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जैन समाज ने की उत्तम संयम धर्म की पूजा
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सुलतानपुर के जैन मंदिर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु
- फोटो : SAHARANPUR
सरसावा/ नकुड़/ चिलकाना (सहारनपुर)। जैन समाज के श्रद्धालुओं ने पर्यूषण पर्व के मौके पर उत्तम संयम धर्म की पूजा की गई। इस मौके पर जैन विद्वानों ने कहा केवल ध्यान करना संयम धर्म का पालन करना नहीं है, अपितु हमें समग्र रूप से संयम धारण करना होता है।
बुधवार को जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम संयम धर्म की पूजा की। इस मौके पर नित्य नियम पूजा प्रक्षाल अभिषेक के बाद सामूहिक रूप से महिला पुरुषों बच्चों ने पूजा अर्चना की। जैन शास्त्रों आगम के विद्वानों ने कहा संयम का अर्थ केवल वाणी पर संयम रखना नहीं है, अपितु हमें अपने व्यवहार आचरण शारीरिक मानसिक तथा पंच इंद्रियों पर संयम रखना होता है। संयम रखने पर हर परिस्थिति का आसानी से मुकाबला करता है तीर्थंकर संयम धारित होते थे, इसलिए वह तीर्थंकर पद पा गए। चाहे हमारा भौतिक जीवन हो अथवा धार्मिक जीवन संयम धारण करने से ही प्रगति के पथ पर बढ़ा जा सकता है। तीर्थंकर को जिनेंद्र, इसीलिए कहते हैं कि उन्होंने अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली थी, लेकिन आम मनुष्य इंद्रियों पर विजय प्राप्त नहीं कर सकता है, उसे केवल इंद्रियों पर संयम धारण करना होता है।
नकुड़ में जैन मिलन द्वारा आयोजित खुल जा सिम सिम प्रतियोगिता में भजन, भक्तांबर स्तोत्र, चालीसा, बारह भावना, जिनवाणी स्तुति सुनाकर प्रतियोगियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैन मिलन के महामंत्री शिवम जैन, पंकज जैन, शरद जैन, संदीप जैन, राजेश जैन, पीयूष जैन, संजीव, राजेश जैन राजू, संयम जैन, वर्धन जैन, प्रीतम प्रसाद जैन रहे।
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सुल्तानपुर में जैन मंदिर के प्रांगण में जैन समाज के संरक्षक सुधीर जैन, अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार जैन, उपाध्यक्ष बिजेंद्र जैन, महामंत्री निशांक जैन, श्रीयांश जैन, मोहित जैन, पंडित रोहित, संजय जैन, संदीप जैन, पारूल जैन, पूजा जैन, दीपांशी जैन, विजया रानी जैन, इंद्राणी जैन, तनूजा जैन, चंदन जैन आदि ने पूजा अर्चना में भागेदारी की।
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बुधवार को जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम संयम धर्म की पूजा की। इस मौके पर नित्य नियम पूजा प्रक्षाल अभिषेक के बाद सामूहिक रूप से महिला पुरुषों बच्चों ने पूजा अर्चना की। जैन शास्त्रों आगम के विद्वानों ने कहा संयम का अर्थ केवल वाणी पर संयम रखना नहीं है, अपितु हमें अपने व्यवहार आचरण शारीरिक मानसिक तथा पंच इंद्रियों पर संयम रखना होता है। संयम रखने पर हर परिस्थिति का आसानी से मुकाबला करता है तीर्थंकर संयम धारित होते थे, इसलिए वह तीर्थंकर पद पा गए। चाहे हमारा भौतिक जीवन हो अथवा धार्मिक जीवन संयम धारण करने से ही प्रगति के पथ पर बढ़ा जा सकता है। तीर्थंकर को जिनेंद्र, इसीलिए कहते हैं कि उन्होंने अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली थी, लेकिन आम मनुष्य इंद्रियों पर विजय प्राप्त नहीं कर सकता है, उसे केवल इंद्रियों पर संयम धारण करना होता है।
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नकुड़ में जैन मिलन द्वारा आयोजित खुल जा सिम सिम प्रतियोगिता में भजन, भक्तांबर स्तोत्र, चालीसा, बारह भावना, जिनवाणी स्तुति सुनाकर प्रतियोगियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैन मिलन के महामंत्री शिवम जैन, पंकज जैन, शरद जैन, संदीप जैन, राजेश जैन, पीयूष जैन, संजीव, राजेश जैन राजू, संयम जैन, वर्धन जैन, प्रीतम प्रसाद जैन रहे।
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सुल्तानपुर में जैन मंदिर के प्रांगण में जैन समाज के संरक्षक सुधीर जैन, अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार जैन, उपाध्यक्ष बिजेंद्र जैन, महामंत्री निशांक जैन, श्रीयांश जैन, मोहित जैन, पंडित रोहित, संजय जैन, संदीप जैन, पारूल जैन, पूजा जैन, दीपांशी जैन, विजया रानी जैन, इंद्राणी जैन, तनूजा जैन, चंदन जैन आदि ने पूजा अर्चना में भागेदारी की।

नकुड़ में पूजा अर्चना करते जैन श्रद्वालु- फोटो : SAHARANPUR