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महात्मा गांधी ने 1929 में एसडी इंटर कॉलेज में की थी सभा

Wed, 02 Oct 2019 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Oct 2019 12:09 AM IST
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Mahatma Gandhi held a meeting at SD Inter College in 1929
गांधी पार्क में गांधी जी की प्रतिमा की सफाई करते कर्मी - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। आज दो अक्तूबर यानी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती है। महात्मा गांधी सहारनपुर वासियों के लिए इसलिए भी खास होने चाहिए, क्योंकि 1929 में उन्होंने सहारनपुर की धरती पर ना केवल कदम रखा था, बल्कि यहां चकराता रोड स्थित एसडी इंटर कॉलेज में सभा भी की थी।
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साहित्यकार कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर के सुपुत्र अखिलेश प्रभाकर बताते हैं कि गांधी जी के छह बड़े आंदोलन रहे हैं, जिनमें से एक था सविनय अवज्ञा आंदोलन। आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए महात्मा गांधी ने उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों का दौरा कर जन संपर्क किए। इसी कड़ी में वह 1929 में सहारनपुर आए थे वह संभवत: 26 जुलाई की तिथि थी। उन्होंने चकराता रोड स्थित कांशीराम हाई स्कूल एवं एसडी इंटर कॉलेज में सभा भी की थी। जब महात्मा गांधी सहारनपुर से मुजफ्फरनगर के लिए निकले तो साहित्यकार कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर ने उनके सचिव आचार्य कृपलानी से गांधी को देवबंद में भी रुककर जाने के लिए अनुरोध किया, मगर आचार्य कृपलानी ने प्रभाकर की बात नहीं मानी। प्रभाकर के काफी प्रयास करने के बाद गांधी देवबंद रुकने को राजी हुए और मंडी स्थल पर सभा भी की।
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सहारनपुर में ही मिला था बापू का नाम
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना के दौरान हरिद्वार सहारनपुर मंडल का हिस्सा हुआ करता था। विश्वविद्यालय की स्थापना स्वामी श्रद्घानंद ने थी। स्वामी की ओर से स्थापना पर महात्मा गांधी को बुलाया गया था। स्वामी श्रद्घानंद ने ही महात्मा गांधी को पहली बार बापू कहा था।
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गांधी पार्क की बदली सूरत, घूमने आ रहे लोग
सहारनपुर। शहर के बीचोबीच स्थित गांधी पार्क वर्तमान समय में लोगों के टहलने और गर्मी में थककर आरोप करने के लिए पहली पसंद बना हुआ है। जनमंच प्रेक्षागृह के ठीक सामने स्थित गांधी पार्क का क्षेत्रफल ज्यादा नहीं है, मगर नगर निगम द्वारा इसकी देखभाल जिस प्रकार से की जा रही है, उससे इसका सौंदर्य बढ़ा है। वर्तमान में गांधी पार्क में हरियाली बढ़ाने और उसे सुंदर बनाने पर काम हुआ है। बाग में घूमने के लिए आने वालों के लिए दस रुपये का शुल्क रखा गया है। वर्तमान समय में बड़ी संख्या में लोग कंपनी बाग में घूमने और आराम करने आते हैं। बाग में ओपन जिम भी बनाया। दो अक्तूबर के मद्देनजर मंगलवार को कंपनी बाग में साफ-सफाई की जा रही थी। पार्क के बीचोंबीच लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा की धुलाई चल रही थी।
मॉर्निंग वॉक के साथ पॉलीथिन एकत्र करेंगे शहरवासी
सहारनपुर। प्रतिबंधित पॉलीथिन के खिलाफ विशेष अभियान चलने जा रहा है। इसके तहत शहरवासी अब मॉर्निंग वॉक के साथ रास्ते में नजर आने वाली पॉलीथिन को उठाकर कूड़ेदान में रखेंगे। इसकी शुरूआत आज से हो रही है।
फिट इंडिया प्लॉगिंग रन अभियान के तहत दो अक्तूबर यानी आज नगर निगम के तमाम अधिकारी और सफाई कर्मचारी, स्वच्छता के लिए काम करने वाले सभी एनजीओ प्रात: सुबह साढ़े छह बजे कंपनी बाग के नवाबगंज चौक स्थित गेट पर जमा होंगे। यहां कंपनी बाग में मॉर्निंग वॉक के लिए आने वाले लोगों को पॉलीथिन के नुकसान समझाने के साथ ही मॉर्निंग वॉक के साथ रास्ते में कहीं भी पड़ी मिलने वाली पॉलीथिन को उठाकर नजदीकी कूड़ेदान में डालेंगे। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर हम सबका है और इसे साफ रखना भी हम सभी का दायित्व है।
पकड़ी गई पॉलीथिन और जुर्माना
जनपद में 50 माइक्रॉन से कम की पॉलीथिन प्रतिबंधित है। साथ ही प्लास्टिक की सिंगल यूज सामग्री को भी प्रतिबंधित किया गया है। नगर निगम का प्रवर्तन दल बीते करीब तीन माह से प्रतिबंधित पॉलीथिन और अन्य सामग्री के खिलाफ अभियान चला रहा है। नगर निगम एक अक्तूबर 2019 तक दुकानों पर छापेमारी कर 2008 किलोग्राम यानी 20 क्विंटल आठ किलोग्राम पॉलीथिन और अन्य प्रतिबंधित सामग्री जब्त कर चुका है। इसके अलावा 761400 रुपये जुर्माना वसूला गया है।
क्या है सिंगल यूज प्लास्टिक, जानकारी का अभाव
ऐसा प्लास्टिक जिसका इस्तेमाल सिर्फ एक बार करने के बाद उसे डस्टविन में फेंक दिया जाता है उसे सिंगल यूज प्लास्टिक कहते हैं। सिंगल यूज पॉलीथिन को लेकर आम आदमी को बहुत जानकारी नहीं है। डिस्पोजल प्लास्टिक भी इसी को कहा जाता है। हालांकि इसकी रिसाइक्लिंग की जा सकती है, मगर सहारनपुर जैसे छोटे शहर में रिसाइक्लिंग की व्यवस्था नहीं होने से यह या तो कचरे में फैला रहता है या फिर कूड़ा बीनने वालों की ओर से एकत्र करने के बाद कबाड़ियों को बेच दी जाती है। बेहट रोड पर इसका खासकर प्लास्टिक बोतलों का बड़े पैमाने पर कलेक्शन होता है, जहां से ट्रकों में लादकर रिसाइक्लिंग के लिए बाहर भेजा जाता है। प्लास्टिक बैग, प्लास्टिक की बोतलें, स्ट्रॉ, कप, प्लेट, फूड पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक, गिफ्ट रैपर्स और कॉफी की डिस्पोजेबल कप्स आदि इसमें शामिल हैं।

सिंगल यूज प्लास्टिक के नुकसान
जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण बिगड़ता पर्यावरण दुनिया के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता है। पर्यावरणविद डॉ. पीके शर्मा ने बताया कि प्लास्टिक से पैदा होने वाले प्रदूषण को रोकना और प्लास्टिक वेस्ट बड़ी समस्या बनकर उभरा है। यह मिट्टी में नहीं घुलता-मिलता है। इसलिए दुनिया भर के देश सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त करने जा रहे हैं। हिंदुस्तान में भी इसे सख्ती से रोकना होगा।

गांधी पार्क

गांधी पार्क- फोटो : SAHARANPUR

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