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Saharanpur: मिलावटी शराब बेचने में महिला समेत पांच को उम्रकैद, कोरोना काल में खुलेआम कर रहे थे बिक्री

Wed, 05 Aug 2026 12:29 AM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: Mohd Mustakim Updated Wed, 05 Aug 2026 12:29 AM IST
सार

जेल चुंगी निवासी भोली उर्फ बुआ, उसके साथी बादल, सूरज, सचिन, डब्बू जैसवार कोरोना काल में मिलावटी शराब बेचते पकड़े गए थे। शराब में यूरिया भी मिला रखा था, जो कि जानलेवा होता है। कोर्ट ने तीनों को सख्त सजा से दंडित किया। 

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Saharanpur: Five people, including a woman, sentenced to life imprisonment for selling adulterated liquor
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या 15 मिर्जा जीनत की अदालत ने मिलावटी शराब बेचने के मामले में एक महिला समेत पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने जेल चुंगी निवासी महिला भोली, उसके साथी बादल, सूरज, सचिन, डब्बू जैसवार पर 52-52 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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वादी मुकदमा उपनिरीक्षक सतेंद्र कुमार शर्मा ने थाना जनकपुरी में तहरीर दी थी। बताया कि मुखबिर ने 13 मई 2021 को सूचना दी कि आशीर्वाद डेयरी के पास टिनशेड में कुछ लोग मिलावटी शराब बेच रहे हैं। पुलिस ने दबिश देकर महिला को पकड़ा, जबकि उसके साथी भाग गए। महिला ने पूछताछ में अपना नाम भोली निवासी जेल चुंगी बताया। पुलिस ने मौके से सात पेटी से देसी शराब के 315 पव्वे, एक पेटी से देसी शराब के तीस पव्वे सहित कुल 445 पव्वे बरामद किए। सभी पर मिस्टर इंडिया लिखा था। 
 
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एक बाल्टी, जिसमें तीन लीटर अमिश्रित शराब व एक प्लास्टिक का कीप भी बरामद किया था। बाद में पुलिस ने भोली के साथी व पड़ोसी बादल, सूरज, सचिन, डब्बू जैसवार को भी गिरफ्तार किया। सभी जेल चुंगी के रहने वाले हैं और मिलावटी शराब बेचते थे। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 272, 273, उत्तर प्रदेश उत्पाद शुल्क/आबकारी अधिनियम की धारा 60(1) के तहत दोषी करार दिया है।
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शराब की तीव्रता बढ़ाने के लिए मिलाते थे यूरिया
भोली को सभी बुआ बुलाते थे। शराब की तीव्रता बढ़ाने के लिए देसी शराब में यूरिया मिलाते थे। कोरोना काल के दौरान शराब की मांग अधिक थी इसलिए इसकी आपूर्ति के लिए शराब में मिलावट करते थे।

चार साल तीन माह और 15 दिन में फैसला
विवेचना के बाद मामले को अदालत में दाखिल किया गया। तभी से अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या 15 की अदालत में मामला विचाराधीन था। सहायक शासकीय अधिवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि सुनवाई के दौरान आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया लेकिन अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों को देखते हुए दोषी करार दिया। अदालत ने चार वर्ष तीन माह और 15 दिनों में अपना निर्णय दिया है।

2017 में आबकारी अधिनियम में हुआ था संशोधन
शासन ने 2017 में आबकारी अधिनियम में संशोधन कर नियमों को और सख्त किया है। मिलावटी शराब बनाने और बेचने पर आबकारी अधिनियम की धाराओं में बदलाव किया गया था। संशोधित नए कानून के तहत अमिश्रित शराब बेचने पर आजीवन कारावास और मृत्यु या स्थायी अपंगता होने पर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।

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