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जाट आंदोलन से सफर पर लगा ‘ब्रेक’
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 22 Feb 2016 11:25 PM IST
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हरियाणा में जाट आरक्षण के समर्थन में भड़की चिंगारी का असर जिले में रेल संचालन पर पड़ने से यात्रियों की मुश्किलें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। दूसरे दिन सोमवार को भी रेलवे स्टेशन पर सैकड़ों यात्री ट्रेनों की प्रतीक्षा में बेहाल रहे।
सहारनपुर-शामली रूट पर दोपहर दो बजे के बाद ही रूट कुछ सामान्य होना शुरू हुआ। इसके चलते इस रूट पर जाने वाले मुसाफिर प्लेटफार्म और ट्रैक पर भटकते रहे। रेलवे अफसरों की ओर से हालात सामान्य होने का दावा किए जाने के बावजूद चार ट्रेनें कैंसिल रहीं। उधर, कुछ ट्रेनों के कैंसिल होने की घोषणा के बावजूद अचानक पहुंचने के कारण यात्री ज्यादातर यात्री उनमें सफर ही नहीं कर पाए।
हरियाणा के जाट आरक्षण आंदोलन का असर रविवार से जिले में पड़ना शुरू हो गया था। पहले दिन पैसेंजर और एक्सप्रेस मिलाकर कुल 16 ट्रेनें कैंसिल थी। इनमें आंदोलन के संभावित असर को मानते हुए रेलवे की ओर से सोमवार को भी 12 ट्रेनों के कैंसिल रखने की संभावना जाहिर की गई थी। इसे देखते हुए बड़ी संख्या में यात्री स्टेशन पर आने की बजाय बसों से सफर करने निकल गए। इसके बावजूद यहां पहुंचे सैकड़ों यात्रियों को ट्रेनों के लिए भटकना पड़ा।
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रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक से लेकर दो तक सुबह दस से लेकर दो बजे तक बड़ी संख्या में यात्री गाड़ियों का इंतजार करते रहे। कुछ यात्रियों ने बताया कि कड़ी धूप में यहां खड़े हैं। पूछताछ कक्ष और रेलवे स्टेशन मास्टर के रूम से पता चला कि आज हालात सामान्य हो रहे हैं। ट्रेनें आ रही हैं।
इसी उम्मीद से वे ट्रेनों का इंतजार करते रहे। एक यात्री शमशाद ने बताया कि वह ट्रेन मिलने की उम्मीद में पहले प्लेटफार्म नंबर एक पर गया था। इसके बाद दो पर गया और फिर से एक पर आ रहा हूं। ट्रेनों की इस हालत से बेहाल नजर आया।
अरे...ये गाड़ी तो कैंसिल थी, कैसे आ गई
लाल गाड़ी के नाम से चर्चित पैसेंजर जब दोपहर में शामली से सहारनपुर पहुंची, तो काफी यात्री और जीआरपी के जवान तक भी हैरान रह गए। दो जीआरपी वाले बोले-अरे...ये गाड़ी तो कैंसिल थी। ये कैसे आ गई। यदि इस गाड़ी के आने का पता होता तो अन्य काफी यात्री भी सफर कर सकते थे।
ट्रेन बदली तब भी टेंशन में रहे मुसाफिर ः कुछ यात्रियों ने शामली रूट पर ट्रेनें न मिलने पर मेरठ के रूट से जाने के लिए ऋषिकेश पैसेंजर गाड़ी पकड़ी। हालांकि दूसरी गाड़ी बदलने पर भी उनकी टेंशन कम नहीं हुई। क्योंकि सामने से आ रही एक मालगाड़ी ने आधे घंटे से भी अधिक समय तक रूट ब्लॉक कर रखा था। इसके चलते अन्य प्लेटफार्म पर खड़ी मदुरई एक्सप्रेस भी दस मिनट की बजाय बीस मिनट तक स्टेशन पर ही खड़ी रही।
रेलवे को तो मालगाडियों की है फिक्र ः जाट आंदोलन के बाद से यात्री गाड़ियों के मेन रूट पर मालगाड़ियों का लोड बढ़ने से परेशान यात्री फिर से बोले कि रेलवे को तो मालगाड़ियों की फिक्र है। यात्रियों को ट्रेन मिले या न मिले। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
