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कभी होता था शोध, अब दिया जाता है सिर्फ प्रशिक्षण

Tue, 09 Mar 2021 10:52 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Mar 2021 10:52 PM IST
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Sometimes there was research, now only training is given
- सहारनपुर में औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र। - फोटो : SAHARANPUR
कभी होता था शोध, अब दिया जाता है सिर्फ प्रशिक्षण
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सहारनपुर। औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र अब सिर्फ प्रशिक्षण केंद्र बनकर रह गया है। यहां पर नई प्रजातियां विकसित नहीं की जा रही हैं, जबकि एक समय था कि आड़ू और आम की कई प्रजाति विकसित की गईं। इनमें आड़ू की सहारनपुर प्रभात और सहारनपुर बहार जैसी कामयाब प्रजातियां शामिल हैं, जो आज भी बागवानों को भा रही हैं।
वर्ष 1950 से सहारनपुर के कंपनी बाग में उद्यान विभाग का शोध केंद्र रहा जो 1976 में औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। यहां केंद्रीय फल एवं पौधे उत्पादन पौधशाला भी स्थापित की गई, जिसमें विभिन्न प्रकार के फलों की पौधे तैयार करने का काम होता है। इसमें आम, अमरूद, लीची, आड़ू, लोकाट, पुलम, नाशपाती, कटहल, जामुन, पपीता, नींबू, किन्नो आदि की उन्नतशील प्रजातियों की पौध शामिल हैं। नर्सरी से बागवानों को उच्च क्वालिटी के पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं।
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- कामयाब रहीं आडू की प्रभात एवं बहार प्रजाति
कंपनी बाग के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई आडू़ की सहारनपुर प्रभात एवं सहारनपुर बहार प्रजाति कामयाब साबित हो रही हैं। आडू़ की ये प्रजातियां सुर्ख लाल, रसीली, मीठी और आकर्षक हैं। इनका उत्पादन भी दूसरी प्रजातियों की अपेक्षा ज्यादा है। वहीं, आम की गौरव, सौरभ एवं राजीव प्रजातियां भी यहीं से विकसित हुई हैं। इनके फल में गुठली मध्यम और गूदा हल्के पीले रंग का एवं रेशा रहित होता है। इन प्रजातियों के पेड़ प्रतिवर्ष उत्पादन देते हैं।
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- आम की 216 प्रजातियों का संकलन
कंपनी बाग में बडी संख्या में विभिन्न फलों की प्रजातियों के पेड़ हैं। इनमें आम की 216, लीची की चार, लोकाट की सात, आडू की सात, अमरूद की सात और कटहल की तीन प्रजातियों के पेड़ हैं। इसके अलावा नाशपाती की एक, आंवला की चार, चीकू की दो, अनार की चार और नींबू की तीन प्रजातियों का संकलन है।

- इनका दिया जाता है प्रशिक्षण
- मौन पालन का 45 एवं 90 दिवसीय प्रशिक्षण
- मशरूम उत्पादन का सात दिवसीय प्रशिक्षण
- 30 दिवसीय माली प्रशिक्षण
- औद्यानिक कृषक प्रशिक्षण
- वर्जन --
औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में अब शोध कार्य नहीं होता। विभिन्न शोध संस्थानों द्वारा तैयार की जाने वाली प्रजातियों को केंद्र में लगाकर इसका ट्रायल किया जाता है। इसके अलावा किसानों और बागवानों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
- भानू प्रकाश राम, संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग।
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