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फसल अवशेष जलाने की घटना छिपाई तो ग्राम प्रधान होंगे उत्तरदायी
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सहारनपुर। फसल का अवशेष जलाने से रोकने की कवायद के तहत प्रशासन ने ग्राम प्रधानों का उत्तरदायित्व भी निर्धारित किया है। जिलाधिकारी ने सभी ग्राम प्रधानों को पत्र भेजकर फसल जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने के भी निर्देश दिए हैं।
किसानों को फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। इसके लिए न सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों की कमेटी का गठन किया, बल्कि ग्राम प्रधानों को भी इसकी जिम्मेदारी दी। जनपद में करीब 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान और एक लाख 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने का फसल है। डीएम ने इस बारे में जनपद के सभी ग्राम प्रधानों को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा सभी राजस्व गांवों में 20 से 25 सितंबर के बीच ग्राम पंचायत सदस्यों की साधारण सभा की बैठक कर उन्हें फसल अवशेषों को जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा अवशेष जलाने से भूमि को होने वाले नुकसान की जानकारी भी दी जाए। इसमें कृषि विभाग के प्राविधिक सहायक, गन्ना पर्यवेक्षक, लेखपाल और ग्राम पंचायत अधिकारी को भी शामिल करें। जो किसानों को पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण, और भूमि की उर्वरा शक्ति पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव की जानकारी देंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि यदि फसल अवशेष जलाया तो कितना अर्थदंड लग सकता है। इसके अलावा दीवारों पर पेंट कराकर भी किसानों को जागरूक करें। उप कृषि निदेशक रामजतन मिश्र ने बताया कि शासन प्रशासन फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए गंभीर है। इसके लिए ग्राम प्रधानों की जिम्मेदारी भी लगाई है कि वे लेखपाल को फसल अवशेष जलाने की घटना की जानकारी दें। घटना छिपाने पर दोषी के साथ ही ग्राम प्रधान की संलिप्तता मानी जाएगी।
इस प्रकार लगेगा जुर्माना
दो एकड़ से कम क्षेत्र पर 2500 रुपये प्रति घटना
दो से पांच एकड़ क्षेत्र पर 5000 रुपये प्रति घटना
पांच एकड़ से अधिक पर 15000 रुपये प्रति घटना
गत वर्ष हुई फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की स्थिति
धान की पराली जलाने की घटनाएं ---- 47
गन्ने की पत्ती जलाने की घटनाएं -- 38
कूड़ा जलाने की घटनाएं ----- 06
किसानों के खिलाफ दर्ज केस --- 22
कुल लगाया गया जुर्माना -- 375500 रुपये
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किसानों को फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। इसके लिए न सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों की कमेटी का गठन किया, बल्कि ग्राम प्रधानों को भी इसकी जिम्मेदारी दी। जनपद में करीब 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान और एक लाख 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने का फसल है। डीएम ने इस बारे में जनपद के सभी ग्राम प्रधानों को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा सभी राजस्व गांवों में 20 से 25 सितंबर के बीच ग्राम पंचायत सदस्यों की साधारण सभा की बैठक कर उन्हें फसल अवशेषों को जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा अवशेष जलाने से भूमि को होने वाले नुकसान की जानकारी भी दी जाए। इसमें कृषि विभाग के प्राविधिक सहायक, गन्ना पर्यवेक्षक, लेखपाल और ग्राम पंचायत अधिकारी को भी शामिल करें। जो किसानों को पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण, और भूमि की उर्वरा शक्ति पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव की जानकारी देंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि यदि फसल अवशेष जलाया तो कितना अर्थदंड लग सकता है। इसके अलावा दीवारों पर पेंट कराकर भी किसानों को जागरूक करें। उप कृषि निदेशक रामजतन मिश्र ने बताया कि शासन प्रशासन फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए गंभीर है। इसके लिए ग्राम प्रधानों की जिम्मेदारी भी लगाई है कि वे लेखपाल को फसल अवशेष जलाने की घटना की जानकारी दें। घटना छिपाने पर दोषी के साथ ही ग्राम प्रधान की संलिप्तता मानी जाएगी।
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इस प्रकार लगेगा जुर्माना
दो एकड़ से कम क्षेत्र पर 2500 रुपये प्रति घटना
दो से पांच एकड़ क्षेत्र पर 5000 रुपये प्रति घटना
पांच एकड़ से अधिक पर 15000 रुपये प्रति घटना
गत वर्ष हुई फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की स्थिति
धान की पराली जलाने की घटनाएं ---- 47
गन्ने की पत्ती जलाने की घटनाएं -- 38
कूड़ा जलाने की घटनाएं ----- 06
किसानों के खिलाफ दर्ज केस --- 22
कुल लगाया गया जुर्माना -- 375500 रुपये