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पति ने कहा मैंने तुझे आजाद किया, मुफ्ती बोले, शौहर से रिश्ता खत्म
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
Updated Thu, 22 Mar 2018 11:59 PM IST
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दारुल उलूम देवबंद
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर के देवबंद में दारुल उलूम से जारी एक फतवे में मुफ्तियों की खंडपीठ ने मुजफ्फरनगर की एक महिला के सवाल पर उसका रिश्ता शौहर से खत्म बताया है। साथ ही सलाह भी दी है कि वो इद्दत करने के बाद दूसरा निकाह कर अपनी जिंदगी गुजारे।
मुजफ्फरनगर निवासी महिला ने 17 मार्च को दारुल उलूम के इफ्ता विभाग के मुफ्तियों से सवाल पूछा था कि उसके शौहर ने गुस्से में एक बार कहा कि अगर तू मुझे परेशान करेगी तो मैं तुझे छोड़ दूंगा। जबकि दूसरे मौके पर उसके शौहर ने कहा कि मैने तुझे छोड़ दिया।
मैने तुझे आजाद कर दिया। न मैं तेरा कुछ लगता हूं न तू मेरी कुछ लगती है। बावजूद इसके वो दोनों एक साथ रह रहे हैं। जिसके जवाब में मुफ्तियों ने कहा कि शौहर और बीवी के बयानों में विरोधाभास है। शौहर का कहना है कि छोड़ने से उसका मकसद तलाक से नहीं था।
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जबकि बीवी का कहना है कि उसके शौहर ने झगड़े के दौरान कहा था कि मैने तुझे आजाद कर दिया। लेकिन इस दौरान शौहर और बीवी के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति मौजूद नहीं था। मुफ्तियों का कहना है कि जब बीवी के पास कोई शरई गवाह नहीं है और शौहर भी उसके बयान की तस्दीक नहीं करता तो बीवी पर तलाक का हुक्म नहीं हो सकता।
लेकिन जब बीवी ने अपने कानों से शौहर के जुमले (शब्द) मैने तुझे आजाद कर दिया और मैने तुझे छोड़ दिया सुन लिए तो उसमें किसी तरह का कोई शक बाकी नहीं रह जाता। जैसा की उक्त महिला ने पूछने पर बताया कि ऐसी सूरत में आजाद कर दिया का जुमला तलाक का जुमला है।
जिससे कजाअन (लोगों के सामने जुमले आना) तलाक हो जाता है। अब महिला पर उसका शौहर हराम है। इसलिए वो उससे अलग हो जाए और उससे मुकम्मल तौर पर पर्दा रखे। मुफ्तियों ने यह भी कहा कि अगर शौहर आईंदा भी अपने बयान पर कायम रहे तो तलाक या खुला (काजियों के द्वारा) के जरिये उससे छुटकारा हासिल करने की कोशिश करें। ताकि उसका निकाह शौहर से खत्म हो जाए और इद्दत के बाद किसी दूसरे मर्द से निकाह करके अपनी जिंदगी गुजारे।
मुजफ्फरनगर निवासी महिला ने 17 मार्च को दारुल उलूम के इफ्ता विभाग के मुफ्तियों से सवाल पूछा था कि उसके शौहर ने गुस्से में एक बार कहा कि अगर तू मुझे परेशान करेगी तो मैं तुझे छोड़ दूंगा। जबकि दूसरे मौके पर उसके शौहर ने कहा कि मैने तुझे छोड़ दिया।
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मैने तुझे आजाद कर दिया। न मैं तेरा कुछ लगता हूं न तू मेरी कुछ लगती है। बावजूद इसके वो दोनों एक साथ रह रहे हैं। जिसके जवाब में मुफ्तियों ने कहा कि शौहर और बीवी के बयानों में विरोधाभास है। शौहर का कहना है कि छोड़ने से उसका मकसद तलाक से नहीं था।
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जबकि बीवी का कहना है कि उसके शौहर ने झगड़े के दौरान कहा था कि मैने तुझे आजाद कर दिया। लेकिन इस दौरान शौहर और बीवी के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति मौजूद नहीं था। मुफ्तियों का कहना है कि जब बीवी के पास कोई शरई गवाह नहीं है और शौहर भी उसके बयान की तस्दीक नहीं करता तो बीवी पर तलाक का हुक्म नहीं हो सकता।
लेकिन जब बीवी ने अपने कानों से शौहर के जुमले (शब्द) मैने तुझे आजाद कर दिया और मैने तुझे छोड़ दिया सुन लिए तो उसमें किसी तरह का कोई शक बाकी नहीं रह जाता। जैसा की उक्त महिला ने पूछने पर बताया कि ऐसी सूरत में आजाद कर दिया का जुमला तलाक का जुमला है।
जिससे कजाअन (लोगों के सामने जुमले आना) तलाक हो जाता है। अब महिला पर उसका शौहर हराम है। इसलिए वो उससे अलग हो जाए और उससे मुकम्मल तौर पर पर्दा रखे। मुफ्तियों ने यह भी कहा कि अगर शौहर आईंदा भी अपने बयान पर कायम रहे तो तलाक या खुला (काजियों के द्वारा) के जरिये उससे छुटकारा हासिल करने की कोशिश करें। ताकि उसका निकाह शौहर से खत्म हो जाए और इद्दत के बाद किसी दूसरे मर्द से निकाह करके अपनी जिंदगी गुजारे।