आंदोलन का तो पता नहीं, मगर अब राहत की उम्मीद
वरिष्ठ रेलवे स्टेशन अधीक्षक जवाहर सिंह ने बताया कि जाट आंदोलन का आगे क्या रहेगा। इस बारे में तो वह कुछ नहीं कह सकते हैं। हालांकि ऐसा लग रहा है कि अब रेलवे रूटों पर यातायात सामान्य की ओर आ रहा है। यात्रियों की मुश्किलें अब कम हो सकेंगी।
जाट आरक्षण की मांग संविधान के विपरीत
सहारनपुर। पिछड़ा समाज सत्ता मोर्चा की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष महावीर सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा में जाट आरक्षण की मांग संविधान विरोधी है। इस कारण ही सर्वोच्च न्यायालय ने जाटों को आरक्षण के दायरे से अलग किया है।
उन्होंने आरक्षण आंदोलन में हुए संपत्ति के नुकसान की कड़ी निंदा की। सोमवार को पंजाबी बाग स्थित जिला कार्यालय में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जाट आरक्षण आंदोलन में प्रदेश सरकार ने मूकदर्शक रहकर आरक्षण समर्थकों का समर्थन किया है।
ऐसे में वहां के मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण समर्थकों के अनैतिक और गैर कानूनी कार्यों का विरोध करके सैनी और गुर्जर समाज के लोगों ने मानवता का परिचय दिया है।
उन्होंने जाट आरक्षण के समर्थन करने वाले राजनीतिक दलों को पिछड़ा समाज विरोधी करार दिया। कहा कि यदि भाजपा और बसपा सुप्रीमो मायावती को जाटों को आरक्षण देने की इतनी ही चिंता है तो जाट समाज को पिछडे़ वर्ग की बजाए अनुसूचित जाति में शामिल करने की हिमायत करनी चाहिए।
जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश वर्मा, ऋषिपाल, अनिल कुमार गुर्जर ने भी विचार रखे। इस दौरान मोहम्मद आरिफ, प्रवेश कुमार, अश्वनी त्यागी, नरेंद्र, बलवीर सैनी, नंदू सैनी आदि रहे।
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सहारनपुर-शामली रूट पर दोपहर दो बजे के बाद ही रूट कुछ सामान्य होना शुरू हुआ। इसके चलते इस रूट पर जाने वाले मुसाफिर प्लेटफार्म और ट्रैक पर भटकते रहे। रेलवे अफसरों की ओर से हालात सामान्य होने का दावा किए जाने के बावजूद चार ट्रेनें कैंसिल रहीं। उधर, कुछ ट्रेनों के कैंसिल होने की घोषणा के बावजूद अचानक पहुंचने के कारण यात्री ज्यादातर यात्री उनमें सफर ही नहीं कर पाए।
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हरियाणा के जाट आरक्षण आंदोलन का असर रविवार से जिले में पड़ना शुरू हो गया था। पहले दिन पैसेंजर और एक्सप्रेस मिलाकर कुल 16 ट्रेनें कैंसिल थी। इनमें आंदोलन के संभावित असर को मानते हुए रेलवे की ओर से सोमवार को भी 12 ट्रेनों के कैंसिल रखने की संभावना जाहिर की गई थी। इसे देखते हुए बड़ी संख्या में यात्री स्टेशन पर आने की बजाय बसों से सफर करने निकल गए। इसके बावजूद यहां पहुंचे सैकड़ों यात्रियों को ट्रेनों के लिए भटकना पड़ा।
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रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक से लेकर दो तक सुबह दस से लेकर दो बजे तक बड़ी संख्या में यात्री गाड़ियों का इंतजार करते रहे। कुछ यात्रियों ने बताया कि कड़ी धूप में यहां खड़े हैं। पूछताछ कक्ष और रेलवे स्टेशन मास्टर के रूम से पता चला कि आज हालात सामान्य हो रहे हैं। ट्रेनें आ रही हैं।
