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स्मार्ट सिटी बनने की राह में बाधा बन रहा कचरा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 23 Oct 2016 01:40 AM IST
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी योजना की दौड़ में शामिल सहारनपुर निगम बनने के छह साल बाद भी कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं कर सका है। अब यही कचरा सहारनपुर के योजना में चयन की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनता नजर आ रहा है।
स्मार्ट सिटी योजना के तहत जनवरी 2017 में शहर का स्वच्छता सर्वेक्षण होना है। कचरा प्रबंधन की व्यवस्था न होने की वजह से निगम अफसरों के हाथ-पांच फूूले हुए हैं। चुनौती यह है कि वह सर्वे के लिए पहुंचने वाली टीम को जवाब क्या देंगे?
सहारनपुर उन शहरों में शामिल है, जिनका चयन योजना के शुरूआती 98 शहरों में किया गया था। मगर योजना के तहत तीन बार हुई चयन प्रक्रिया में सहारनपुर अपना चयन कराने में विफल रहा। अब केंद्र सरकार ने जनवरी 2017 में सहारनपुर समेत पुराने और नए जोड़े गए कुल 499 शहरों का स्वच्छता सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया है।
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केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की टीम यह सर्वे करेगी। स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर सहारनपुर के अफसर टेंशन में हैं। दरअसल, नगर निगम बनने के छह साल बाद भी नगर निगम सहारनपुर के अफसर कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं कर सके हैं। योजना में तीन साल से शामिल होने के बावजूद इस दिशा में कोई नया कदम नहीं उठाया गया है। स्वच्छता सर्वे को लेकर अधिकारियों के हाथ-पांच फूल रहे हैं। उनके पास सर्वे के लिए पहुंचने वाली टीम को देने के लिए जवाब नहीं है।
रोज निकलता है 235 मीट्रिक टन कचरा
शहर से प्रत्येक दिन निकलने वाले कचरे का मात्रा लगातार बढ़ ही रही है। पिछले साल तक शहर से प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन कचरा निकलता था, जिसकी मात्रा अब 235 मिट्रिक टन से अधिक हो चुकी है। ऐसे में यदि समय रहते कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं की गई तो मुश्किल और बढ़ेगी ही। कचरा प्रबंधन की व्यवस्था न होने की वजह से नगर निगम इस कचरे को शहर से बाहर फेंकता है।
कुछ समय पहले पुराना कलसिया रोड पर पांवधोई नदी के पास एक बड़ी खाई को पाटने में कचरे का इस्तेमाल किया गया। बीमारियां फैलने के खतरे को देखते हुए स्थानीय लोगों ने कचरा डाले जाने का विरोध भी किया। मगर कोई लाभ नहीं हुआ। वर्तमान में चिलकाना रोड पर कचरा डाला जा रहा है।
कचरे से बनाया जा रहा खाद
एक एनजीओ पिछले करीब तीन साल से घर-घर से कचरा उठाकर उसका उपयोग खाद बनाने में कर रहा है। एनजीओ के कर्मचारी कचरे की छंटाई के बाद उससे खाद बनाते हैं, जिसका निर्यात भी होता है। वर्तमान में दो और संस्थाओं ने कचरा उठाने का ठेका लिया है।
यह संस्थाएं घर-घर से कचरा उठा रही हैं। इसके लिए जनता से शुल्क भी वसूला जा रहा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो शहर से प्रत्येक दिन निकलने वाले 235 मिट्रिक टन कचरे में से दस फीसदी का ही खाद बनाने में इस्तेेमाल हो रहा है। यानी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे प्रयास नाकाफी हैं।
स्वच्छ भारत मिशन भी सफल नहीं
शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन भी दम तोड़ता नजर आ रहा है। शहर में जगह-जगह लगे कचरे के ढेर नासूर बन चुके हैं। पुल खुमरान, पुल दाल मंडी, पुल जोगियान, कचहरी पुल के शारदानगर रोड आदि पर प्रतिदिन लगे रहने वाले कचरे के ढेर इसका उदाहरण हैं। साथ ही कचरा प्रबंधन की व्यवस्था न होना भी स्वच्छता मिशन पर बड़ा धब्बा है।
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स्मार्ट सिटी योजना के तहत जनवरी 2017 में शहर का स्वच्छता सर्वेक्षण होना है। कचरा प्रबंधन की व्यवस्था न होने की वजह से निगम अफसरों के हाथ-पांच फूूले हुए हैं। चुनौती यह है कि वह सर्वे के लिए पहुंचने वाली टीम को जवाब क्या देंगे?
