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बढ़ रहा प्रदूषण, फिर भी जला रहे पराली और कचरा

Tue, 16 Nov 2021 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 16 Nov 2021 11:36 PM IST
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Increasing pollution, still burning stubble and garbage
बोमनजी रोड़ दुकानदारो द्घारा जलाया गया कूड़ा - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली और एनसीआर में हालात खराब हैं। सहारनपुर का एक्यूआई 250 और उससे ऊपर चल रहा है। बावजूद इसके खेतों में पराली तो कहीं पर कचरा जलाया जा रहा है। फैक्टरियों और ईंट भट्ठों से होने वाले प्रदूषण पर भी रोक लगाने की खानापूर्ति हो रही है। इससे सेहत पर खतरा मंडरा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों को चिंता तक नहीं है।
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वर्ष 2020 में जनपद में धान कटाई सीजन में 15 नवंबर तक पराली जलाने की 91 घटनाएं हुई थीं। इस बार यह आंकड़ा 51 है। यानी बीते वर्ष की तुलना में पराली जलाने के मामले कम तो हुए, मगर पराली जलाने पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई। यह हाल तो तब है, जबकि किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए जनपद में तहसील स्तर पर कमेटियां बनी हुई हैं, जिनकी मॉनिटरिंग उपजिलाधिकारी करते हैं। इसके अलावा जहां तहां पड़ी निर्माण सामग्री, खोदाई करके छोड़ी गई सड़कें, फैक्टरियों और ईंट भट्ठों से निकलने वाला धुआं भी वायु प्रदूषण को बढ़ा रहा है।
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इन गैसों का होता है उत्सर्जन
पराली को जलाने से मीथेन, कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाइ ऑक्साइड, पार्टिकुलेट मैटर (इससे वायुमंडल में कोहरा सा छा जाता है) आदि गैसों का उत्सर्जन होता है, जो पर्यावरण और मनुष्य के साथ ही सभी जीवों के लिए बेहद खतरनाक हैं।
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पराली के धुएं से इन बीमारियों के होने का डर
- फेफड़े की समस्या
- सांस लेने में तकलीफ
- कैंसर समेत अन्य रोग
- दिल के मरीजों को समस्या
- आंखों में जलन
मिट्टी की उर्वरक क्षमता होती है कम
पराली जलाने से राख पैदा होती है। जिस स्थान पर पराली जलाई जाती है उस जगह पर पाई जाने वाले सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। इससे फसलों की पैदावार कम हो जाती है और मिट्टी की गुणवत्ता या उर्वरक क्षमता कम होती है।
कार्रवाई के लिए यह है कानून
एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने दस दिसंबर 2015 को फसल अवशेषों पर जलाने का प्रतिबंध लगा दिया था। पराली जलाने पर कानूनी तौर पर कार्रवाई भी की जाती है। पराली जलाने के दोषी पाने पर दो एकड़ भूमि तक 2,500 रुपये, दो से पांच एकड़ भूमि तक 5,000 रुपये और पांच एकड़ से ज्यादा भूमि पर 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
कचरा भी जला रहे लोग
तमाम सख्ती के बावजूद शहर में कचरा भी जलाया जा रहा है। प्रतिदिन शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर से धुआं उठता देखा जा सकता है। 15 नवंबर की ही रात पांवधोई नदी के तट पर दुकानदारों के द्वारा कचरे में आग लगा दी गई। इसके बावजूद आज तक किसी व्यक्ति पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कार्रवाई नहीं की जाती है।
मौसम और आतिशबाजी से बढ़ा प्रदूषण
इन दिनों वायु प्रदूषण बढ़ने की मुख्य वजह मौसम भी है। सर्दियों में हवा में नमी की वजह से धूल और धुंए के कण हवा में बने रहते हैं। दीपावली से पहले तक जनपद का एक्यूआई 80 और 100 तक चल रहा था, जो अब 250 और उससे अधिक तक है।
पराली जलाने वालों पर कार्रवाई के लिए प्रशासनिक स्तर से कमेटियां बनाई गई हैं। यदि हमें शिकायत मिलती है तो प्रशासन के सहयोग से कार्रवाई की जाती है। रही बात कचरा जलाने की तो उस पर पाबंदी है। यदि कहीं कचरा जलाने की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई होगी।

- डॉ. डीसी पांडेय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
वायु में प्रदूषण बढ़ने से सांस और दिल सहित कई बीमारियों के मरीजों की तकलीफ भी बढ़ जाती है। प्रदूषण की वजह से इन दिनों सांस के मरीजों की समस्या बढ़ी हुई है। ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है।
- डॉ. जी रहमान, चेस्ट फिजीशियन, एसबीडी जिला अस्पताल।

थरौली क्षेत्र में खेत में पुराली जलाते

थरौली क्षेत्र में खेत में पुराली जलाते- फोटो : SAHARANPUR

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