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जैव विविधता पार्क में आने लगे प्रवासी परिंदे
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जैव विविधता पार्क में पौधे पर बैठा टिड्ढा।
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। सर्दियों के मौसम के साथ ही गांव कोठरी बहलोलपुर स्थित जैव विविधता पार्क में प्रवासी परिंदों का आगमन शुरू हो गया है। सबसे खास बात यह है कि विश्व स्तर पर संकटग्रस्त इजिप्शन गिद्ध जिसे सफेद गिद्ध भी कहा जाता है यहां अच्छे से फल फूल रहा है। जटायु गिद्ध भी यहां 65 से अधिक संख्या में पनप रहे हैं, जिसे लेकर अधिकारी उत्साहित हैं। कुछ ही दिनों में करीब दस प्रजातियों के जीवों ने यहां डेरा डाला है।
परियोजना का शिलान्यास पांच नवंबर 2018 को तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभात कुमार, पद्मश्री अनिल जोशी, मुख्य वन संरक्षक मंडलायुक्त सहारनपुर व डॉ. उमर सैफ ने किया था। इसके बाद ग्राम प्रधान, सचिव और ग्रामीणों के सहयोग से इस 120 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित जैव विविधता पार्क को विकसित किया गया। छह माह पहले इसमें करीब 300 प्रजातियों के जीव और तितलियां पनप रही थीं, साथ ही पौधों की शाखाओं पर वास करने वाले कीड़ों को संरक्षित किया गया है। अब मौसम में हल्की ठंडक आने की वजह से प्रवासी परिंदों और अन्य जीवों ने यहां आना शुरू कर दिया है।
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. उमर सैफ ने बताया कि हिमालय से गंगा के दोआब में आने वाले प्रवासी पक्षी शिवालिक की पहाड़ियों से होकर यहां पहुंच रहे हैं। अभी तक मालाबार हॉर्नबिल, चार रंगों की वेजटेल और बड़ी संख्या में स्टर्लिंग प्रवासी पक्षी आ रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि सफेद गिद्ध भी यहां पहुंच रहे हैं, जो उत्तर भारत के साथ ही पश्चिमी अफ्रीका से लेकर पाकिस्तान और नेपाल में पाए जाते हैं। वैश्विक स्तर पर इनकी संख्या में गिरावट आई है, जिसकी वजह से इनको संकटग्रस्त कहा गया है। इनके अलावा पार्क में दो तरह के जुगनू भी हैं। (संवाद)
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जिला जलशक्ति ज्ञान केंद्र की स्थापना होगी
जैव विविधता पार्क में मुख्य विकास अधिकारी की पहल पर जिला जलशक्ति ज्ञान केंद्र की स्थापना की जा रही है, जिससे जैव विविधता के साथ ही जल संरक्षण को नागरिक करीब से देख और समझ सकें। डॉ. सैफ ने बताया कि सेंटर फॉर वाटर पीस संस्था की मदद से पार्क में तितली प्रजनन इकाई की स्थापना की गई है और तितलियों के होस्ट व नेक्टर प्लांट लैंडस्केप में लगाए गए हैं।
तितलियों के 2,500 अंडे संरक्षित किए
फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा प्रशिक्षित बटरफ्लाई संरक्षिका सारा हनीफ ने बताया गया कि वर्षा काल में उन्होंने तितलियों के करीब 2,500 अंडे संरक्षित किए हैं। इनमें से करीब 1000 से ज्यादा मोनार्क, मोर्मन प्लेन टाइगर, कॉमेन लाइन, येलो पेंसी, जेबरा, व्हाइट कैबेज और ब्लू टाइगर आदि तितलियां निकाली, जिन्हें पार्क में छोड़ा गया है। तितलियों को रस के लिए निर्गुंडी नामक औषधीय पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा शहद से तैयार मकरंद भी उन्हें परोसा जाता है।
जैव विविधता पार्क की स्थापना जिस मकसद के लिए की गई थी वह मकसद पूरा होता नजर आ रहा है। सर्दियां शुरू होते ही यहां प्रवासी पक्षी और अन्य जीव आना शुरू हो गए हैं। खास बात है दुनिया में संकटग्रस्त गिद्ध और जटायु गिद्ध भी यहां पनप रहे हैं, जो खासी संख्या में हैं। इसके अलावा तितलियों की बड़ी संख्या यहां हो चुकी है।
