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खादर में फिर शुरू हुआ बुखार का कहर
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Tue, 25 Aug 2015 11:50 PM IST
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सहारनपुर। जिले के गंगोह और नकुड़ के खादर क्षेत्र में एक बार फिर बुखार का कहर शुरू हो गया है। पिछले सालों की तरह इस वर्ष भी अब इन क्षेत्रों में बुखार से मरीजों की मौतों का सिलसिला शुरू हो गया है।
इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। विभाग की टीमें अब बुखार के मरीजों का सत्यापन करने में जुटी हैं। हैरानी की बात यह है कि पिछले कई साल भी इसी मौसम में बुखार ने इन क्षेत्रों में कहर बरपाया था। इसके बाद जिले के अन्य क्षेत्रों में इसका प्रकोप फैल गया।
जिले में हर साल बुखार के कहर को लेकर सर्वे और अध्ययन करने वाली मलेरिया रिसर्च सेंटर और राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान के विशेषज्ञों ने दावा किया था कि मलेरिया और डेंगू के रूप में बुखार के साथ ही खादर क्षेत्र में यमुना और आसपास के अन्य दूषित पानी के साथ पहुंचने वाले वायरस के हमलों से इन क्षेत्रों में अधिक मौतें होती हैं।
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खास बात यह भी है कि रक्त की कम मात्रा और कम प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के लिए यह बुखार अधिक खतरनाक साबित होता है।
एनजीटी ने भी प्रदूषण को माना बीमारियों का बड़ा कारण
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी माना है कि यमुना और आसपास की सहायक नदियों के प्रदूषित होने के कारण मलेरिया, डेंगू से लेकर कैंसर और चर्म से जुड़ी बीमारियां भी बड़े स्तर पर फैल रही हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग, जल निगम और सिंचाई विभाग के सर्वे में यमुना किनारे बसे 29 से अधिक गांवों के पानी को प्रदूषित और बीमारियां फैलाने वाला बताया गया था।
इन ब्लॉकों में शुरू होगा बुखार के मरीजों का सर्वे
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सईद और जिला मलेरिया अधिकारी शिवांका गौड़ का कहना है कि बुखार के मामले में संवेदनशील माने जाने वाले गंगोह, नकुड़, देवबंद, सरसावा और नागल ब्लॉक के गांवों में बुखार के सर्वे में अधिक टीमें सक्रिय रहेंगी। बुखार के संदिग्ध मरीजों में मलेरिया, डेंगू या वायरल की जांच के लिए उनके रक्त के नमूनों की जांच होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्प्रे करवाया जा रहा है।
बुखार प्रभावित गांवों में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
गंगोह। जानलेवा बुखार ने सीएचसी के अति संवेदनशील गांव कुंडाकलां सहित पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले रखा है। बुखार तीन दिनों में एक छात्रा और दो बच्चों सहित 6 लोगों की जान ले चुका है। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मंगलवार को जिला मलेरिया अधिकारी के नेतृत्व में जिले से आई टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और स्लाईडें बर्नाइं। इसके अलावा सीएचसी से भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें रवाना की गई हैं।
बता दें कि खादर क्षेत्र के गांव कुंडाकलां में दो मासूमों सहित चार और जेहरा में एक युवक के अलावा गांव जंधेड़ा में एक छात्रा की बुखार के चलते मौत हो गई थी। नगर और देहात में मलेरिया वाईवेक्स के मरीजों की भरमार है। वहीं जानलेवा मलेरिया फेलसीफेरम के भी दो मामलों की गांव कुंडाखुर्द और बुढ़नपुर में पुष्टि हो चुकी है।
इसे गंभीरता से लेते हुए मंगलवार को सीएमओ सईद मोहम्मद के निर्देश पर जिला मलेरिया अधिकारी शिवांगा गौड़ ने अपनी टीम के साथ गांव कुंडाकलां पहुंचकर मृतकों के परिजनों से बात की और जानकारी ली। उन्होंने परिजनों और पड़ोस के बुखार पीड़ित 22 लोगों की स्लाइडें तैयार करवाई। इतना ही नहीं मस्जिद से बाकायदा ऐलान कराकर बुखार पीड़ितों को बुलवाया गया।
उन्होंने ग्राम प्रधान राव भोलर को गांव में विशेष सफाई अभियान चलवाने के निर्देश देते हुए ग्रामीणों से भी अपने आसपास जलभराव न होने देने और सफाई रखने की अपील की। सीएचसी प्रभारी डा. अनवर अंसारी को गांव में एंटी लार्वा और एंटी मलेरिया दवाई का छिड़काव कराने के निर्देश दिये। इसके अलावा सीएचसी से भी बुखार प्रभावित गांवों में विशेष टीमें भेजकर स्लाइडें तैयार कराई गई। कुंडाकलां के अलावा टीमों ने लखनौती और जेहरा पहुंची। वहां भी बुखार पीड़ितों की स्लाइडें बनाई गई।
