Saharanpur: स्वामी दीपांकर महाराज बोले- जातिगत भेदभाव छोड़ एकजुट हो हिंदू, समाज से 2026 के लिए किया ये आह्वान
सहारनपुर के गंगोह में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में स्वामी दीपांकर महाराज ने हिंदू समाज से जातिगत भेदभाव त्याग कर एकजुट होने और 2026 में जातिवाद को समाप्त करने का आह्वान किया।
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सहारनपुर में गंगोह में विराट हिंदू सम्मेलन में मुख्य वक्ता स्वामी दीपांकर जी महाराज ने हिंदू समाज से जातिगत भेदभाव त्याग कर एकजुट होने और वर्ष 2026 में जातिवाद को विदा करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने देशभक्ति से औत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी।
स्वामी दीपंकर जी महाराज ने अपने संबोधन में बांग्लादेश की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां हिंदुओं की हत्याओं के दौरान किसी की जाति नहीं पूछी गई, सभी को केवल उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया। उन्होंने चेताया कि यदि हिंदू समाज आपसी भेदभाव में बंटा रहा, तो इसके दुष्परिणाम और गंभीर हो सकते हैं। उनके इस संदेश ने सम्मेलन में उपस्थित जनसमूह को गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित किया।
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मंच पर ग्रंथी देवेंद्र सिंह, वीरेंद्र शास्त्री, बीके संतोष, साध्वी शरण दास, महंत लक्ष्मी चंद, योगानंद, विभाग प्रचारक आशुतोष, जिला कार्यवाह मनीष सहित अनेक संत व पदाधिकारी विराजमान रहे। सभी वक्ताओं ने हिंदू समाज से जातियों से ऊपर उठकर एकजुट होने और सामाजिक समरसता को अपनाने की अपील की। संचालन डा. अमित गर्ग और गगन गर्ग ने संयुक्त रूप से किया। समिति के रमेश चंद गर्ग, विकास मित्तल, मा. यशपाल सैनी, मनोज गोयल, शशिकांत शर्मा, विजय पाल, राजेश काका, सतकुमार, दीपक सैनी, राकेश मित्तल, देवेंद्र प्रधान सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
सम्मेलन में उठा यूजीसी का मुद्दा
सम्मेलन के दौरान उस समय विशेष स्थिति उत्पन्न हो गई, जब स्वामी दीपांकर जी महाराज के प्रवचन के बीच एक महिला राजनंदिनी ने खड़े होकर यूजीसी से जुड़े मुद्दे को उठा दिया। महिला ने कहा कि जहां एक ओर जातिवाद समाप्त कर हिंदुओं को एकजुट होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर यूजीसी के माध्यम से स्वर्ण समाज के बच्चों का भविष्य अंधकार में जाता दिखाई दे रहा है।
इस पर स्वामी दीपांकर जी महाराज मंच से उतरकर महिला के पास पहुंचे और कहा कि यदि किसी भी नीति या व्यवस्था से हिंदू समाज की एकजुटता को खतरा उत्पन्न होता है, तो सरकार निश्चित रूप से इस विषय पर ध्यान देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यूजीसी की खामियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि समाज के किसी भी वर्ग के भविष्य के साथ अन्याय न हो।