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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Saharanpur: Retired RPF Sub-Inspector Sentenced to 10 Years in Rape Case, Fined ₹1 Lakh

UP: दुष्कर्म के मामले में आरपीएफ के रिटायर्ड एसआई को 10 साल की सजा, एक लाख रुपये का जुर्माना

Sat, 25 Jul 2026 05:50 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 25 Jul 2026 05:50 PM IST
सार

सहारनपुर में दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरपीएफ के रिटायर्ड एसआई हरपाल सिंह को 10 साल की सजा सुनाई। अदालत ने एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया, जिसमें से 90 फीसदी राशि पीड़िता को दी जाएगी।

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Saharanpur: Retired RPF Sub-Inspector Sentenced to 10 Years in Rape Case, Fined ₹1 Lakh
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सहारनपुर जनपद में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरपीएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात रहे हरपाल सिंह को दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया है। अदालत ने दोषी हरपाल सिंह को दस वर्ष की सजा और एक लाख रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। घटना की अवधि के दौरान दोषी सहारनपुर में ही तैनात था।

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पीड़िता ने थाना सदर बाजार में तहरीर दी थी। बताया कि 2015 में उसकी वर्ष मुलाकात हरपाल सिंह से हुई थी। उसने बताया कि कि उसे घर में खाना बनाने एवं घरेलू कार्यों के लिए कामवाली की जरूरत थी। पीड़िता ने हरपाल सिंह के घर पर काम करना शुरू कर दिया। कुछ दिन बाद हरपाल सिंह ने उस पर गलत नजर डालनी शुरू कर दी।
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आरोप लगाया कि शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म करने लगा। इसका विरोध किया तो हरपाल सिंह ने 25 जनवरी 2017 को मंदिर में जाकर बिना वैवाहिक रस्मों के शादी कर ली। कहा कि कुछ दिनों बाद ऑफिस में जाकर रजिस्टर्ड शादी कर लूंगा। इसके बाद जब भी हरपाल से शादी को रजिस्टर्ड करने के लिए कहती तो वह बात को टाल देता।

जब उसने गर्भवती होने की बात बताई तो आरोप लगाया कि उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया। साथ ही वीडियो आदि को वायरल करने की धमकी भी दी। इसके बाद वह हरिद्वार में अपनी जान पहचान वालों के यहां रहने लगी। उसने एक बेटे को भी जन्म दिया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर 17 अगस्त 2019 को प्राथमिकी दर्ज की। विवेचना के बाद मामले को अदालत में दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक प्रथम की अदालत में जारी रही।

डीएनए रिपोर्ट सहित अभियोजन पक्ष ने चार गवाह किए पेश
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मामले को झूठा बताया। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान चार गवाह पेश किए। साथ ही बेटे के डीएनए रिपोर्ट भी अदालत में दाखिल की।

एडीजीसी सतीश सैनी ने बताया कि अदालत ने पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और वैज्ञानिक तथ्यों को देखने के बाद दोषी को सजा सुनाई है। अदालत द्वारा लगाए गए एक लाख रुपये के अर्थदंड में से पीड़िता को 90 फीसदी राशि दी जाएगी। अन्य राशि राजकीय कोष में जमा होगी। अर्थदंड जमा न करने पर दोषी को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

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