UP: खनन माफिया हाजी इकबाल को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, याचिका खारिज, जानें पूरा मामला
खनन माफिया हाजी इकबाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। गिरफ्तारी पर रोक लगाने को लेकर दायर की गई याचिका खारिज कर दी गई है।
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सहारनपुर के पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल को उच्चतम न्यायालय से कोई राहत नहीं मिल सकी। उच्चतम न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक आदि को लेकर दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया।
पूर्व एमएलसी मोहम्मद इकबाल द्वारा उच्चतम न्यायालय में अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से विगत दिनों याचिका दायर कर अनुच्छेद 32 के अंतर्गत परमादेश के तहत राज्य सरकार को निर्देश देने की प्रार्थना की गई थी। जिसे उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया है। ग्लोकल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर मोहम्मद इकबाल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर प्रार्थना की गई कि उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया जाए कि उसे उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित ना किया जाए और निर्धारित प्रक्रिया के अलावा अन्य तरीके से गिरफ्तार न किया जाए।
राज्य सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि याचिकाकर्ता व उसके रिश्तेदारों के परिवार को परेशान न किया जाए और यह भी निर्देश दिया जाए कि याचिकाकर्ता को झूठी मुठभेड़ में न मारा जाए और ग्लोकल यूनिवर्सिटी के कुलपति के रूप में काम करने की अनुमति दी जाए। इस याचिका पर 31 मई 2022 को उच्चतम न्यायालय के दो सदस्य कोरम न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी एवं न्यायमूर्ति बीवी नागरथन ने सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसी अस्पष्ट बातों पर विचार करने के लिए न्यायालय इच्छुक नहीं है, याचिका खारिज की जाती है।
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हाईकोर्ट से गैंगस्टर एक्ट के मामले में मिली हुई है दो माह की राहत
पूर्व एमएलसी खनन माफिया हाजी इकबाल एसोसिएट की एसएसपी आकाश तोमर द्वारा एसआईटी से जांच कराई जा रही है। पुलिस हाजी इकबाल और उनके चारो बेटों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई कर चुकी है। हाजी इकबाल के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर भी जारी हो चुका है। पुलिस उनके दो बेटों अलीशान और जावेद के अलावा उनके नौकर नसीम को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस अब हाजी इकबाल और उनके भाई महमूद अली और बाकी दोनों बेटों की तलाश में लगी है।
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गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे के जरिए पुलिस प्रशासन हाजी इकबाल की 128 करोड़ की 174 बेनामी संपत्तियां जब्त करने की कार्रवाई कर चुका है। हालांकि गैंगस्टर एक्ट के इसी मुकदमे में हाईकोर्ट इलाहाबाद ने दो माह तक हाजी इकबाल और उनके बेटों के खिलाफ दंडनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा रही है।