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भारतीय टीम की उपलब्धी से खुशी, हॉकी की दुर्दशा से आहत

Tue, 03 Aug 2021 12:04 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Aug 2021 12:04 AM IST
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Happy with the achievement of the Indian team, hurt by the plight of hockey
फुरकान अहमद। - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। ओलंपिक में 49 साल बाद भारतीय हॉकी (पुरुष) टीम सेमीफाइनल में पहुंचने से खेल प्रेमियों खासकर हॉकी प्रेमियों में खुशी की लहर है। वह टीम को अगले मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं। मगर राष्ट्रीय खेल होने के बाद भी जिलों में हॉकी खेल को लेकर व्यवस्था बेहद खराब हैं।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब छह साल से हॉकी पूरी तरह बंद है। वरिष्ठ खिलाड़ियों ने हॉकी की दुर्दशा के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। जनपद में हॉकी की मौजूदा स्थिति को फोकस करती तथा हॉकी के वरिष्ठ खिलाड़ियों से बातचीत पर आधारित रिपोर्ट...
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स्टेडियम में न कोच और न खिलाड़ी
डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब छह साल से हॉकी खेल पूरी तरह खत्म है। छह वर्ष पहले हॉकी कोच के रूप में शारिक हुसैन तैनात थे। तब तक हॉकी खिलाड़ी प्रशिक्षण भी पाते थे और प्रतियोगिताएं भी कराई जाती थी, मगर एक कोच मिला, उन्होंने न तो स्टेडियम को समय दिया और न ही खिलाड़ी जोड़े। अब दो साल से वह भी नहीं है। ऐसे में करीब छह साल से स्टेडियम में हॉकी प्रशिक्षण पूरी तरह बंद है। मैदान की बात करें तो सिंथेटिक रनिंग ट्रैक के कारण हॉकी के खेलने की संभावनाएं खत्म हो गई हैं। जबकि पहले प्रतियोगिताएं होती रहती थीं।
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स्कूल कॉलेजों में हॉकी को लेकर क्रेज नहीं
वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ियों ने बताया कि करीब चार दशक पहले तक स्कूल स्तर पर हॉकी खेली जाती थी। करीब एक दर्जन स्कूलों की अपनी टीमें थी। खिलाड़ियों को स्कूल की ओर से हॉकी दी जाती थी। अब स्कूलों में हॉकी के प्रोत्साहन को लेकर कुछ नहीं है। तीन से चार स्कूलों में ही हॉकी चल रही है, इनमें डीएवी पब्लिक स्कूल रसूलपुर, आशा माडर्न स्कूल, डेल मोंड इंटरनेशनल स्कूल आदि शामिल हैं। राष्ट्रीय खेल होने की वजह से हॉकी को स्कूलों में अनिवार्य रूप से लागू करना चाहिए, तभी हॉकी में सुधार आ सकता है।
स्टेडियम में खिलाड़ियों ने जताई खुशी
भारतीय हॉकी की महिला एवं पुरुष टीमों की सफलता पर डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम के खिलाड़ियों ने खुशी का इजहार किया। स्टेडियम में हॉकी के खिलाड़ी नहीं हैं, मगर एथलेटिक्स, बैडमिंटन और अन्य खेलों के खिलाड़ियों को भी भारतीय टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने की खुशी है और टीम को गोल्ड मेडल जीत के लिए शुभकामनाएं दी। इस दौरान प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी प्रेम कुमार, उप जिला क्रीड़ा अधिकारी काशी नरेश यादव आदि भी उनके साथ रहे।
वरिष्ठ खिलाड़ियों की बात
स्कूल स्तर पर हॉकी नहीं होने से हुई दुर्दशा
वरिष्ठ खिलाड़ी नवीन चंद शर्मा विद्युत निगम मेरठ की ओर से खेला करते थे। सहारनपुर आने के बाद वह कई साल तक हॉकी खेले। राष्ट्रीय स्तर के अंपायर भी रहे हैं। नवीन चंद का कहना है कि उनके जमाने में स्कूलों में हॉकी खेली जाती थी। स्कूल और कॉलेजों की ओर से खिलाड़ियों को हॉकी दी जाती थी। प्रतिदिन अभ्यास होता था, अब स्कूल कॉलेजों से हॉकी खेल गायब हो चुका है। कई स्कूल और कॉलेज में मैदान तक नहीं हैं।
एस्ट्रो टर्फ पर जाकर चमका खा जाते हैं खिलाड़ी
वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी यशपाल सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मुश्किल से एक एस्ट्रो टर्फ है। सहारनपुर में तो हॉकी का मैदान तक नहीं है। हमारे खिलाड़ी मिट्टी के मैदान पर प्रेक्टिस करते हैं, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के बाद उन्हें सीधे एस्ट्रो टर्फ मैदान पर उतरना पड़ता है। एस्ट्रो टर्फ पर खेलने की आदत नहीं होने के कारण अधिकांश खिलाड़ी फेल हो जाते हैं। हॉकी की दुर्दशा के लिए वह सरकार को जिम्मेदार मानते हैं।
खिलाड़ियों की कमी नहीं, सुविधाएं चाहिए
रेलवे की ओर से हॉकी खेल रहे वरिष्ठ खिलाड़ी फुरकान अहमद सहारनपुर के स्टेडियम में कोच और मैदान नहीं होने से आहत हैं। उनका कहना है कि सहारनपुर में आज भी हॉकी खिलाड़ियों और हॉकी के चाहने वालों की कमी नहीं है, मगर अचानक से स्टेडियम से हॉकी को खत्म कर दिए जाने से सब बिखर गया है। हॉकी खेल की बेहतरी के लिए उन्होंने भी स्कूल स्तर पर हॉकी को बढ़ावा देने की जरूरत बताई है।
स्टेडियम में फिर से शुरू हो हॉकी प्रशिक्षण
पूर्व में स्टेडियम के कोच रहे वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी शारिक हुसैन ने भी भारतीय टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने पर खुशी व्यक्त की है। उनका कहना है कि हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है। निदेशालय को प्रत्येक जनपद के स्टेडियम में हॉकी कोच अनिवार्य रूप से देना चाहिए। ऐसा किए बिना हॉकी का भला नहीं हो सकता है।

हॉकी संघ का पक्ष
हॉकी की दुर्दशा के लिए सरकारें जिम्मेदार
अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रहे और बीते 18 साल से जिला हॉकी संघ के अध्यक्ष पद पर काबिज चौधरी नीर पाल सिंह हॉकी की बदहाली के लिए सरकारों को जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने बताया कि सहारनपुर में बीते दस साल से कोई बड़ी प्रतियोगिता नहीं हुई। जनपद में विगत छह साल से हॉकी कोच नहीं है। इसके लिए वह कई बार खेल निदेशालय को पत्र लिख चुके हैं। आरोप लगाया कि खेल दिवस पर सरकार और खेल विभाग मात्र औपचारिकता पूरी करता है।

शारिक हुसैन।

शारिक हुसैन।- फोटो : SAHARANPUR

यशपाल सिंह पुंडीर।

यशपाल सिंह पुंडीर।- फोटो : SAHARANPUR

जिला हॉकी संघ के अध्यक्ष चौधरी नीरपाल सिंह।

जिला हॉकी संघ के अध्यक्ष चौधरी नीरपाल सिंह।- फोटो : SAHARANPUR

नवीन चंद शर्मा।

नवीन चंद शर्मा।- फोटो : SAHARANPUR

स्टेडियम में खुशी मनाते हॉकी खिलाड़ी

स्टेडियम में खुशी मनाते हॉकी खिलाड़ी- फोटो : SAHARANPUR

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