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Saharanpur News: जनपद में उद्योग, फैक्टरी और निर्माण एजेंसियां फैला रहीं प्रदूषण
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आवास विकास में में जलाया गया कूड़ा
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जनपद में कई उद्योग और फैैक्टरियां धड़ल्ले से जल, वायु और मृदा प्रदूषण फैला रहे हैं। बीते एक साल में कई उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुख्यालय के आदेश के बाद बंद कराया गया है, जबकि कई उद्योगों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई है, लेकिन इसके बावजूद प्रदूषण कम नहीं हो रहा है।
महानगर में जींस और बनियान के कपड़ों की रंगाई के लिए कई फैक्टरियां हैं। ये फैक्टरियां कपड़े की रंगाई के बाद केमिकलयुक्त पानी को सीधे नाले में बहा देती हैं। हकीमपुरा, सराय, बेहट रोड, नूर बस्ती, हिरन मारान आदि ऐसी जगह हैं जहां ऐसा किया जा रहा है। कई उद्योग दिल्ली रोड, देहरादून रोड, अंबाला रोड और बेहट रोड क्षेत्र में वायु प्रदूषण फैला रहे हैं। शहर के बीच से होकर गुजर रही पांवधोई और ढमोला नदियां उनमें सीवर, नाले और फैक्टरियों द्वारा केमिकलयुक्त जल छोड़े जाने से पूरी तरह दूषित हो चुकी हैं। इन दिनों घंटाघर के आसपास सड़कों के निर्माण का कार्य चल रहा है। पानी का छिड़काव नहीं होने के कारण दिन भी धूल के गुबार उड़कर हवा को दूषित बना रहे हैं।
ईंट भट्ठे नहीं हो सके हैं शहर से बाहर
एनजीटी ने शहरी क्षेत्र में संचालित ईंट भट्ठों को शहर से बाहर करने के आदेश करीब दो वर्ष पहले दिए थे, लेकिन महानगर में लगातार ईंट भट्ठे चल रहे हैं, जो हवा में जहर भी घोल रहे हैं। दाबकी क्षेत्र में ईंट भट्ठों के चलने से राख उड़कर आसपास की कॉलोनियों में पहुंच रही है। इसी प्रकार गांव रामगढ़ और कोलागढ़ क्षेत्र, नवादा रोड और बेहट रोड पर भी कई ईंट भट्ठे वायु प्रदूषण का कारण बने हुए हैं।
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नगर निगम भी जिम्मेदार
वायु प्रदूषण के लिए नगर निगम भी जिम्मेदार है। दरअसल, नगर निगम के सफाईकर्मी जगह-जगह कचरे में आग लगा रहे हैं। कई लघु उद्योग अपने यहां से निकलने वाले कचरे को शकलापुरी मार्ग आदि पर डालकर उसको रात के समय आगे के हवाले कर दे रहे हैं। प्रतिदिन शहर में अलग-अलग जगहों पर कचरा जलते देखा जा सकता है। एनजीटी के सख्त आदेश हैं कि यदि नगर निगम सफाई भी कराए तो उससे पहले पानी का छिड़काव कराए, जिससे धूल न उड़े, लेकिन महानगर में इन दिनों सड़कों के खोदे जाने से धूल के गुबार झेल रहा है।
शहर के बीचोंबीच आ गए तीन बड़े उद्योग
महानगर में दो बड़े उद्योग कई दशक पुराने हैं। जिस समय इनकी स्थापना हुई थी उस समय यह आबादी से बाहर थे, लेकिन शहर का विस्तार होते होते अब यह उद्योग आबादी के बीच में आ गए हैं। एक उद्योग से धुआं और राख उड़कर हवा को दूषित और लोगों को बीमार बना रही है। यह उद्योग हिंडन को भी दूषित कर रहा है। इसी प्रकार एक उद्योग से नशीली महक पूरी आबादी को प्रभावित करती है।
जनपद में संचालित उद्योग और फैक्टरियां प्रदूषण न फैलाएं इसके लिए उनको जरूरी उपकरण लगाने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। पालन नहीं करने वाले उद्योगों को बंद भी कराया गया है, जबकि कई को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, जिसको रोकने के लिए बोर्ड कदम उठा रहा है। साथ ही नगर निगम जैसे विभागों को भी सहयोग करना होगा।
