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सहारनपुर में में ट्रांसफार्मरों की किल्लत, बेहाली बढ़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 24 Jun 2016 12:21 AM IST
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फुंके पड़े सैकड़ों ट्रांसफार्मर।
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में भीषण गर्मी में लोड बढ़ते ही ट्रांसफार्मर धुआं देने लगे हैं, लेकिन विद्युत निगम के पास ट्रांसफार्मर ही नहीं है। पूरा जिला ट्रांसफार्मर की कमी से जूझ रहा है। किसान तक 6-6 माह में ट्रांसफार्मर दिए जाने का आरोप लगा रहे हैं।
न तो स्टॉक में ट्रांसफार्मर है और न ही फुंके ट्रांसफार्मर के सापेक्ष मरम्मत होकर मिल पा रहे हैं। दो माह से जिले में बिजली की समस्या गहरा गई है। ट्रांसफार्मर की क्वालिटी ही घटिया है, या फिर उनकी मरम्मत में लापरवाही बरती जा रही है, कि जरा सा लोड बढ़ते ही ट्रांसफार्मर फुंक रहा है और
फिर भीषण गर्मी में लोगों को कई-कई दिनों तक अंधेरे में रहना पड़ रहा है। देहात क्षेत्र में तो महीनों लग रहे हैं ट्रांसफार्मर मिलने में। सहारनपुर में ट्रांसफार्मर ना तो स्टॉक में है और ना ही समय से रिपेयर की व्यवस्था है। ऐसे में गर्मी में लोगों को भारी बिजली संकट से जूझना पड़ा रहा है।
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आलम यह है कि प्रतिदिन शहर के कई मोहल्लों में ट्रांसफार्मर की वजह से बिजली संकट झेलना पड़ रहा है। शहर में हर माह लगभग 50 से अधिक ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। जबकि देहात को मिलाकर लगभग 400 ट्रांसफार्मर हर माह फुंक कर मरम्मत के लिए भेजे जा रहे हैं,
जबकि मरम्मत होकर सिर्फ 200 से 250 ट्रांसफार्मर ही आ पा रहे हैं। शहर तक की हालत यह है कि किसी ट्रांसफार्मर में फाल्ट आने पर उसे उतारकर रिपेयर के लिए भेजा जा रहा है। उसके विकल्प के रूप में दूसरा ट्रांसफार्मर विद्युत निगम के पास नहीं है।
25 और 63 केवीए के ट्रांसफार्मस की अधिक डिमांड
जिले में 25 और 63 केवीए के ट्रांसफार्मर की अधिक डिमांड है। देहात क्षेत्र में तो सभी अपने ट्यूबवेल के लिए अलग ट्रांसफार्मर की डिमांड करते हैं। अधिक से अधिक दो तीन कनेक्शन हो पाते हैं।
जिस कारण 25 और 63 केवीए के ट्रांसफार्मर की डिमांड अधिक है। शहर के लिए मोबाइल ट्रांसफार्मर की व्यवस्था है, लेकिन सहारनपुर में कोई मोबाइल ट्रांसफार्मर तक रिजर्व में नहीं है। जितने भी ट्रांसफार्मर हैं, उन्हें अधिकारियों और नेताओं के घरों को सप्लाई देने वाले ट्रांसफार्मरों के साथ लगा रखा है।
हर माह फुंक रहे 400 ट्रांसफार्मर
विद्युत निगम के अधिकारियों के अनुसार जिले में ओवरलोड होने के कारण ट्रांसफार्मर अधिक फुंक रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि वाटर लेवल नीचे चले जाने के कारण किसानों ने 12 हार्स पावर से कम मोटर नहीं लगा रखे हैं।
जबकि कनेक्शन साढ़े सात हार्स पावर, पांच हार्स पावर के ही हैं। कनेक्शन के आधार पर ही ट्रांसफार्मर रखे जाते हैं। जो ओवरलोड होकर फुंक रहे हैं। हर माह लगभग 400 ट्रांसफार्मर ओवरलोड के कारण फुंक रहे हैं।
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न तो स्टॉक में ट्रांसफार्मर है और न ही फुंके ट्रांसफार्मर के सापेक्ष मरम्मत होकर मिल पा रहे हैं। दो माह से जिले में बिजली की समस्या गहरा गई है। ट्रांसफार्मर की क्वालिटी ही घटिया है, या फिर उनकी मरम्मत में लापरवाही बरती जा रही है, कि जरा सा लोड बढ़ते ही ट्रांसफार्मर फुंक रहा है और
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फिर भीषण गर्मी में लोगों को कई-कई दिनों तक अंधेरे में रहना पड़ रहा है। देहात क्षेत्र में तो महीनों लग रहे हैं ट्रांसफार्मर मिलने में। सहारनपुर में ट्रांसफार्मर ना तो स्टॉक में है और ना ही समय से रिपेयर की व्यवस्था है। ऐसे में गर्मी में लोगों को भारी बिजली संकट से जूझना पड़ा रहा है।
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आलम यह है कि प्रतिदिन शहर के कई मोहल्लों में ट्रांसफार्मर की वजह से बिजली संकट झेलना पड़ रहा है। शहर में हर माह लगभग 50 से अधिक ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। जबकि देहात को मिलाकर लगभग 400 ट्रांसफार्मर हर माह फुंक कर मरम्मत के लिए भेजे जा रहे हैं,
जबकि मरम्मत होकर सिर्फ 200 से 250 ट्रांसफार्मर ही आ पा रहे हैं। शहर तक की हालत यह है कि किसी ट्रांसफार्मर में फाल्ट आने पर उसे उतारकर रिपेयर के लिए भेजा जा रहा है। उसके विकल्प के रूप में दूसरा ट्रांसफार्मर विद्युत निगम के पास नहीं है।
25 और 63 केवीए के ट्रांसफार्मस की अधिक डिमांड
जिले में 25 और 63 केवीए के ट्रांसफार्मर की अधिक डिमांड है। देहात क्षेत्र में तो सभी अपने ट्यूबवेल के लिए अलग ट्रांसफार्मर की डिमांड करते हैं। अधिक से अधिक दो तीन कनेक्शन हो पाते हैं।
जिस कारण 25 और 63 केवीए के ट्रांसफार्मर की डिमांड अधिक है। शहर के लिए मोबाइल ट्रांसफार्मर की व्यवस्था है, लेकिन सहारनपुर में कोई मोबाइल ट्रांसफार्मर तक रिजर्व में नहीं है। जितने भी ट्रांसफार्मर हैं, उन्हें अधिकारियों और नेताओं के घरों को सप्लाई देने वाले ट्रांसफार्मरों के साथ लगा रखा है।
हर माह फुंक रहे 400 ट्रांसफार्मर
विद्युत निगम के अधिकारियों के अनुसार जिले में ओवरलोड होने के कारण ट्रांसफार्मर अधिक फुंक रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि वाटर लेवल नीचे चले जाने के कारण किसानों ने 12 हार्स पावर से कम मोटर नहीं लगा रखे हैं।
जबकि कनेक्शन साढ़े सात हार्स पावर, पांच हार्स पावर के ही हैं। कनेक्शन के आधार पर ही ट्रांसफार्मर रखे जाते हैं। जो ओवरलोड होकर फुंक रहे हैं। हर माह लगभग 400 ट्रांसफार्मर ओवरलोड के कारण फुंक रहे हैं।