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सहारनपुर उन शहरों में शामिल है, जिनका चयन योजना के शुरूआती 98 शहरों में किया गया था। मगर योजना के तहत तीन बार हुई चयन प्रक्रिया में सहारनपुर अपना चयन कराने में विफल रहा। अब केंद्र सरकार ने जनवरी 2017 में सहारनपुर समेत पुराने और नए जोड़े गए कुल 499 शहरों का स्वच्छता सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया है।
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केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की टीम यह सर्वे करेगी। स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर सहारनपुर के अफसर टेंशन में हैं। दरअसल, नगर निगम बनने के छह साल बाद भी नगर निगम सहारनपुर के अफसर कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं कर सके हैं। योजना में तीन साल से शामिल होने के बावजूद इस दिशा में कोई नया कदम नहीं उठाया गया है। स्वच्छता सर्वे को लेकर अधिकारियों के हाथ-पांच फूल रहे हैं। उनके पास सर्वे के लिए पहुंचने वाली टीम को देने के लिए जवाब नहीं है।
रोज निकलता है 235 मीट्रिक टन कचरा
शहर से प्रत्येक दिन निकलने वाले कचरे का मात्रा लगातार बढ़ ही रही है। पिछले साल तक शहर से प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन कचरा निकलता था, जिसकी मात्रा अब 235 मिट्रिक टन से अधिक हो चुकी है। ऐसे में यदि समय रहते कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं की गई तो मुश्किल और बढ़ेगी ही। कचरा प्रबंधन की व्यवस्था न होने की वजह से नगर निगम इस कचरे को शहर से बाहर फेंकता है।
कुछ समय पहले पुराना कलसिया रोड पर पांवधोई नदी के पास एक बड़ी खाई को पाटने में कचरे का इस्तेमाल किया गया। बीमारियां फैलने के खतरे को देखते हुए स्थानीय लोगों ने कचरा डाले जाने का विरोध भी किया। मगर कोई लाभ नहीं हुआ। वर्तमान में चिलकाना रोड पर कचरा डाला जा रहा है।
कचरे से बनाया जा रहा खाद
एक एनजीओ पिछले करीब तीन साल से घर-घर से कचरा उठाकर उसका उपयोग खाद बनाने में कर रहा है। एनजीओ के कर्मचारी कचरे की छंटाई के बाद उससे खाद बनाते हैं, जिसका निर्यात भी होता है। वर्तमान में दो और संस्थाओं ने कचरा उठाने का ठेका लिया है।
यह संस्थाएं घर-घर से कचरा उठा रही हैं। इसके लिए जनता से शुल्क भी वसूला जा रहा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो शहर से प्रत्येक दिन निकलने वाले 235 मिट्रिक टन कचरे में से दस फीसदी का ही खाद बनाने में इस्तेेमाल हो रहा है। यानी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे प्रयास नाकाफी हैं।
स्वच्छ भारत मिशन भी सफल नहीं
शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन भी दम तोड़ता नजर आ रहा है। शहर में जगह-जगह लगे कचरे के ढेर नासूर बन चुके हैं। पुल खुमरान, पुल दाल मंडी, पुल जोगियान, कचहरी पुल के शारदानगर रोड आदि पर प्रतिदिन लगे रहने वाले कचरे के ढेर इसका उदाहरण हैं। साथ ही कचरा प्रबंधन की व्यवस्था न होना भी स्वच्छता मिशन पर बड़ा धब्बा है।