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कोरोना संक्रमण के चलते टली एमबीबीएस फाइनल ईयर की परीक्षा
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कोरोना संक्रमण के चलते किया था निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
सरसावा। राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के फाइनल ईयर की परीक्षा कोरोना संक्रमण काल के कारण टल गई है। परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा नहीं होने से चिकित्सक बनने का सपना संजोय छात्र-छात्राओं को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी में एमबीबीएस की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं टलने के कारण विद्यार्थियों के लिए समस्या उत्पन्न हो गई है। दरअसल चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा कोरोना संक्रमण के चलते विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले सभी मेडिकल कॉलेजों की फाइनल ईयर की परीक्षा पर रोक लगा दी थी। अमूमन एमबीबीएस की अंतिम वर्ष की परीक्षा जनवरी में संपन्न हो जाती हैं तथा इसके उपरांत प्रैक्टिकल होते हैं। जिसके पश्चात मार्च तक रिजल्ट घोषित कर दिया जाता है। इसी आधार पर एमबीबीएस चिकित्सक या तो पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेकर अलग-अलग चिकित्सा विषयों में विशेषज्ञता हासिल करते हैं। वहीं, इंटर्नशिप कर चिकित्सक बनकर मरीजों की सेवा करते हैं।
इसका दूसरा पहलू ये है कि जनवरी में परीक्षाएं होने के बाद शिक्षण सत्र नियमित रूप से चलता रहता है। जबकि इस बार परीक्षाएं देर से होने के कारण शिक्षण सत्र भी गड़बड़ा जाएगा। साथ ही एमबीबीएस करने वाले विद्यार्थियों के लिए पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने में समस्याएं उत्पन्न हो जाएंगी और इंटर्नशिप आदि भी देर से आरंभ होगी। यदि समग्र रूप से देखें तो इसका स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना अवश्यंभावी है। ऐसे में चिकित्सा सेवा क्षेत्र में पहले से ही चिकित्सकों की भारी कमी है तो परीक्षा का लेट होना गंभीर विषय है।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने कहा कि उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति को परीक्षा के संबंध में पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव जैसी बड़ी प्रक्रिया संपन्न हो सकती है तो परीक्षा में देरी नहीं होनी चाहिए। इससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरसावा। राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के फाइनल ईयर की परीक्षा कोरोना संक्रमण काल के कारण टल गई है। परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा नहीं होने से चिकित्सक बनने का सपना संजोय छात्र-छात्राओं को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी में एमबीबीएस की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं टलने के कारण विद्यार्थियों के लिए समस्या उत्पन्न हो गई है। दरअसल चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा कोरोना संक्रमण के चलते विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले सभी मेडिकल कॉलेजों की फाइनल ईयर की परीक्षा पर रोक लगा दी थी। अमूमन एमबीबीएस की अंतिम वर्ष की परीक्षा जनवरी में संपन्न हो जाती हैं तथा इसके उपरांत प्रैक्टिकल होते हैं। जिसके पश्चात मार्च तक रिजल्ट घोषित कर दिया जाता है। इसी आधार पर एमबीबीएस चिकित्सक या तो पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेकर अलग-अलग चिकित्सा विषयों में विशेषज्ञता हासिल करते हैं। वहीं, इंटर्नशिप कर चिकित्सक बनकर मरीजों की सेवा करते हैं।
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इसका दूसरा पहलू ये है कि जनवरी में परीक्षाएं होने के बाद शिक्षण सत्र नियमित रूप से चलता रहता है। जबकि इस बार परीक्षाएं देर से होने के कारण शिक्षण सत्र भी गड़बड़ा जाएगा। साथ ही एमबीबीएस करने वाले विद्यार्थियों के लिए पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने में समस्याएं उत्पन्न हो जाएंगी और इंटर्नशिप आदि भी देर से आरंभ होगी। यदि समग्र रूप से देखें तो इसका स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना अवश्यंभावी है। ऐसे में चिकित्सा सेवा क्षेत्र में पहले से ही चिकित्सकों की भारी कमी है तो परीक्षा का लेट होना गंभीर विषय है।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने कहा कि उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति को परीक्षा के संबंध में पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव जैसी बड़ी प्रक्रिया संपन्न हो सकती है तो परीक्षा में देरी नहीं होनी चाहिए। इससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं।