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दस लाख मिलना है अनुदान, पर योजना नहीं चढ़ रही परवान
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सहारनपुर। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उच्चीकरण को लेकर उद्यान विभाग की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। इस योजना के तहत बंद उद्यमों को दोबारा शुुरू करने और नई इकाइयों को लगाने के लिए दस लाख रुपये तक के अनुदान का प्रावधान है। तीन महीने पहले शुरू हुई इस योजना के लिए उद्यमी उत्साह नहीं दिखा रहे हैं। अभी तक करीब 90 लोगों ने इसके लिए आवेदन तो किया, लेकिन इससे आगे की कोई प्रक्रिया पूरी नहीं की है। इसके चलते यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।
बंद पड़ी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को दोबारा शुरू कराने के लिए उद्यान विभाग ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना शुरू की है। इस योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाई की क्षमता को बढ़ाने के लिए और नई इकाई लगाने के लिए उद्यमियों को दस लाख रुपये तक अनुदान देने का प्रावधान है। योजना के तहत 70 इकाई की क्षमता बढ़ाने और 30 नई इकाइयां लगाने का लक्ष्य है। लाभार्थी को इकाई लगाने के लिए लागत का 10 प्रतिशत स्वयं और शेष बैंक ऋण लेना होगा। इस योजना के तहत अचार, मुरब्बा, चटनी से लेकर अन्य खाद्य उत्पाद बनाने की इकाई लगाई या पहले से चल रहे इकाई की क्षमता वृद्घि की जा सकती है। इसके अलावा बेकरी उद्योग, पशु एवं मुर्गी चारा उद्योग, चावल मिल, दूध उत्पाद, फल प्रसंस्करण, दूध उत्पाद, मशरूम प्रसंस्करण, मसाला नमकीन, मिठाई बनाने के लिए इकाई लगाई जा सकती है।
वर्जन
इस योजना के तहत उद्यमियों को 30 लाख रुपये तक की इकाई स्थापित करने पर 10 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाना है। तीन महीना पहले यह योजना लागू हुई, लेकिन उद्यमी खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जबकि जिले में खाद्य प्रसंस्करण का काफी संभावना है। अभी तक करीब 90 लोग सिर्फ आवेदन करने तक ही सीमित हैं। रुचि नहीं लेने का कारण समझ में नहीं आ रहा है। अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
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------ जनपद में बाग का रकबा (हेक्टेयर में)
फल -------------- रकबा
आम ------------- 25000
अमरूद ------------ 2600
लीची --------------- 2550
आडू ---------------- 250
------- जिले में सब्जी का रकबा (हेक्टेयर में)
आलू ---------------- 520
टमाटर -------------- 200
मिर्च ----------------- 250
गाजर --------------- 2000
करेला --------------- 2250
शलजम -------------- 500
मूली ------------------ 550
फूल एवं पत्ता गोभी -- 5000
नोट: उद्यान विभाग से जनपद में बाग और सब्जी के रकबे की जानकारी प्राप्त की गई।
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बंद पड़ी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को दोबारा शुरू कराने के लिए उद्यान विभाग ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना शुरू की है। इस योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाई की क्षमता को बढ़ाने के लिए और नई इकाई लगाने के लिए उद्यमियों को दस लाख रुपये तक अनुदान देने का प्रावधान है। योजना के तहत 70 इकाई की क्षमता बढ़ाने और 30 नई इकाइयां लगाने का लक्ष्य है। लाभार्थी को इकाई लगाने के लिए लागत का 10 प्रतिशत स्वयं और शेष बैंक ऋण लेना होगा। इस योजना के तहत अचार, मुरब्बा, चटनी से लेकर अन्य खाद्य उत्पाद बनाने की इकाई लगाई या पहले से चल रहे इकाई की क्षमता वृद्घि की जा सकती है। इसके अलावा बेकरी उद्योग, पशु एवं मुर्गी चारा उद्योग, चावल मिल, दूध उत्पाद, फल प्रसंस्करण, दूध उत्पाद, मशरूम प्रसंस्करण, मसाला नमकीन, मिठाई बनाने के लिए इकाई लगाई जा सकती है।
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वर्जन
इस योजना के तहत उद्यमियों को 30 लाख रुपये तक की इकाई स्थापित करने पर 10 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाना है। तीन महीना पहले यह योजना लागू हुई, लेकिन उद्यमी खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जबकि जिले में खाद्य प्रसंस्करण का काफी संभावना है। अभी तक करीब 90 लोग सिर्फ आवेदन करने तक ही सीमित हैं। रुचि नहीं लेने का कारण समझ में नहीं आ रहा है। अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
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------ जनपद में बाग का रकबा (हेक्टेयर में)
फल -------------- रकबा
आम ------------- 25000
अमरूद ------------ 2600
लीची --------------- 2550
आडू ---------------- 250
------- जिले में सब्जी का रकबा (हेक्टेयर में)
आलू ---------------- 520
टमाटर -------------- 200
मिर्च ----------------- 250
गाजर --------------- 2000
करेला --------------- 2250
शलजम -------------- 500
मूली ------------------ 550
फूल एवं पत्ता गोभी -- 5000
नोट: उद्यान विभाग से जनपद में बाग और सब्जी के रकबे की जानकारी प्राप्त की गई।