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Saharanpur News: नगर निकायों में अब नहीं चलेगी प्रतिनिधियों की हेकड़ी

Wed, 02 Aug 2023 11:20 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Aug 2023 11:20 PM IST
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The arrogance of the representatives will no longer work in the municipal bodies
सहारनपुर। अब नगर निकायों में महापौर, नगर पालिका या नगर पंचायत अध्यक्ष या फिर पार्षद और सभासद के कथित प्रतिनिधियों की हेकड़ी नहीं चलेगी। प्रदेश भर से प्रतिनिधियों के बेवजह के हस्तक्षेप की शिकायतों को देखते हुए नगर विकास अनुभाग ने इस पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। आदेश के अनुपालन में जिलाधिकारी ने महापौर और जनपद के तमाम निकायों के अध्यक्षों को पत्र जारी करते हुए इसका अनुपालन कराने को कहा है। इतना ही नहीं, यदि प्रतिनिधियों का हस्तक्षेप होता पाया जाता है तो उनके विरुद्ध शासन कार्रवाई भी करेगा।
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अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग खुद को निर्वाचित या पदेन पदाधिकारियों के परिजन या संबंधी या प्रतिनिधि बताकर निकायों के प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं। इसके अलावा पार्षदों और सभासदों के प्रतिनिधि के तौर पर खासकर महिला पार्षदों और सभासदों के प्रतिनिधि बोर्ड बैठकों में शामिल रहते हैं। मगर अब ऐसा नहीं होगा।
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जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने महापौर डॉ. अजय कुमार और जनपद के सभी निकायों के अध्यक्षों को पत्र जारी किया है। पत्र में कथित प्रतिनिधियों के हस्तक्षेप पर रोक लगाने को कहा गया है। उन्होंने अपने पत्र में नगर विकास अनुभाग के प्रमुख सचिव के दस अक्तूबर 2012 के पत्र का हवाला दिया है। इसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 एवं उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 के प्राविधानों में स्पष्ट है कि महापौर या अध्यक्ष या पार्षद और सभासद जो निर्वाचकों द्वारा निर्वाचित किया गया हो। ऐसे व्यक्ति से अलग कोई भी व्यक्ति निकायों के प्रशासनिक कार्य में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं कर सकता, ना ही बोर्ड बैठकों में शामिल हो सकता है।
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महिला पदाधिकारियों द्वारा निकायों के प्रशासनिक कार्यों या बैठकों में अपने स्थान पर प्रतिनिधि को भेजना अधिनियम के विरुद्ध है। शासन के स्पष्ट आदेश हैं कि नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों की बैठकों में निर्वाचित या पदेन पदाधिकरियों के अलावा कोई भी व्यक्ति शामिल ना किया जाए। निर्वाचित या पदेन पदाधिकारियों के अलावा उनसे संबंधित किसी भी व्यक्ति को नगर निकायों के अभिलेखों के अवलोकन की अनुमति ना दी जाए। खासकर जब तक तब तक कि उनके द्वारा विधिवत निरीक्षण के लिए आवेदन न किया गया हो। नगर आयुक्त या अधिशासी अधिकारी द्वारा ऐसे निरीक्षण की लिखित में अनुमति ना दी गई हो।


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तो शासन करेगा कार्रवाई
शासन द्वारा जिलाधिकारी से अपेक्षा की गई है कि वह आदेश का कड़ाई से पालन कराएं। यदि आदेश का उल्लंघन होता पाया जाता है। यानी प्रशासनिक कार्यों एवं बोर्ड बैठकों में प्रतिनिधियों का हस्तक्षेप पाया जाता है तो उससे प्रशासन-शासन को अवगत कराएगा। इसके बाद शासन संबंधित के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करेगा।
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