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जीएसटी का छापा, करीब 60 लाख का कर अपवंचन मिला
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सहारनपुर। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा द्वारा बृहस्पतिवार को बेहट रोड स्थित एक कीटनाशक विक्रेता के प्रतिष्ठान पर मारे गए छापे में करीब 60 लाख रुपये का कर अपवंचन सामने आया है। इस व्यापारी का वार्षिक टर्नओवर करीब 38 करोड़ रुपये का है।
राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त श्रेणी-1 सत्यपाल सिंह ने बताया कि विभाग को बिना प्रपत्रों के माल छुपाकर रखे जाने और बिना बिल के माल के सप्लाई किए जाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना थी कि व्यापारी ने पिछले चार वर्षों से बहुत कम कर जमा किया और उसने अधिक आईटीसी का लाभ लिया। इस पर इस पर विशेष अनुसंधान शाखा की टीम ने बृहस्पतिवार को कीटनाशक विक्रेता के प्रतिष्ठान पर छापा मारा। यह कार्रवाई देर रात तक चलती रही। जांच में कर अपवंचन पाया गया। जांच के दौरान अभिलेखों दर्ज माल से मौके पर कम मिला और बिना बिल के माल की सप्लाई किया जाना भी पाया गया। उन्होंने बताया कि क्लेम की गई आईटीसी के सापेक्ष मौक़े पर स्टॉक नहीं मिला। अधिकारियों द्वारा डेटा विश्लेषण करने पर पाया गया कि व्यापारी द्वारा करोड़ों रुपये मूल्य का ई-वे बिल कैंसल किया गया था और बिना वैध ई-वे बिल के माल की आपूर्ति की गई थी। जांच में पाया गया कि व्यापारी ने जीएसटी की मूल भावना के अनुरूप मूल्य संवर्धन पर कर नहीं जमा किया गया था। उन्होंने बताया कि जांच में प्रथम दृष्टया 60 लाख रुपये का कर अपवंचन प्रकाश में आया है। उन्होंने कहा कि कर अपवंचन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई जारी रहेगी। छापे की कार्रवाई अपर आयुक्त श्रेणी-1 सत्यपाल सिंह एवं अपर आयुक्त श्रेणी-2 रामबाबू के निर्देशन में हुई। टीम में उप आयुक्त विशेष अनुसंधान शाखा मनोज विश्वकर्मा, उदित नारायण, बृजेश एवं उमा विश्वकर्मा के साथ ही कई सहायक आयुक्त आदि शामिल रहे।
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राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त श्रेणी-1 सत्यपाल सिंह ने बताया कि विभाग को बिना प्रपत्रों के माल छुपाकर रखे जाने और बिना बिल के माल के सप्लाई किए जाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना थी कि व्यापारी ने पिछले चार वर्षों से बहुत कम कर जमा किया और उसने अधिक आईटीसी का लाभ लिया। इस पर इस पर विशेष अनुसंधान शाखा की टीम ने बृहस्पतिवार को कीटनाशक विक्रेता के प्रतिष्ठान पर छापा मारा। यह कार्रवाई देर रात तक चलती रही। जांच में कर अपवंचन पाया गया। जांच के दौरान अभिलेखों दर्ज माल से मौके पर कम मिला और बिना बिल के माल की सप्लाई किया जाना भी पाया गया। उन्होंने बताया कि क्लेम की गई आईटीसी के सापेक्ष मौक़े पर स्टॉक नहीं मिला। अधिकारियों द्वारा डेटा विश्लेषण करने पर पाया गया कि व्यापारी द्वारा करोड़ों रुपये मूल्य का ई-वे बिल कैंसल किया गया था और बिना वैध ई-वे बिल के माल की आपूर्ति की गई थी। जांच में पाया गया कि व्यापारी ने जीएसटी की मूल भावना के अनुरूप मूल्य संवर्धन पर कर नहीं जमा किया गया था। उन्होंने बताया कि जांच में प्रथम दृष्टया 60 लाख रुपये का कर अपवंचन प्रकाश में आया है। उन्होंने कहा कि कर अपवंचन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई जारी रहेगी। छापे की कार्रवाई अपर आयुक्त श्रेणी-1 सत्यपाल सिंह एवं अपर आयुक्त श्रेणी-2 रामबाबू के निर्देशन में हुई। टीम में उप आयुक्त विशेष अनुसंधान शाखा मनोज विश्वकर्मा, उदित नारायण, बृजेश एवं उमा विश्वकर्मा के साथ ही कई सहायक आयुक्त आदि शामिल रहे।
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