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पढ़ाई इंजीनियरिंग की, पेशे से उद्यमी... पर हिंदी लेखन में दक्षता

Thu, 26 Aug 2021 11:33 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Aug 2021 11:33 PM IST
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Studied Engineering, Entrepreneur by profession... but proficiency in writing in Hindi
शिव कुमार गौड - फोटो : SAHARANPUR
पढ़ाई इंजीनियरिंग की, पेशे से उद्यमी... पर हिंदी लेखन में दक्षता
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सहारनपुर। मातृभाषा हिंदी के प्रति प्रेम करने वाले ऐसे हैं, जो साहित्य लेखन का समय निकाल ही लेते हैं, फिर चाहे उनका पेशा जो भी हो। ऐसे ही हैं शिवकुमार गौड़, जिन्होंने पढ़ाई इंजीनियरिंग की और अब उद्योग चला रहे हैं, लेकिन हिंदी के प्रति उनका प्रेम कम नहीं हुआ। बाल गीत लिखना उनकी कला है, जिसके चलते वह बाल गीतों की पुस्तक भी प्रकाशित कर चुके हैं।
शहर के नारायणपुरी गिल कॉलोनी में रहने वाले शिवकुमार गौड़ सहारनपुर इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज नेहरू मार्केट सहारनपुर से की, जबकि उसके बाद बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (बीई) की पढ़ाई बंगलुरु से 1977 में की। इसके बाद कई साल तक आईआईटी रुड़की कैंपस सहारनपुर स्थित आईपीटी (इंडियन पेपर इंस्टीट्यूट) में बतौर प्रवक्ता सेवा दी। इसके बाद उन्होंने 1980 में मशीनरी उद्योग लगाया, लेकिन देशभक्ति गीत, बाल गीत और कविताओं के लिखने का सिलसिला जारी रहा। समन्वय संस्था के साथ जुड़कर देश के विभिन्न शहरों में हुए आयोजनों में अपनी रचनाएं सुनाकर खूब वाहवाही भी बटोरी।
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गीत मंजरी में शामिल हैं 10 कविताएं
उनके द्वारा बाल गीतों पर आधारित हल्ला गुल्ला प्रकाशित कराई गई। खास बात यह है कि इनके बाल गीतों के संकलन में से 10 कविताएं सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई जाने वाली गीत मंजरी में भी शामिल की गईं हैं। जो कई साल से विद्यालयों में पढ़ाई जा रही हैं। इसके अलावा हरा समंदर नाम से एक और पुस्तक उनकी प्रकाशित होने वाली है।
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12वीं कक्षा से शुरू हुआ सफर
शिवकुमार गौड़ बताते हैं जब वह इंटर की पढ़ाई कर रहे थे तो कॉलेज का टूर कश्मीर गया था। वहां से लौटने पर यात्रा ए कश्मीर निबंध लिखा, जो खूब सराहा गया। इसके बाद कई पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित हुए, जिससे हिंदी के प्रति प्रेम बढ़ता गया। इसके अलावा बंगलुरु में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान भी यूनिवर्सिटी की तरफ से हिंदी पर हुए वाद विवाद प्रतियोगिताओं में तीन साल तक प्रथम स्थान जीतते रहे।

ऐसे ही हैं बसंत सिंह कौशांबी
शहर के चंद्रनगर में रहने वाले बसंत सिंह कौशांबी पेशे से अधिवक्ता हैं, लेकिन गद्य लेखन में विशेष रुचि उनको हिंदी से बांधकर रखती है। आजादी की लड़ाई और अन्य आंदोलनों को लेकर दो किताबें प्रकाशित करा चुके हैं। अधिवक्ता होने के नाते दिनभर न्यायिक कार्यों में व्यस्तता के बावजूद वह हिंदी गद्य लेखन के लिए समय निकाल लेते हैं।
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