इसी उम्मीद से वे ट्रेनों का इंतजार करते रहे। एक यात्री शमशाद ने बताया कि वह ट्रेन मिलने की उम्मीद में पहले प्लेटफार्म नंबर एक पर गया था। इसके बाद दो पर गया और फिर से एक पर आ रहा हूं। ट्रेनों की इस हालत से बेहाल नजर आया।
अरे...ये गाड़ी तो कैंसिल थी, कैसे आ गई
लाल गाड़ी के नाम से चर्चित पैसेंजर जब दोपहर में शामली से सहारनपुर पहुंची, तो काफी यात्री और जीआरपी के जवान तक भी हैरान रह गए। दो जीआरपी वाले बोले-अरे...ये गाड़ी तो कैंसिल थी। ये कैसे आ गई। यदि इस गाड़ी के आने का पता होता तो अन्य काफी यात्री भी सफर कर सकते थे।
ट्रेन बदली तब भी टेंशन में रहे मुसाफिर ः कुछ यात्रियों ने शामली रूट पर ट्रेनें न मिलने पर मेरठ के रूट से जाने के लिए ऋषिकेश पैसेंजर गाड़ी पकड़ी। हालांकि दूसरी गाड़ी बदलने पर भी उनकी टेंशन कम नहीं हुई। क्योंकि सामने से आ रही एक मालगाड़ी ने आधे घंटे से भी अधिक समय तक रूट ब्लॉक कर रखा था। इसके चलते अन्य प्लेटफार्म पर खड़ी मदुरई एक्सप्रेस भी दस मिनट की बजाय बीस मिनट तक स्टेशन पर ही खड़ी रही।
रेलवे को तो मालगाडियों की है फिक्र ः जाट आंदोलन के बाद से यात्री गाड़ियों के मेन रूट पर मालगाड़ियों का लोड बढ़ने से परेशान यात्री फिर से बोले कि रेलवे को तो मालगाड़ियों की फिक्र है। यात्रियों को ट्रेन मिले या न मिले। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
आंदोलन का तो पता नहीं, मगर अब राहत की उम्मीद
वरिष्ठ रेलवे स्टेशन अधीक्षक जवाहर सिंह ने बताया कि जाट आंदोलन का आगे क्या रहेगा। इस बारे में तो वह कुछ नहीं कह सकते हैं। हालांकि ऐसा लग रहा है कि अब रेलवे रूटों पर यातायात सामान्य की ओर आ रहा है। यात्रियों की मुश्किलें अब कम हो सकेंगी।
जाट आरक्षण की मांग संविधान के विपरीत
सहारनपुर। पिछड़ा समाज सत्ता मोर्चा की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष महावीर सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा में जाट आरक्षण की मांग संविधान विरोधी है। इस कारण ही सर्वोच्च न्यायालय ने जाटों को आरक्षण के दायरे से अलग किया है।
उन्होंने आरक्षण आंदोलन में हुए संपत्ति के नुकसान की कड़ी निंदा की। सोमवार को पंजाबी बाग स्थित जिला कार्यालय में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जाट आरक्षण आंदोलन में प्रदेश सरकार ने मूकदर्शक रहकर आरक्षण समर्थकों का समर्थन किया है।
ऐसे में वहां के मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण समर्थकों के अनैतिक और गैर कानूनी कार्यों का विरोध करके सैनी और गुर्जर समाज के लोगों ने मानवता का परिचय दिया है।
उन्होंने जाट आरक्षण के समर्थन करने वाले राजनीतिक दलों को पिछड़ा समाज विरोधी करार दिया। कहा कि यदि भाजपा और बसपा सुप्रीमो मायावती को जाटों को आरक्षण देने की इतनी ही चिंता है तो जाट समाज को पिछडे़ वर्ग की बजाए अनुसूचित जाति में शामिल करने की हिमायत करनी चाहिए।
जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश वर्मा, ऋषिपाल, अनिल कुमार गुर्जर ने भी विचार रखे। इस दौरान मोहम्मद आरिफ, प्रवेश कुमार, अश्वनी त्यागी, नरेंद्र, बलवीर सैनी, नंदू सैनी आदि रहे।