{"_id":"592b148f4f1c1ba915bdaf80","slug":"shabbirpur-still-not-cracked-silent","type":"story","status":"publish","title_hn":"शब्बीरपुर में नहीं टूट रहा सन्नाटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शब्बीरपुर में नहीं टूट रहा सन्नाटा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 29 May 2017 12:25 AM IST
विज्ञापन
शब्बीरपुर में तैनात पुलिस अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर का शब्बीरपुर अब शांति की ओर चल पड़ा है। लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त होने लगे हैं, लेकिन घटना के तीन सप्ताह बाद भी सन्नाटा टूटने का नाम नहीं ले रहा है। लोगों में अनजानी दहशत आज भी बनी हुई है।
शब्बीरपुर में पांच मई को बवाल हुआ था। उसके बाद से सिफ्र शब्बीरपुर ही नहीं पूरा जिला ही अशांत हो गया। शब्बीरपुर में शांति की कोशिश कई बार की गई, लेकिन हर बार कुछ न कुछ मामला होने से शब्बीरपुर में तनाव होता रहा है।
23 मई को मायावती के आगमन से पूर्व भी गांव में आगजनी की घटना हो गई। इससे दलित और राजपूत दोनों पक्षों में तनाव और भी बढ़ गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं लखनऊ तक से शासन की टीम ने गांव में जाकर डेरा डाल दिया।
विज्ञापन
घर-घर जाकर लोगों को समझाया गया। मन में एक दूसरे के प्रति बढ़ रहे नफरत के जहर को कम करने की कोशिश की। लखनऊ की टीम शांति मानकर लखनऊ लौट चुकी है। गांव भी शांति की ओर चल पड़ा है।
लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त होने लगे हैं। खेत खलिहानों में रौनक लौटने लगी है। लेकिन गलियों में जो सन्नाटा पसरा हुआ है वह टूटने का नाम नहीं ले रहा है।
गांव की गलियों में घटना के 23 दिन बाद भी सिर्फ पुलिस और पीएसी ही चहल कदमी करती नजर आ रही है। रविदास मंदिर से लेकर दो मोहल्लों के बार्डर तक पुलिस ने पहरा बैठा रखा है।
अभी भी लोगों में अनजानी सी दहशत कायम है। बताया जा रहा है कि एक दूसरे के मोहल्ले से होकर लोग गुजरने से भी कतरा रहे हैं। आरोप है कि एक पक्ष का कोई व्यक्ति दूसरे मोहल्ले के रास्ते से होकर गुजरता है तो अभी भी अनजाना भय बना रहता है।
एक पक्ष के व्यक्ति ने बताया कि ब तो लोगों ने अपना-अपना रास्ता ही बदल लिया है। जबकि पहले गांव का मुख्य रास्ता एक ही था। लेकिन अब दलित एक ओर से जा रहे हैं, तो राजपूत दूसरी ओर से गुजर रहे हैं।
दोनों ही रास्ते एक दूसरे के विपरीत हैं। बीच में पुलिस कर्मी खड़े हुए हैं और दोनों रास्तों पर निगाहें जमाए हुए हैं। ऐसा लग रहा है कि गांव तो शांति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन दिलों के बीच पैदा हुई खाई को भरना इतना आसान नहीं है।
एसपी देहात विद्यासागर मिश्र का कहना है कि गांव में पूरी तरह से शांति बनी हुई है। कहीं कोई विवाद नहीं रह गया है। एहतियातन अभी गांव में पुलिस तैनात है।
विज्ञापन
शब्बीरपुर में पांच मई को बवाल हुआ था। उसके बाद से सिफ्र शब्बीरपुर ही नहीं पूरा जिला ही अशांत हो गया। शब्बीरपुर में शांति की कोशिश कई बार की गई, लेकिन हर बार कुछ न कुछ मामला होने से शब्बीरपुर में तनाव होता रहा है।
विज्ञापन
23 मई को मायावती के आगमन से पूर्व भी गांव में आगजनी की घटना हो गई। इससे दलित और राजपूत दोनों पक्षों में तनाव और भी बढ़ गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं लखनऊ तक से शासन की टीम ने गांव में जाकर डेरा डाल दिया।
विज्ञापन
घर-घर जाकर लोगों को समझाया गया। मन में एक दूसरे के प्रति बढ़ रहे नफरत के जहर को कम करने की कोशिश की। लखनऊ की टीम शांति मानकर लखनऊ लौट चुकी है। गांव भी शांति की ओर चल पड़ा है।
लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त होने लगे हैं। खेत खलिहानों में रौनक लौटने लगी है। लेकिन गलियों में जो सन्नाटा पसरा हुआ है वह टूटने का नाम नहीं ले रहा है।
गांव की गलियों में घटना के 23 दिन बाद भी सिर्फ पुलिस और पीएसी ही चहल कदमी करती नजर आ रही है। रविदास मंदिर से लेकर दो मोहल्लों के बार्डर तक पुलिस ने पहरा बैठा रखा है।
अभी भी लोगों में अनजानी सी दहशत कायम है। बताया जा रहा है कि एक दूसरे के मोहल्ले से होकर लोग गुजरने से भी कतरा रहे हैं। आरोप है कि एक पक्ष का कोई व्यक्ति दूसरे मोहल्ले के रास्ते से होकर गुजरता है तो अभी भी अनजाना भय बना रहता है।
एक पक्ष के व्यक्ति ने बताया कि ब तो लोगों ने अपना-अपना रास्ता ही बदल लिया है। जबकि पहले गांव का मुख्य रास्ता एक ही था। लेकिन अब दलित एक ओर से जा रहे हैं, तो राजपूत दूसरी ओर से गुजर रहे हैं।
दोनों ही रास्ते एक दूसरे के विपरीत हैं। बीच में पुलिस कर्मी खड़े हुए हैं और दोनों रास्तों पर निगाहें जमाए हुए हैं। ऐसा लग रहा है कि गांव तो शांति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन दिलों के बीच पैदा हुई खाई को भरना इतना आसान नहीं है।
एसपी देहात विद्यासागर मिश्र का कहना है कि गांव में पूरी तरह से शांति बनी हुई है। कहीं कोई विवाद नहीं रह गया है। एहतियातन अभी गांव में पुलिस तैनात है।