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Saharanpur: अवैध रूप से भारत में घुसे दो बांग्लादेशी, लेना चाह रहे थे नागरिकता, कोर्ट ने दी ये सजा

Wed, 23 Jul 2025 07:31 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Wed, 23 Jul 2025 07:31 PM IST
सार

Court News: हबीबुल्लाह मिस्बाह और अहमदुल्लाह सात साल तक देवबंद में रहे, इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने दोनों को सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। 

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Saharanpur: Two Bangladeshis entered India illegally, wanted to get citizenship, court gave this punishment
कोर्ट, सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

देवबंद कस्बे में अवैध रूप से रह रहे दो बांग्लादेशी नागरिकों को अदालत ने सात-सात वर्ष की सजा सुनाई है। दोषी हबीबुल्लाह मिस्बाह उर्फ नाजिर पर 70 हजार, जबकि अहमदुल्लाह उर्फ अब्दुल अवल पर 60 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
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देवबंद पुलिस और एटीएस को दो संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की तलाश थी। इन दोनों बांग्लादेशियों के तार भोपाल में गिरफ्तार हुए शहादत हुसैन की पत्नी को रुपये उपलब्ध कराने से जुड़े थे। सूचना पर देवबंद पुलिस और एटीएम दोनों की तलाश कर रही थी। 
 
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एटीएस को पता चला कि दोनों संदिग्ध देवबंद की चौकी क्षेत्र खानकाह में रहते हैं। 19 जुलाई 2023 को देवबंद हाईवे के पिलर नंबर-34 से दो संदिग्ध हबीबुल्लाह मिस्बाह उर्फ नाजिर और अहमदुल्लाह उर्फ अब्दुल अवल को पकड़ा। पूछताछ में सामने आया कि दोनों बांग्लादेश के रहने वाले हैं, जो यहां पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे अवैध रूप से रह रहे थे। 
 
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पुलिस ने दोनों के पास से बांग्लादेश की आइडी भी बरामद की। ये लोग फर्जी कागजात के जरिए भारतीय नागरिकता लेने की कोशिश कर रहे थे। विवेचना के बाद मामले को अदालत में दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई अपर सिविल जज अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवबंद की अदालत में जारी थी। 
 

अदालत ने पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद दोनों दोषियों को सजा सुनाई है। अदालत में मामले को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने नौ गवाही कराई। मामले में 100 से अधिक तारीख लगीं। अदालत ने फैसला दो वर्ष के अंदर सुनाया। मामले की पैरवी अभियोजन अधिकारी एसीजेएम मनोज कुमार कर रहे थे।
 

पूछताछ में शहादत हुसैन से कबूले संबंध
दोषी अहमदुल्लाह उर्फ अब्दुल अवल ने पुछताछ में कबूला कि वह शहादत हुसैन को बहुत अच्छी तरह से जानता है। उसके साथ कुछ समय मस्जिद में भी रहा। बताया कि शहादत हुसैन के भाई ने बांग्लादेश से रुपये भेजे थे, जो शहादत हुसैन की पत्नी को दे दिए थे। हबीबुल्लाह मिस्बाह उर्फ नाजिर और अहमदुल्लाह उर्फ अब्दुल अवल पकड़े जाने से छह वर्ष पहले 2017 से देवबंद में रह रहे थे।

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