमए हिंदी में सीटें काफी पहले भरी जा चुकी हैं और छात्र किसी तरह प्रवेश मिल जाने की फिराक में हैं। उन्होंने बताया कि बीए में भी 95 फीसदी छात्र हिंदी विषय रखते हैं। उन्होंने बताया कि एक वर्ग ऐसा है, जिसे कारोबार क्लास कहते हैं, जिसने हिंदी से थोड़ी दूरी बनाई है, लेकिन वह प्रतिशत में पांच से भी कम है। अन्यथा हिंदी आज भी पढ़ाई के लिए चुने जाने वाले टॉप विषयों में शामिल है। उधर, महाराज सिंह कॉलेज में भी बीए में 90 फीसदी से अधिक छात्रों ने हिंदी को लिया है। जनपद के दो प्रमुख कॉलेजों के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं, कि हिंदी केवल मातृ भाषा नहीं, बल्कि रोजगार की भी भाषा है।
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-- एमए स्तर हिंदी लोकप्रिय विषयों में शामिल है। बीए में भी हिंदी को पसंद किया जा रहा है। मातृ भाषा होने के चलते विद्यार्थियों को यह आसान भी लगती है। इस वजह से भी इसे पसंद किया जाता है। - प्रो. संजय कुमार गुप्ता, प्रवेश समन्वयक, मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय


--- दसवीं के बाद हिंदी को कम महत्व
सीबीएसई ने दसवीं तक हिंदी को अनिवार्य विषय के रूप में रखा है, लेकिन उसके बाद यानी 11वीं और 12वीं में यह अनिवार्य नहीं है। यदि किसी की इच्छा हो तो ले सकता है अन्यथा नहीं। ऐसे में यह कड़वी सच्चाई है कि दसवीं के बाद 70 फीसदी से अधिक विद्यार्थी हिंदी को छोड़ देते हैं। उनको लगता है कि अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय भाषा है, जो उनको वैश्विक स्तर पर मदद कर सकती है।
सीबीएसई के जिला समन्वयक डॉ. दिव्य जैन ने का कहना है कि हिंदी का अपना महत्व है, लेकिन यह छात्र की ही मर्जी है कि वह क्या पढ़ना चाहता है।
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