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इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। विभाग की टीमें अब बुखार के मरीजों का सत्यापन करने में जुटी हैं। हैरानी की बात यह है कि पिछले कई साल भी इसी मौसम में बुखार ने इन क्षेत्रों में कहर बरपाया था। इसके बाद जिले के अन्य क्षेत्रों में इसका प्रकोप फैल गया।
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जिले में हर साल बुखार के कहर को लेकर सर्वे और अध्ययन करने वाली मलेरिया रिसर्च सेंटर और राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान के विशेषज्ञों ने दावा किया था कि मलेरिया और डेंगू के रूप में बुखार के साथ ही खादर क्षेत्र में यमुना और आसपास के अन्य दूषित पानी के साथ पहुंचने वाले वायरस के हमलों से इन क्षेत्रों में अधिक मौतें होती हैं।
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खास बात यह भी है कि रक्त की कम मात्रा और कम प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के लिए यह बुखार अधिक खतरनाक साबित होता है।
एनजीटी ने भी प्रदूषण को माना बीमारियों का बड़ा कारण
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी माना है कि यमुना और आसपास की सहायक नदियों के प्रदूषित होने के कारण मलेरिया, डेंगू से लेकर कैंसर और चर्म से जुड़ी बीमारियां भी बड़े स्तर पर फैल रही हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग, जल निगम और सिंचाई विभाग के सर्वे में यमुना किनारे बसे 29 से अधिक गांवों के पानी को प्रदूषित और बीमारियां फैलाने वाला बताया गया था।
इन ब्लॉकों में शुरू होगा बुखार के मरीजों का सर्वे
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सईद और जिला मलेरिया अधिकारी शिवांका गौड़ का कहना है कि बुखार के मामले में संवेदनशील माने जाने वाले गंगोह, नकुड़, देवबंद, सरसावा और नागल ब्लॉक के गांवों में बुखार के सर्वे में अधिक टीमें सक्रिय रहेंगी। बुखार के संदिग्ध मरीजों में मलेरिया, डेंगू या वायरल की जांच के लिए उनके रक्त के नमूनों की जांच होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्प्रे करवाया जा रहा है।
बुखार प्रभावित गांवों में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
गंगोह। जानलेवा बुखार ने सीएचसी के अति संवेदनशील गांव कुंडाकलां सहित पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले रखा है। बुखार तीन दिनों में एक छात्रा और दो बच्चों सहित 6 लोगों की जान ले चुका है। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मंगलवार को जिला मलेरिया अधिकारी के नेतृत्व में जिले से आई टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और स्लाईडें बर्नाइं। इसके अलावा सीएचसी से भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें रवाना की गई हैं।
बता दें कि खादर क्षेत्र के गांव कुंडाकलां में दो मासूमों सहित चार और जेहरा में एक युवक के अलावा गांव जंधेड़ा में एक छात्रा की बुखार के चलते मौत हो गई थी। नगर और देहात में मलेरिया वाईवेक्स के मरीजों की भरमार है। वहीं जानलेवा मलेरिया फेलसीफेरम के भी दो मामलों की गांव कुंडाखुर्द और बुढ़नपुर में पुष्टि हो चुकी है।
इसे गंभीरता से लेते हुए मंगलवार को सीएमओ सईद मोहम्मद के निर्देश पर जिला मलेरिया अधिकारी शिवांगा गौड़ ने अपनी टीम के साथ गांव कुंडाकलां पहुंचकर मृतकों के परिजनों से बात की और जानकारी ली। उन्होंने परिजनों और पड़ोस के बुखार पीड़ित 22 लोगों की स्लाइडें तैयार करवाई। इतना ही नहीं मस्जिद से बाकायदा ऐलान कराकर बुखार पीड़ितों को बुलवाया गया।
उन्होंने ग्राम प्रधान राव भोलर को गांव में विशेष सफाई अभियान चलवाने के निर्देश देते हुए ग्रामीणों से भी अपने आसपास जलभराव न होने देने और सफाई रखने की अपील की। सीएचसी प्रभारी डा. अनवर अंसारी को गांव में एंटी लार्वा और एंटी मलेरिया दवाई का छिड़काव कराने के निर्देश दिये। इसके अलावा सीएचसी से भी बुखार प्रभावित गांवों में विशेष टीमें भेजकर स्लाइडें तैयार कराई गई। कुंडाकलां के अलावा टीमों ने लखनौती और जेहरा पहुंची। वहां भी बुखार पीड़ितों की स्लाइडें बनाई गई।