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Saharanpur News: सदियों पुराने पेड़ देखने हैं तो आइए सहारनपुर
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सहारनपुर के औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में करीब 300 साल पुराना साइकस का पेड़, जिसे ई
अमर उजाला खास
- औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में है 300 साल पुराने पेड़
- दूसरे स्थान पर शामली और तीसरे स्थान पर है आगरा में है सबसे पुराने पेड़
- 300 साल पुराने साइकस के पेड़ को दिया गया है ईंटों के पिलर का सहारा
विनीत तोमर
सहारनपुर। यूं तो हर कोई व्यक्ति चाहता है कि उसके इर्द-गिर्द हरियाली हो। पौधरोपण कर इसके लिए तमाम प्रयास भी किए जा रहे हैं, लेकिन आप भी जानकर हैरान होंगे कि सहारनपुर में एक ऐसा परिसर है जिसमें दशकों या फिर एक-दो सदी पुराने नहीं, बल्कि तीन सदी पुराने पेड़ों को आज भी सहेज कर रखा गया है। जिनकी देखभाल परिवार के बुजुर्ग की तरह की जा रही है। यदि आप हरियाली के शौकीन है और पश्चिमी यूपी में सदियों पुराने बुजुर्ग पेड़ देखना चाहते हैं, तो कंपनी बाग स्थित औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में आना होगा। दूसरे स्थान पर शामली और तीसरे नंबर पर आगरा का शाहजहां पार्क है। उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड भी पश्चिम यूपी समेत कई अन्य जिलों के पुराने पेड़ों को सहेजने की सूची जारी कर चुका है।
औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में सबसे पुराने पेड़ की बात करें तो वह साइकस का है। केंद्र के संयुक्त निदेशक सुरेश कुमार का कहना है कि इस पेड़ की उम्र 300 साल से ज्यादा हो चुकी है। पेड़ की शाखाएं चारों तरफ इस कदर फैल चुकी है कि उन्हें सहारा देने के लिए ईंट के छोटे-छोटे पिलर बनाए गए हैं। जिससे भारी होने के कारण वह नीचे न गिरे। इसके अलावा पाकड़ के पेड़ की उम्र 150 साल हो चुकी है। इसी तरह मैसूर बरगद 140 साल, महोगनी 135 साल, पीपल 110, नीम, अर्जुन और जामुन के पेड़ भी 100-100 साल पुराने हो चुके हैं।
पेड़ की तरह नहीं परिवार के बुजुर्ग की तरह होती है देखभाल
इन पेड़ों की देखभाल के लिए बाकायदा कर्मचारी लगाए गए हैं, जो इनमें खाद-पानी की देखभाल करते हैं। उन्हें हिदायत दी गई है कि इन्हें पेड़ मानकर नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य मानकर देखभाल करनी है। यदि इन पेड़ों की एक भी शाखा टूटती है तो विभागीय अधिकारी भी मौका मुआयना करते हैं।
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शामली में भी 150 और 110 साल की उम्र के पेड़
सहारनपुर के बाद शामली जिले का नंबर आता है, जहां पर दो सबसे पुराने पेड़ हैं। जलालाबाद में मेन रोड पर बरगद का पेड़ 150 साल पुराना है, जबकि गन्ना सोसायटी में 110 साल पुराना पाकड़ का पेड़ है। यह पेड़ भी उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड की सूची में शामिल है। तीसरे स्थान आगरा का शाहजहां पार्क है। वहां पर बरगद, इमली, पीपल के सात पेड़ है, जो 100 साल पुराने हैं। इसमें बरगद का एक पेड़ ताजमहल के अंदर है।
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- औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में है 300 साल पुराने पेड़
- दूसरे स्थान पर शामली और तीसरे स्थान पर है आगरा में है सबसे पुराने पेड़
- 300 साल पुराने साइकस के पेड़ को दिया गया है ईंटों के पिलर का सहारा
विनीत तोमर
सहारनपुर। यूं तो हर कोई व्यक्ति चाहता है कि उसके इर्द-गिर्द हरियाली हो। पौधरोपण कर इसके लिए तमाम प्रयास भी किए जा रहे हैं, लेकिन आप भी जानकर हैरान होंगे कि सहारनपुर में एक ऐसा परिसर है जिसमें दशकों या फिर एक-दो सदी पुराने नहीं, बल्कि तीन सदी पुराने पेड़ों को आज भी सहेज कर रखा गया है। जिनकी देखभाल परिवार के बुजुर्ग की तरह की जा रही है। यदि आप हरियाली के शौकीन है और पश्चिमी यूपी में सदियों पुराने बुजुर्ग पेड़ देखना चाहते हैं, तो कंपनी बाग स्थित औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में आना होगा। दूसरे स्थान पर शामली और तीसरे नंबर पर आगरा का शाहजहां पार्क है। उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड भी पश्चिम यूपी समेत कई अन्य जिलों के पुराने पेड़ों को सहेजने की सूची जारी कर चुका है।
औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में सबसे पुराने पेड़ की बात करें तो वह साइकस का है। केंद्र के संयुक्त निदेशक सुरेश कुमार का कहना है कि इस पेड़ की उम्र 300 साल से ज्यादा हो चुकी है। पेड़ की शाखाएं चारों तरफ इस कदर फैल चुकी है कि उन्हें सहारा देने के लिए ईंट के छोटे-छोटे पिलर बनाए गए हैं। जिससे भारी होने के कारण वह नीचे न गिरे। इसके अलावा पाकड़ के पेड़ की उम्र 150 साल हो चुकी है। इसी तरह मैसूर बरगद 140 साल, महोगनी 135 साल, पीपल 110, नीम, अर्जुन और जामुन के पेड़ भी 100-100 साल पुराने हो चुके हैं।
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पेड़ की तरह नहीं परिवार के बुजुर्ग की तरह होती है देखभाल
इन पेड़ों की देखभाल के लिए बाकायदा कर्मचारी लगाए गए हैं, जो इनमें खाद-पानी की देखभाल करते हैं। उन्हें हिदायत दी गई है कि इन्हें पेड़ मानकर नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य मानकर देखभाल करनी है। यदि इन पेड़ों की एक भी शाखा टूटती है तो विभागीय अधिकारी भी मौका मुआयना करते हैं।
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शामली में भी 150 और 110 साल की उम्र के पेड़
सहारनपुर के बाद शामली जिले का नंबर आता है, जहां पर दो सबसे पुराने पेड़ हैं। जलालाबाद में मेन रोड पर बरगद का पेड़ 150 साल पुराना है, जबकि गन्ना सोसायटी में 110 साल पुराना पाकड़ का पेड़ है। यह पेड़ भी उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड की सूची में शामिल है। तीसरे स्थान आगरा का शाहजहां पार्क है। वहां पर बरगद, इमली, पीपल के सात पेड़ है, जो 100 साल पुराने हैं। इसमें बरगद का एक पेड़ ताजमहल के अंदर है।