डॉ. उमर सैफ, पार्क के आजीवन संरक्षक/पर्यावरण विशेषज्ञ।
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परियोजना का शिलान्यास पांच नवंबर 2018 को तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभात कुमार, पद्मश्री अनिल जोशी, मुख्य वन संरक्षक मंडलायुक्त सहारनपुर व डॉ. उमर सैफ ने किया था। इसके बाद ग्राम प्रधान, सचिव और ग्रामीणों के सहयोग से इस 120 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित जैव विविधता पार्क को विकसित किया गया। छह माह पहले इसमें करीब 300 प्रजातियों के जीव और तितलियां पनप रही थीं, साथ ही पौधों की शाखाओं पर वास करने वाले कीड़ों को संरक्षित किया गया है। अब मौसम में हल्की ठंडक आने की वजह से प्रवासी परिंदों और अन्य जीवों ने यहां आना शुरू कर दिया है।
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पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. उमर सैफ ने बताया कि हिमालय से गंगा के दोआब में आने वाले प्रवासी पक्षी शिवालिक की पहाड़ियों से होकर यहां पहुंच रहे हैं। अभी तक मालाबार हॉर्नबिल, चार रंगों की वेजटेल और बड़ी संख्या में स्टर्लिंग प्रवासी पक्षी आ रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि सफेद गिद्ध भी यहां पहुंच रहे हैं, जो उत्तर भारत के साथ ही पश्चिमी अफ्रीका से लेकर पाकिस्तान और नेपाल में पाए जाते हैं। वैश्विक स्तर पर इनकी संख्या में गिरावट आई है, जिसकी वजह से इनको संकटग्रस्त कहा गया है। इनके अलावा पार्क में दो तरह के जुगनू भी हैं। (संवाद)
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जिला जलशक्ति ज्ञान केंद्र की स्थापना होगी
जैव विविधता पार्क में मुख्य विकास अधिकारी की पहल पर जिला जलशक्ति ज्ञान केंद्र की स्थापना की जा रही है, जिससे जैव विविधता के साथ ही जल संरक्षण को नागरिक करीब से देख और समझ सकें। डॉ. सैफ ने बताया कि सेंटर फॉर वाटर पीस संस्था की मदद से पार्क में तितली प्रजनन इकाई की स्थापना की गई है और तितलियों के होस्ट व नेक्टर प्लांट लैंडस्केप में लगाए गए हैं।
तितलियों के 2,500 अंडे संरक्षित किए
फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा प्रशिक्षित बटरफ्लाई संरक्षिका सारा हनीफ ने बताया गया कि वर्षा काल में उन्होंने तितलियों के करीब 2,500 अंडे संरक्षित किए हैं। इनमें से करीब 1000 से ज्यादा मोनार्क, मोर्मन प्लेन टाइगर, कॉमेन लाइन, येलो पेंसी, जेबरा, व्हाइट कैबेज और ब्लू टाइगर आदि तितलियां निकाली, जिन्हें पार्क में छोड़ा गया है। तितलियों को रस के लिए निर्गुंडी नामक औषधीय पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा शहद से तैयार मकरंद भी उन्हें परोसा जाता है।
जैव विविधता पार्क की स्थापना जिस मकसद के लिए की गई थी वह मकसद पूरा होता नजर आ रहा है। सर्दियां शुरू होते ही यहां प्रवासी पक्षी और अन्य जीव आना शुरू हो गए हैं। खास बात है दुनिया में संकटग्रस्त गिद्ध और जटायु गिद्ध भी यहां पनप रहे हैं, जो खासी संख्या में हैं। इसके अलावा तितलियों की बड़ी संख्या यहां हो चुकी है।
डॉ. उमर सैफ, पार्क के आजीवन संरक्षक/पर्यावरण विशेषज्ञ।

जैव विविधता पार्क में पक्षी।- फोटो : SAHARANPUR

जैव विविधता पार्क में सफेद गिद्घ।- फोटो : SAHARANPUR

जैव विविधता पार्क में जाल में बैठी मकड़ी।- फोटो : SAHARANPUR