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बंगाल के नए मुख्यमंत्री सबके लिए शासन की संवैधानिक शपथ का पालन करें: मदनी
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मौलाना महमूद मदनी।
संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी राज्यपाल और बंगाल की जनता के समक्ष ली गई अपनी सांविधानिक शपथ की भावना और शब्दों दोनों का पूरी ईमानदारी के साथ पालन करें।
रविवार को जारी बयान में मौलाना महमूद मदनी ने याद दिलाया कि शपथ ग्रहण के समय उन्होंने ईश्वर को साक्षी मानकर यह प्रतिज्ञा की है कि मैं संविधान और कानून के अनुसार बिना किसी भय या पक्षपात बिना किसी प्रेम या द्वेष के सभी वर्गों के लोगों के साथ न्याय करूंगा। मदनी ने कहा कि यह सांविधानिक शपथ केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि अपने पद के प्रति कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी का सार्वजनिक स्वीकार है। इस शपथ के बिना कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं बन सकता और न ही इसके विपरीत आचरण करते हुए उस पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार रखता है।
उन्होंने कहा कि पूर्व के बयानों में सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि वे सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करेंगे। इस प्रकार के बयान भारत के धर्म निरपेक्ष ताने-बाने, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के विरुद्ध हैं। मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि सत्ता किसी एक धर्म या राजनीतिक समूह की जागीर नहीं बल्कि पूरी जनता की अमानत है, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई तथा सभी वर्ग शामिल हैं।
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देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी राज्यपाल और बंगाल की जनता के समक्ष ली गई अपनी सांविधानिक शपथ की भावना और शब्दों दोनों का पूरी ईमानदारी के साथ पालन करें।
रविवार को जारी बयान में मौलाना महमूद मदनी ने याद दिलाया कि शपथ ग्रहण के समय उन्होंने ईश्वर को साक्षी मानकर यह प्रतिज्ञा की है कि मैं संविधान और कानून के अनुसार बिना किसी भय या पक्षपात बिना किसी प्रेम या द्वेष के सभी वर्गों के लोगों के साथ न्याय करूंगा। मदनी ने कहा कि यह सांविधानिक शपथ केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि अपने पद के प्रति कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी का सार्वजनिक स्वीकार है। इस शपथ के बिना कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं बन सकता और न ही इसके विपरीत आचरण करते हुए उस पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार रखता है।
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उन्होंने कहा कि पूर्व के बयानों में सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि वे सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करेंगे। इस प्रकार के बयान भारत के धर्म निरपेक्ष ताने-बाने, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के विरुद्ध हैं। मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि सत्ता किसी एक धर्म या राजनीतिक समूह की जागीर नहीं बल्कि पूरी जनता की अमानत है, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई तथा सभी वर्ग शामिल हैं।
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