- डॉ. डीसी पांडेय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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महानगर में जींस और बनियान के कपड़ों की रंगाई के लिए कई फैक्टरियां हैं। ये फैक्टरियां कपड़े की रंगाई के बाद केमिकलयुक्त पानी को सीधे नाले में बहा देती हैं। हकीमपुरा, सराय, बेहट रोड, नूर बस्ती, हिरन मारान आदि ऐसी जगह हैं जहां ऐसा किया जा रहा है। कई उद्योग दिल्ली रोड, देहरादून रोड, अंबाला रोड और बेहट रोड क्षेत्र में वायु प्रदूषण फैला रहे हैं। शहर के बीच से होकर गुजर रही पांवधोई और ढमोला नदियां उनमें सीवर, नाले और फैक्टरियों द्वारा केमिकलयुक्त जल छोड़े जाने से पूरी तरह दूषित हो चुकी हैं। इन दिनों घंटाघर के आसपास सड़कों के निर्माण का कार्य चल रहा है। पानी का छिड़काव नहीं होने के कारण दिन भी धूल के गुबार उड़कर हवा को दूषित बना रहे हैं।
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ईंट भट्ठे नहीं हो सके हैं शहर से बाहर
एनजीटी ने शहरी क्षेत्र में संचालित ईंट भट्ठों को शहर से बाहर करने के आदेश करीब दो वर्ष पहले दिए थे, लेकिन महानगर में लगातार ईंट भट्ठे चल रहे हैं, जो हवा में जहर भी घोल रहे हैं। दाबकी क्षेत्र में ईंट भट्ठों के चलने से राख उड़कर आसपास की कॉलोनियों में पहुंच रही है। इसी प्रकार गांव रामगढ़ और कोलागढ़ क्षेत्र, नवादा रोड और बेहट रोड पर भी कई ईंट भट्ठे वायु प्रदूषण का कारण बने हुए हैं।
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नगर निगम भी जिम्मेदार
वायु प्रदूषण के लिए नगर निगम भी जिम्मेदार है। दरअसल, नगर निगम के सफाईकर्मी जगह-जगह कचरे में आग लगा रहे हैं। कई लघु उद्योग अपने यहां से निकलने वाले कचरे को शकलापुरी मार्ग आदि पर डालकर उसको रात के समय आगे के हवाले कर दे रहे हैं। प्रतिदिन शहर में अलग-अलग जगहों पर कचरा जलते देखा जा सकता है। एनजीटी के सख्त आदेश हैं कि यदि नगर निगम सफाई भी कराए तो उससे पहले पानी का छिड़काव कराए, जिससे धूल न उड़े, लेकिन महानगर में इन दिनों सड़कों के खोदे जाने से धूल के गुबार झेल रहा है।
शहर के बीचोंबीच आ गए तीन बड़े उद्योग
महानगर में दो बड़े उद्योग कई दशक पुराने हैं। जिस समय इनकी स्थापना हुई थी उस समय यह आबादी से बाहर थे, लेकिन शहर का विस्तार होते होते अब यह उद्योग आबादी के बीच में आ गए हैं। एक उद्योग से धुआं और राख उड़कर हवा को दूषित और लोगों को बीमार बना रही है। यह उद्योग हिंडन को भी दूषित कर रहा है। इसी प्रकार एक उद्योग से नशीली महक पूरी आबादी को प्रभावित करती है।
जनपद में संचालित उद्योग और फैक्टरियां प्रदूषण न फैलाएं इसके लिए उनको जरूरी उपकरण लगाने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। पालन नहीं करने वाले उद्योगों को बंद भी कराया गया है, जबकि कई को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, जिसको रोकने के लिए बोर्ड कदम उठा रहा है। साथ ही नगर निगम जैसे विभागों को भी सहयोग करना होगा।
- डॉ. डीसी पांडेय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

सहारनपुर में घंटाघर से लेकर देहरादून रोड तक रोड से उड़ती धूंल से होकर जाते वाहन- फोटो : SAHARANPUR

रेलवे रोड पर सफाई करता कर्मी उड़ती धूंल- फोटो : SAHARANPUR

सहारनपुर में घंटाघर से लेकर देहरादून रोड तक रोड से उड़ती धूंल से होकर जाते वाहन- फोटो : SAHARANPUR