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बिना बीएड किए बना दी शिक्षिका, एक के प्रमाण पत्र फर्जी मिले
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जनपद के कस्तूरबा गांधी विद्यालयों से जुड़ा मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद सहारनपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में तैनात अन्य शिक्षिकाओं के प्रमाणपत्रों की जांच में नया खुलासा हुआ है। एक शिक्षिका ऐसी मिली है, जिसके दसवीं और 12वीं के प्रमाणपत्र अमान्य हैं। एक शिक्षिका के पास बीएड की डिग्री ही नहीं मिली है, जबकि दूसरी ने शिक्षिका के पद पर तैनाती के बाद बीएड की है। सवाल है कि बिना बीएड की डिग्री के तैनाती किस आधार पर दी गई थी।
साढ़ोली कदीम की संविदा पर तैनात एक शिक्षिका के दसवीं और 12वीं की मार्कशीट गुरुकुल विश्वविद्यालय वृंदावन मथुरा की पाई गई हैं, जिनको मान्यता नहीं होती है। विभाग ने इन्हें फर्जी मानते हुए स्पष्टीकरण देने को कहा है। दूसरी शिक्षिका मुजफ्फराबाद में संविदा पर तैनात है, जिसकी बीएड की डिग्री इग्नू से है, जो उन्होंने ड्यूटी पर रहते समय बिना किसी स्वीकृति के प्राप्त की है। जबकि नियुक्ति के समय योग्यता पूर्ण होना अनिवार्य है। इनको भी स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। तीसरी शिक्षिका के पास बीएड की डिग्री ही नहीं मिली है। यह शिक्षिका देवबंद में संविदा पर तैनात है।
आज तक क्यों नहीं हुई जांच
जिन शिक्षिकाओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इनकी नियुक्ति आठ से दस वर्ष पहली बताई जा रही हैं। सवाल यह है कि इतने वर्षों में आज तक कैसे बिना डिग्री के वह पढ़ाती रही हैं।
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तीन कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में तीन ऐसी शिक्षिकाएं मिली हैं, जिनमें से एक के पास बीएड की डिग्री नहीं है। दूसरी ने तैनाती के बाद बीएड की है। जबकि तीसरी के हाईस्कूल और इंटर की मार्कशीट अमान्य हैं। इनकी नियुक्ति काफी पहली है। स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद सहारनपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में तैनात अन्य शिक्षिकाओं के प्रमाणपत्रों की जांच में नया खुलासा हुआ है। एक शिक्षिका ऐसी मिली है, जिसके दसवीं और 12वीं के प्रमाणपत्र अमान्य हैं। एक शिक्षिका के पास बीएड की डिग्री ही नहीं मिली है, जबकि दूसरी ने शिक्षिका के पद पर तैनाती के बाद बीएड की है। सवाल है कि बिना बीएड की डिग्री के तैनाती किस आधार पर दी गई थी।
साढ़ोली कदीम की संविदा पर तैनात एक शिक्षिका के दसवीं और 12वीं की मार्कशीट गुरुकुल विश्वविद्यालय वृंदावन मथुरा की पाई गई हैं, जिनको मान्यता नहीं होती है। विभाग ने इन्हें फर्जी मानते हुए स्पष्टीकरण देने को कहा है। दूसरी शिक्षिका मुजफ्फराबाद में संविदा पर तैनात है, जिसकी बीएड की डिग्री इग्नू से है, जो उन्होंने ड्यूटी पर रहते समय बिना किसी स्वीकृति के प्राप्त की है। जबकि नियुक्ति के समय योग्यता पूर्ण होना अनिवार्य है। इनको भी स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। तीसरी शिक्षिका के पास बीएड की डिग्री ही नहीं मिली है। यह शिक्षिका देवबंद में संविदा पर तैनात है।
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आज तक क्यों नहीं हुई जांच
जिन शिक्षिकाओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इनकी नियुक्ति आठ से दस वर्ष पहली बताई जा रही हैं। सवाल यह है कि इतने वर्षों में आज तक कैसे बिना डिग्री के वह पढ़ाती रही हैं।
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तीन कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में तीन ऐसी शिक्षिकाएं मिली हैं, जिनमें से एक के पास बीएड की डिग्री नहीं है। दूसरी ने तैनाती के बाद बीएड की है। जबकि तीसरी के हाईस्कूल और इंटर की मार्कशीट अमान्य हैं। इनकी नियुक्ति काफी पहली है। स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए।