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कई लाइलाज रोगों से बचाता है बीज शोधन
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सहारनपुर। कई लाइलाज रोगों से धान की फसल को बचाने में बीज शोधन बेहद कारगर साबित हो रहा है। इससे न सिर्फ बीज का जमाव अच्छा होता है, बल्कि उत्पादन में भी 20 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी होती है। साथ ही कीटनाशकों का प्रयोग कम होने से फसल की लागत भी घटती है।
जनपद में किसान धान की नर्सरी तैयार करने में जुटे हुए हैं। इसके चलते कृषि विभाग से लेकर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक तक किसानों को धान की नर्सरी तैयार करने से पहले बीज शोधन करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि बीज शोधन करने से धान की फसल में कई रोगों के लगने की आशंका कम हो जाती है। इनमें बासमती धान में लगने वाला बकानी रोग, गर्दन तोड और जीवाणु झुलसा आदि रोग शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि बीज शोधन करने से बीज जनित रोग के कारकों पर अंकुश लग जाता है। जो बीज के अंकुरण से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। फसल के स्वस्थ रहने से उत्पादन भी बढ़ता है। साथ ही रोगों पर नियंत्रण के लिए प्रयोग कीटनाशकों का खर्च भी बचता है।
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किसान ऐसे करें बीज शोधन
डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि एक बड़े टब में 500 ग्राम नमक पानी में घोल लें और उसमें दो- दो किलो करके दस किलो धान का बीज डाल दें। इससे रोग ग्रसित बीज पानी में तैर जाएगा। रोगग्रस्त बीज को बाहर निकाल दें। इसके बाद बीज को दो से तीन बार साफ पानी से धोकर साफ कर लें। इसके बाद इस बीज को दस ग्राम कार्बेडाजियम और एक ग्राम स्ट्रोप्टोसाइक्लीन मिले पानी के घोल में 24 घंटे के लिए डाल दें। इसके बाद जूट के बोरों से ढक दें। इसके बाद इसको नर्सरी में डाल दें।
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जनपद में किसान धान की नर्सरी तैयार करने में जुटे हुए हैं। इसके चलते कृषि विभाग से लेकर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक तक किसानों को धान की नर्सरी तैयार करने से पहले बीज शोधन करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि बीज शोधन करने से धान की फसल में कई रोगों के लगने की आशंका कम हो जाती है। इनमें बासमती धान में लगने वाला बकानी रोग, गर्दन तोड और जीवाणु झुलसा आदि रोग शामिल हैं।
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उन्होंने बताया कि बीज शोधन करने से बीज जनित रोग के कारकों पर अंकुश लग जाता है। जो बीज के अंकुरण से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। फसल के स्वस्थ रहने से उत्पादन भी बढ़ता है। साथ ही रोगों पर नियंत्रण के लिए प्रयोग कीटनाशकों का खर्च भी बचता है।
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किसान ऐसे करें बीज शोधन
डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि एक बड़े टब में 500 ग्राम नमक पानी में घोल लें और उसमें दो- दो किलो करके दस किलो धान का बीज डाल दें। इससे रोग ग्रसित बीज पानी में तैर जाएगा। रोगग्रस्त बीज को बाहर निकाल दें। इसके बाद बीज को दो से तीन बार साफ पानी से धोकर साफ कर लें। इसके बाद इस बीज को दस ग्राम कार्बेडाजियम और एक ग्राम स्ट्रोप्टोसाइक्लीन मिले पानी के घोल में 24 घंटे के लिए डाल दें। इसके बाद जूट के बोरों से ढक दें। इसके बाद इसको नर्सरी में डाल दें।